डांगावास हत्याकांड सोशल मीडिया प्रकरण में नहीं हुए फरिदायियो के बयान

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( कमल भट्ट )
राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता उपखण्ड के समीप हुए बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड जो 14 मई 2015 को हुआ था। उसके चार दिन बाद डांगावास हत्याकांड़ सघंर्ष समिति मेड़ता के बेनर तले दलित समाज के लोग उपखण्ड अधिकारी मेड़ता को ज्ञापन देने हेतु रेली निकाल रहे थे। तभी जाट समुदाय के दो सरकारी अध्यापक शीशपाल ओलण व रामनिवास जाट ने सोशल मीडिया पर मेघवाल समाज को डांगावास हत्याकांड़ के सम्बंध में जातिसूचक गलत टिप्पणी की थी। जिस पर मेडतारोड़ निवासी प्रीतम खीची देहात जिला अध्यक्ष राष्टी्य शोषित परिषद ने मेडता थानाधिकारी को लिखित में शिकायत प्रस्तुत की तथा मेघवाल व दलित समाज के हजारो लोग थाने के बाहर मोजूद रहे।

इस प्रकरण में विनोद मेहरा व अभिषेक तानण ने अपनी गवाई व मय फोन सीम पुलिस को प्रस्तुत की थी। तात्कालिन सीं ओ़ बेदी ने जांच कर आरोपो को प्रमाणित मानते हुए मेडता सीटी के न्यायालय में चालान पेश किया। बार-बार पीडित व गवाहों को बुलाया जाता है, मगर उनके बयान नही होते हैं और वे सभी मायूस होकर लौट जाते हैं। न्याय की आस लगाये तीन साल से अधिक समय गुजर चुका हैं।

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