दलित ,आदिवासी एवं राजपूत संवाद !

सामाजिक सद्भावना-3

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राजधानी जयपुर के झौंटवाडा इलाके में 16 फरवरी 2019 को आयोजित दलित ,आदिवासी एवं राजपूत संवाद के दौरान बहुजन चिंतक डॉ.एम.एल. परिहार की ओर से क्षत्रिय युवक संघ के प्रमुख भगवान सिंह जी गौतम बुद्ध की एक मनोहारी तस्वीर और भारतीय संविधान की प्रति भेंट की गई।

सभी प्रतिभागियों को भी संविधान की एक एक प्रति दी गई, दिन भर की चर्चा संविधान की प्रस्तावना पर केंद्रित रही। इंसाफ, आज़ादी,बराबरी और भाईचारा जैसे संवैधानिक मूल्यों के इर्द गिर्द इस संवाद को बुना गया था।

जो जन्मजात निंदक और पेशेवर आलोचक है,जिनकी दुकान विभिन्न समुदायों के बीच आग लगाने, भावनाएं भड़काने से चलती है,उन निहित स्वार्थी तत्वों के अलावा अधिकांश लोगों ने वंचित समूहों व क्षत्रिय समुदाय के लोगों के इस प्रकार एक साथ बैठने की प्रक्रिया का दिल खोलकर स्वागत किया।

संवाद में मौजूद रहे गोटन ( नागौर ) के सरपंच नारायण सिंह राठौड़ ने बहुत मार्के की बात कही ,उन्होंने कहा कि वंचितता के दर्द को हम भी जानते है,क्योंकि कभी भी पूरी जाति शासक नही होती है,शासन तो एक ही जागीरदार ,राजाधिराज, राणा, महाराणा करते थे,शेष लोग तो उसी क्रमबद्धता के शिकार थे,दलितों की भांति छुआछूत नहीं था,मगर भेदभाव तो था ही ,कमतर कामों में लगाया जाता था,भूमि व संपत्ति के अधिकार नहीं थे,युद्ध के वक़्त आम राजपूत लड़ते थे और शांतिकाल में उनको खेती करनी पड़ती थी ,वंशानुगत शासन व्यवस्था में कोई आम राजपूत कभी शासक नहीं बन पाता,मगर यह भारत के संविधान की ही देन है कि मैं गोटन का सरपंच बना हूँ और हजारों अन्य साधारण पृष्ठभूमि के क्षत्रिय पंच, सरपंच,एमएलए, एमपी,मंत्री,मुख्यमंत्री बन पाए हैं। संविधान ने हर भारतीय को सक्षम किया है,उसे अधिकार सम्पन्न बनाया है,यह संविधान हम सबका साझा सपना है ।

अन्य वक्ताओं ने भी नारायण सिंह जी की बात का समर्थन किया तथा कहा कि संविधान का रास्ता ही सबके लिए उपयुक्त है,हमें झूठे दम्भ से परे हो कर एक समान धरातल पर नये भारत को रचना होगा,जिसमें हर व्यक्ति को गरिमा मिले, सबको सामाजिक,आर्थिक व राजनीतिक न्याय मिले, सबको अवसरों की समानता मिले, सबको प्रतिष्ठा मिले, सबको धर्म,उपासना,आस्था,विचार व अभिव्यक्ति की आज़ादी हासिल हो,सबके मनों में ‘हम भारत के लोग’ होने का भाव घनीभूत हो ताकि हम स्वतंत्रता, समता,न्याय व बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों को प्राप्त कर सकें ।

सामाजिक सद्भावना संवाद इस मायने में भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा सकता है कि इसमें बहुत सारे डायवर्स ग्रुप्स ,भिन्न भिन्न थॉट प्रोसेस के लोग शामिल हुये।

राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता तो थे ही,चिंतक,लेखक,बुद्धिजीवी,पत्रकार ,विधिवेत्ता,खिलाड़ी, व्यवसायी ,जल विशेषज्ञ ,संविधान एक्सपर्ट और शिक्षक वर्ग से भी लोग आये ।

देश के समाज कर्मियों में एक जाना पहचाना सतत संघर्षशील नाम है,हिन्दू सिंह सोढ़ा ,जिन्होंने अपना पूरा जीवन पाकिस्तान से विस्थापित हो कर भारत आये विस्थापितों को नागरिकता व नागरिक अधिकार दिलाने में लगा दिया।

वे पाकिस्तान में जन्मे,विभाजन का दर्द झेलकर भारत आये और उन्हीं की तरह विस्थापन की पीड़ा झेलकर आये पाक विस्थापितों के लिए समर्पित हो गये ।

हिन्दू सिंह जी की ही बदौलत हजारों पाक विस्थापितों को भारत भूमि ने अपनाया,उन्हें हक अधिकार मिले, ये लोग बहुतायत में दलित व आदिवासी ही थे और आज भी हैं,अब भी कईं लोग भारत की नागरिकता के अधिकार से वंचित हैं,उनके लिए लड़ रहे है हिन्दू सिंह सोढा।

सोढा चाहते तो किसी न किसी सियासी दल का दामन थाम कर बड़े आराम से लोकसभा,राज्यसभा अथवा विधानसभा की कुर्सी हासिल कर सकते थे,पर उन्होंने फूलों का रास्ता नहीं अपनाया, उन्होंने कंटकाकीर्ण मार्ग खुद ही चुना ।

पाकिस्तान से भागकर राजस्थान की सरजमीं पर आये लोगों में भील,मेघवाल व राजपूत थे,सबको बिना किसी जाति भेद के हिन्दू सिंह जी ने भारत का हिस्सा बनाने का अनथक संघर्ष छेड़ा, विगत चार दशक से उनकी आवाज़ इन विस्थापितों के लिए देश के हर मंच पर गूंजी है।

पिछले दो दशक की सामाजिक सक्रियता के दौर में मैंने विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिन्दू सिंह सोढा व उनके पाक विस्थापित संगठन को सदैव संघर्षरत देखा है,ऐसी एवरग्रीन लड़ाका शख्सियत भी दलित,आदिवासी व क्षत्रिय समुदाय के इस सद्भावना संवाद में शिरकत करने जयपुर पहुंचे और उन्होंने अपने बचपन,छात्रजीवन,सामाजिक संघर्षों के सुदीर्घ अनुभवों के आधार पर इन जमातों के नजदीक आने की जरूरतों पर बल दिया। उनकी उपस्थिति की परिघटना भी इस संवाद को और अधिक समृद्ध करने वाली रही ।

जारी….

भंवर मेघवंशी

{संस्थापक -दलित,आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान(डगर)}

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