राजस्थान का दलित आदिवासी एजेंडा !

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(राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिये विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा बनाये जा रहे चुनावी घोषणा पत्रों में शामिल करने के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग का मांग पत्र )

जैसा कि हम जानते हैं कि अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग सबसे कमजोर एवं हाशिये वाला समुदाय है, इनके साथ जाति आधारित भेदभाव, अन्याय, अत्याचार व शोषण, उत्पीड़न होता रहा है, इनमें ज्यादातर लोग भूमिहीन हैं, कृषि, आवास व व्यवसाय हेतु भू स्वामित्व नहीं होने, निजी उद्यमों में नगण्य भागीदारी, अधिकांश लोगों का खेतिहर मजदूर होना तथा बहुत ही कम लोगों का नियमित वेतन भोगी नौकरियों में होने के चलते यह समुदाय आज भी सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक व राजनीतिक रूप से पिछड़े हुए हैं.

इन वर्गों के उन्नयन व सर्वांगीण विकास हेतु राजस्थान प्रदेश में धरातल पर कार्यरत विभिन्न संस्था, संगठनों व व्यक्तियों से विचार-विमर्श के दौरान जो सुझाव उभर कर आये,वे यहां प्रस्तुत है –

1. अनुसूचित जाति व जनजाति की आबादी के अनुपात में बजट का आवंटन व उसका समुचित उपयोग इन वर्गों हेतु करने के लिए तेलंगाना की तर्ज पर ‘अनुसूचित जाति जनजाति उपयोजना कानून’ ( SC/ST Sub Plan Act ) राजस्थान में भी लागू किया जाए ताकि यह फंड सीधे और विशेष रूप से अनुसूचित जाति/जनजाति के कल्याण हेतु लगाया जा सके।

2. अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के साथ होने वाले छुआछूत, भेदभाव, व उत्पीड़न की रोकथाम हेतु ‘अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण ( संशोधन ) विधेयक’ को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाए,इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निगरानी की पूरी व्यवस्था की जाये।

3. अनुसूचित जाति व जनजाति के भूमिहीन लोगों को कृषि, आवास, शमशान तथा व्यवसाय हेतु भूमि आवंटित की जाए तथा अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग की भूमि पर अवैध कब्जे हटाने हेतु विशेष अभियान चलाया जाये।

4. अनुसूचित जाति व जनजाति के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु उद्यमों, विनिर्माण व सेवा उद्योगों में अनुसूचित जाति,जनजाति वर्ग के स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों को सहायता प्रदान की जाये, उन्हें ऋण प्रदान करने तथा उनके द्वारा निर्मित उत्पादों की सरकारी खरीद में भागीदारी सुनिश्चित की जाये, साथ ही सरकारी उपक्रमों, निगमों व कंपनियों में इन वर्गों अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों हेतु भूमि आवंटन, वित्तीय सुविधाएं, विपणन प्रोत्साहन तथा निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाये।

5. संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था में कोई छेड़छाड़ नहीं की जाये, राज्य में अजा ,जजा वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाकर अनुसूचित जाति हेतु 18% व जनजाति हेतु 14% किया जाये। राज्य यह सुनिश्चित करें कि सरकारी व अर्द्धसरकारी क्षेत्र में अनुसूचित जाति जनजाति के लिए तय पदोन्नति में आरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके।

6. निजी क्षेत्र में अनुसूचित जाति व जनजाति को आरक्षण दिया जाये।

7. विभिन्न प्रयासों के बावजूद सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों व अन्य सार्वजनिक उपक्रमों में ‘बैकलॉग रिक्तियां’ एक गंभीर चिन्ता का विषय है, इसीलिए राज्य सरकार सभी आरक्षित पदों में बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाये।

8. शैक्षणिक संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव,उत्पीडन व शोषण की रोकथाम के लिए एक विशेष कानून बनाया जाये, जो समानता के अधिकार को सुनिश्चित करें।

9. अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का सार्वभौमिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए बने कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाये, इन वर्गों के विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी शिक्षा तथा नवोदय की तर्ज पर आवासीय विद्यालय तथा छात्रावास में छात्रवृत्ति राशियों की बढ़ोतरी को मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाये, इन वर्गों की बालिकाओं हेतु ‘सावित्रीबाई फुले स्कूटी वितरण योजना’ लागू की जायें और वर्ष में 2 बार भुगतान हेतु व्यवस्था की जाए तथा छात्रवृत्ति के देरी से भुगतान पर ब्याज दिया जाये।

10. सफाई कर्मचारियों को सीवर लाइन सेप्टिक टैंक में नहीं उतारा जाए तथा ‘हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के लिए नियोजन का प्रतिषेध और पुनर्वास अधिनियम 2013’ को सख्ती से लागू किया जाये। ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों में सफाई कर्मियों के अनुबंध प्रणाली पर नियोजन की व्यवस्था समाप्त की जाकर उन्हें स्थाई रोजगार प्रदान किया जाये।

11. 2 अप्रैल को राजस्थान में हुए भारत बंद के आयोजन के दौरान दर्द सभी मुकदमे वापस लिए जाये, जो लोग मारे गए अथवा घायल हुए उन्हें समुचित मुआवजा दिया जाये।

12. राजकीय उपक्रमों, निगमों, बोर्डो, आयोगों, सलाहकार समितियों, नोटरी पब्लिक तथा राजकीय अभिभाषकों व अन्य प्रशासनिक समितियों में अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के लोगों का उनकी आबादी के अनुपात में मनोनयन किया जाये।

13. अस्थाई,संविदा व मानदेय पर होने वाली नियुक्तियों में आरक्षण की पालना की जाये।

14. अनुसूचित जनजाति उप योजना (TSP) क्षेत्र में निवासरत अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण घटा दिया गया है, उसे पुनः 16% बहाल किया जाये तथा अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों की व्यवस्था की जाये।

15. राज्य सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में नगर पालिका/परिषद क्षेत्र के अनुसूचित जाति, जनजाति बाहुल्य इलाकों में ‘अंबेडकर भवन’ निर्मित करें तथा उनमें फूले, अंबेडकर, बुद्ध, कबीर, बिरसा, रविदास सहित अन्य प्रगतिशील साहित्य रखा जाये।

16. अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के बेरोजगार युवाओं के लिए ‘एकीकृत सार्वजनिक रोजगार योजना’ लागू की जाये, ताकि बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

17. राजनीतिक दल सत्ता व संगठन में अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के बोलने वाले, निर्भीक व स्वतंत्र स्त्री-पुरुषों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें तथा अनुसूचित जाति आयोग, जनजाति आयोग तथा विकास वित्त निगम को फंड, फंक्शन व फंक्शनरी मुहैया करवाये।

18. अनुसूचित जाति,जनजाति वर्ग के मीडिया कर्मियों के प्रेस क्लबों को ब्लॉक स्तर पर भूमि आवंटित की जाये तथा वहां पर भवन निर्माण हेतु सहयोग प्रदान किया जाये।

19. अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग की महिलाओं की आजादी, गरिमा व सुरक्षा सुनिश्चित की जाये, उनके साथ होने वाली यौनिक हिंसा व शोषण से मुक्ति के लिए बने कानूनी प्रावधानों की प्रभावी पालना की जाये।

20. हाल ही में देखा गया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग तथा अन्य समुदायों के मध्य विद्वेष का भाव बढ़ा है, इस बढ़ती नफरत व अविश्वास को खत्म करने के लिए ग्रास रूट लेवल पर ‘ समन्वयन व सद्भावना समितियां ‘ बनाई जाये।

21. अनुसूचित जाति व जनजाति के आदर्शों, महापुरुषों, महास्त्रियों, आस्था स्थलों तथा बाबा साहब डॉ. अंबेडकर की प्रतिमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाये, प्रत्येक विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर पीठ की स्थापना की जाये।

( कृपया अपने अपने संगठन ,संस्था,सभा,महासभा के लेटरपैड पर उपरोक्त एजेंडे को राजनीतिक दलों को भेजें ,साथ ही चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों से भी चर्चा करें )

भंवर मेघवंशी (सम्पादक-शून्यकाल)

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