आम जन का मीडिया
Dear Baba Saheb!

प्रिय बाबा साहेब !

(सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र महला का खत बाबा साहब अम्बेडकर के नाम )

प्रिय बाबा साहेब,

यह देश और समाज आपके जाने के बाद और आजादी के बाद के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है. यहां किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, किसानों को उनकी उपज का वाज़िब दाम नहीं मिल रहा. गरीबी लगातार बढ़ती जा रही है, आर्थिक विषमता चरम पर है. बेरोजगारी अपने सबसे विकराल रूप में है. किसानों, गरीबों, मजदूरों, युवाओं और बेरोजगारों की कोई नहीं सुनता.

इक्कसवीं सदी में भी यहां लोग धर्म को बचाने के लिए मर-कट रहें हैं, जाति को बचाने के लिए मर-कट रहे हैं, जातिवादी नस्ल को बचाने का नारा दे रहें हैं. यहां महिलाओं पर हिंसा और उनका दमन जारी है. यहां लोकतंत्र, संविधान और इंसानियत की हत्या हो चुकी है.

यहां लोग इंसान की बराबरी में यक़ीन नहीं करते. यहां लोग सामने वाले को इंसान ही नहीं मानते. यहां तो हर आदमी अपनी जाति, धर्म और नस्ल के दलदल में धंसा जा रहा है.

बाबा साहेब आपने 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा में एकदम सही कहा था कि ” कौन कह सकता है कि भारत के लोगों और उनके राजनीतिक दलों का व्यवहार कैसा होगा ? जातियों तथा संप्रदायों के रूप में हमारे पुराने दुश्मनों के अलावा, विभिन्न तथा परस्परविरोधी विचारधारा रखने वाले राजनीतिक दल बन जाएंगे. क्या भारतवासी देश को अपने पंथ से ऊपर रखेंगे या पंथ को देश से ऊपर रखेंगे ? मैं नहीं जानता. लेकिन यह बात निश्चित है कि यदि राजनीतिक दल अपने पंथ को देश से ऊपर रखेंगे तो हमारी स्वतंत्रता एक बार फिर खतरे में पड़ जाएगी और संभव्तया हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाए. हम सभी को इस संभाव्य घटना का दृढ़ निश्चय के साथ प्रतिकार करना चाहिए. हमें अपनी आजादी को खून के आखिरी कतरे के तक रक्षा करने का संकल्प करना चाहिए”

बाबा साहेब, आपकी भविष्यववाणी ठीक साबित हुई . हमारे लोग और राजनीतिक दल अपने पंथ से ऊपर नहीं उठ पाएं, उन्होंने हमेशा अपने पंथ को देश से ऊपर रखा. अपने धर्म, जाति और जातिवादी नस्ल को बचाने की लड़ाई लड़ रहें लोगों के लिए उनका पंथ ही सब कुछ है, वे देश से बिल्कुल भी प्यार नहीं करते. वे इंसान की बराबरी में यक़ीन ही नहीं करते, वे इंसान से मोहब्बत ही नहीं करते. वे गिरोहबाज़ है, वे गिरोह में ही रहना चाहते हैं. वे देश को हज़ारों साल पहले के जंगल राज में ले जाना चाहते हैं. वे इंसानियत, न्याय, समता, लोकतंत्र, मानवता, संविधान, शांति और बंधुता के दुश्मन हैं.

लेकिन खुबसूरत बात यह है कि सूचनाक्रांति और सोशलमीडिया के दौर में देश के लोकतंत्र समर्थक लोगों ने 2 अप्रेल को देश का सबसे ऐतिहासिक भारत बंद किया. इस बंद में तमाम लोगों ने मिलकर एकजुट होकर लोकतंत्र के पक्ष में आवाज बुलंद की. इस बंद से जाति कमजोर हुई है.

आपका जातिमुक्त भारत बनाने का सपना अब देश का सपना बन रहा है. आपके साथ-साथ यह सपना बुद्ध, कबीर, छोटूराम, चरणसिंह, भगतसिंह, ज्योतिबा, सावित्री, फातिमा, शाहु, ललई, पेरियार समेत तमाम राष्ट्रनायकों का सपना है. अब देश के युवा इस सपने के साथ एकजुट हो रहे हैं.

आपके जन्मदिन पर यह संकल्प लेते हैं कि जातिमुक्त भारत बनाने और संविधान, लोकतंत्र और इंसानियत के लिए खून के आखिरी कतरे तक लड़ाई पूरी शिद्दत से जारी रहेगी.

सादर,
एक भारतीय नागरिक.

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