दिलीप गुर्जर जी , आपकी इस दलित विरोधी पोस्ट को क्या आपकी पार्टी का सामूहिक निर्णय माना जाये ?

1,355

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित क्षेत्र है ,वर्तमान में यहां से राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष कैलाश मेघवाल विधायक है ,जैसा कि तमाम रिजर्व सीटों पर होता है ,यहां भी कमोबेश वही हालात है ,कहने के लिये यह दलित समुदाय के जनप्रतिनिधियों के लिए सुरक्षित है ,वरना तो बिल्कुल ही असुरक्षित क्षेत्र है ,टिकट दिलाने से लेकर नोट और वोट जो लोग दिलाते है ,उनकी जीहज़ूरी करने में ही हमारे लोगों की ज़िंदगी गुजर जाती है ,सुरक्षित क्षेत्रों के विधायक सांसद सिर्फ नाम मात्र के ही होते है ,असल मे उनकी चाभी किसी और व्यक्ति ,जाति या समूह के पास होती है ,हम लोग ऐसे जेबी दलित जनप्रतिनिधियों को पूना पैक्ट की खरपतवार समझते है ,ये लोग न छिड़कने के काम आते है और न ही लीपने के ,महज़ शो पीस बनकर गुलामी करते हुये अपनी वक़्त गुजारी करते है ,दो पैसा कमा कर बदनाम हो लेते है ,हर ऐरे गैरे नत्थू खैरे के देवरे धोकते हुये हर पल डर के माहौल में अपना राजनीतिक जीवन जीते है ।

दरअसल राजनीति इंसान को बहुधा कायरपन की तरफ धकेल देती है ,कुछ स्वाभिमानी खुद्दार किस्म के रीढ़ वाले लोग होते है ,जो अपनी शर्तों पर पॉलिटिक्स करते है ,बाकी तो बड़े नेताओं की चरण वंदना ,परिक्रमा और चापलूसी करके ही अपना अस्तित्व बचाये रखते है ,खास तौर पर रिजर्व सीटों से बनने वाले जनप्रतिनिधियों की हालात तो देशव्यापी ऐसी ही है ,ये किसी न किसी के मोहरे होते है ,मेहरबानी से जीतते है और कृपापात्र बनकर सहमे सहमे से डरे डरे डरे से रहकर उधार का जीवन जीते रहते है ,इनको इनके क्षेत्र में दलितों पर होनेवाला अत्याचार नहीं दिखता ,ये मुकदमे दर्ज नहीं होने देते ,समझौते करवाते है ,दरअसल ये दलित जनप्रतिनिधित्व की नाम पर गैरदलितों की दलाली ही करते है ,इनकी इच्छा रहती है कि दलित समुदाय इनके चरणों मे गिरा रहे और ये गैरदलितों की पगचम्पी करते रहें ,राजनीतिक आरक्षण के कारण बनने वाले ये जनप्रतिनिधि कभी दलितों के हित में बोलते नजर नहीं आते है ,हद दर्जे के डरपोक जीव बन जाते है ,इसका परिणाम यह होता है कि हर कोई इनका सार्वजनिक मख़ौल उड़ाने से भी बाज़ नहीं आते है ।

ताज़ा घटनाक्रम शाहपुरा (भीलवाड़ा ) सुरक्षित सीट का है ,यहां के कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष दिलीप गुर्जर अन्य पिछड़े वर्ग से आते है , स्वयं को पूर्व केंद्रीय मंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी डॉ सी पी जोशी के ख़ास बताते है ,उनकी फेसबुक प्रोफ़ाइल देखने से इस बात की पुष्टि भी होती है कि वे शायद भीलवाड़ा जिले में डॉक्टर सी पी जोशी के सबसे नजदीकी व्यक्ति होंगे ।
खैर ,वे जो भी है ,बहरहाल हैं ,कांग्रेस के टिकट वो ही दिलवाते है ,आलाकमान के सामने उनकी पैरवी से बेचारे दलितों को टिकट दिये जाते है ,क्योंकि कांग्रेस की नजर में शायद दलितों की खुद की तो कोई औकात होती नहीं है ,इसलिये दिलीप जी सरीखे लोगों की पैरवी और मेहरबानी के चलते राहुल गांधी निर्णय लेते है और सुरक्षित क्षेत्रों में किसे विधायक बनाना है ,यह तय कर लिया जाता है । कांग्रेस पार्टी का शायद ऐसा ही सिस्टम है ,जो दिलीप भाई की पोस्ट पढ़कर समझ आया ।

तो 10 मार्च 2018 को शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक के टिकट चाहने वालों के लिए कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष दिलीप गुर्जर की ओर से 27 शर्तों वाला करारनामा घोषित किया गया ,जिसकी शुरुआत में ही कहा गया कि -” हम आम कांग्रेसी कार्यकर्ता होने के नाते टिकट के लिए उन्हीं दावेदारों की हाईकमान से पैरवी करेंगे जो ‘भगवान चारभुजा नाथ के मंदिर में गंगाजली उठाकर अपने बच्चों के सिर पर हाथ रखकर कसम खा कर निम्नलिखित शपथ लेगा ”

मतलब अब सेकुलर होने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी में टिकट मांगने के लिए भी मन्दिर में गंगाजल उठाकर कसमें खानी होगी ,इतना ही नहीं बल्कि असंवैधानिक तरीके से ‘ बच्चों के सिर पर हाथ रखकर शपथ’ भी लेनी होगी ,तब टिकट के लिए पार्टी के लोग उनकी हाईकमान के सामने पैरवी करेंगे !

क्या यह कांग्रेस पार्टी का फैसला है या डॉ सी पी जोशी की सहमति से उनके संसदीय क्षेत्र के दलित जनप्रतिनिधियों के लिए ऐसी प्रक्रिया उनके खास सिपहसालारों ने तय की है ,क्या गैर दलित जनप्रतिनिधियों से भी ऐसी ही कसमें मन्दिर मस्जिदों में कांग्रेस दिलवाती है ? अगर नहीं तो सिर्फ रिजर्व क्षेत्रों में ही ऐसा करने की पार्टी की इस नीति की कोई खास वजह ?

कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष दिलीप गुर्जर ने 27 कसमें प्रतिपादित की है ,जो काफी अपमानजनक और शर्मनाक है ,इनको पढ़कर लगता है कि अनुसूचित जाति जनजाति से आने वाले जनप्रतिनिधि अव्वल दर्जे के भ्रष्ट ,कमीशनखोर, स्वार्थी ,मूर्ख होते है ,वे कठपुतली होते है ,वे मंथली लेते है ,वे हफ्ता वसूलते हैं वे ट्रांसफर की दुकान चलाते है , वे पक्षपाती होते है ,तिलक तराजू तलवार को चार जूते मारने वाली बहुजन विचारधारा के होते है ,वे राजधर्म का पालन नहीं करते है ,वे तुच्छ और ओछी मानसिकता से काम करते है , झूठ जाल पाखण्ड करते है ,झूठी गोलियां देते है , गाड़ी के काले कांच चढ़ा कर घूमते है , भाई भतीजावाद करते है ,वे लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाते है ,वे विधायकी को व्यवसाय बना लेते है ,वे क्रोस वोटिंग करते है ,वे विपक्ष के साथ सांठगांठ रखते है ,वे अपने पावर का दुरुपयोग करते है ,वे भितरघाती होते है और पॉलिटिक्स को व्यवसाय बना लेते है आदि इत्यादि …!

इन 27 शपथ बिंदुओं से यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है कि तमाम दुर्गुण ,कमजोरियां दलितों में ही होती है ,गैरदलित जनप्रतिनिधि एकदम चरित्रवान ,शुद्ध ,परम पवित्र ,ईमानदार और सब मानवीय कमज़ोरियों से ऊपर उठे हुए देवपुरुष होते है ,वे एक भी पैसा सार्वजनिक जीवन मे नहीं कमाते है ,राजनीति उनके लिए बहुत पुण्य का काम है ,जबकि दलितों के लिए पाप कर्म है ।

क्या दिलीप गुर्जर जिस वर्ग से आते है ,उससे आने वाले जनप्रतिनिधियों को उन्होंने इस कसौटी पर कसा है ? क्या उन्होंने अपनी पार्टी के तमाम नेताओं और अपने पोलिटिकल आक़ाओं की चरित्र परीक्षा ले ली है ? उन्हें इस तरह से अजा जजा वर्ग के जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने हेतु कांग्रेस पार्टी ने अधिकृत किया है ? अगर यह कांग्रेस का अधिकृत स्टैंड है तो भीलवाड़ा ही नहीं बल्कि राजस्थान भर के दलितों को इस बारे में जरूर सोचना चाहिए कि आपके बारे में कैसी मानसिकता काम कर रही है ?

हो सकता है कि कुछ पदलोलुप ,विधायकी के लालची लोग इस प्रकार की गौरक़ानूनी ,दलित विरोधी ,असंवैधानिक प्रक्रिया का समर्थन भी कर दें ,लेकिन इस पोस्ट के वायरल होने के बाद से दलित वर्ग में गुस्सा बढ़ रहा है ? लोग पूंछने लगे है कि आज भी राजनीतिक दलों के जिम्मेदार पदाधिकारी दलितों के प्रति कैसा घृणित रवैया अपनाए हुये है ! दलितों की खैरख्वाह होने का दम भरने वाली कांग्रेस पार्टी का यह नया दलित विरोधी चेहरा है ,इससे उस चरित्र की झलक भी मिल जाती है कि रिजर्व सीटों पर किस किस्म की राजनीति चल रही है ।

मुझे मालूम है कि जिन्हें टिकट ,वोट और पद चाहिए ,वे इस अपमान को सहर्ष स्वीकार लेंगे ,मगर जिनको नोट ,वोट और स्पोर्ट नहीं चाहिए ,वे क्यों चुप है ? भाई दिलीप जी , आप अपना जनप्रतिनिधि चुनना चाहते हो या किसी जरखरीद गुलाम को अपनी जेब मे रखना चाहते हो ? अगर यह आपके राजनीतिक रहनुमाओं और पार्टी का सामूहिक निर्णय है तो कांग्रेस पार्टी को इसकी कीमत चुकाने की तैयारी करनी चाहिये ।

– भंवर मेघवंशी
( लेखक शून्यकाल के संपादक है )

Leave A Reply

Your email address will not be published.