नवग्रह आश्रम बना असाध्य रोगों के उपचार का केंद्र

- सुरेश मेघवंशी, करजालिया - सुरेश मेघवंशी, करजालिया

330

– सुरेश मेघवंशी, करजालिया

जिले के रायला के समीपस्थ स्थित मोतीबोर का खेड़ा में स्थापित किये गये श्रीनवग्रह आश्रम इन दिनों देश व दूनियां में विख्यात हो रहा हैं। यहां स्थापित आश्रम से इन दिनों 29 विभिन्न असाध्य रोगों का उपचार वानस्पतिक व आयुर्वेद पद्वति से किया जा रहा है। प्रति शनिवार व रविवार को यहां मरीजों का हुजूम लगता है। इसे देश में असाध्य रोगों के उपचार केंद्र की संज्ञा भी दी जा सकती है।

श्रीनवग्रह आश्रम सेवा संस्थान संचालक मंडल ने देश भर के सैनिकों व पूर्व सैनिकों को आश्रम में निशुल्क औषधियां देने का निर्णय लिया है। संचालक हंसराज चोधरी ने बताया कि सैनिक देश के किसी भी कोने में तैनात हो, उसके परिचय पत्र के आधार पर उसको औषधियां निशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। इसी प्रकार पूर्व सैनिकों को भी यह सुविधा मुहैया होगी, उनको भी परिचय पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। चोधरी ने बताया कि देश की सुरक्षा प्रहरी के रूप् में सेवा देने वालों के प्रति सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि उनको यह अहसास हो कि देश उनके साथ संबल बन कर खड़ा है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था इसी सप्ताह से लागू कर दी गई है। ऐसा होने से देश के सभी सैनिक पूर्व सैनिक इसका लाभ ले सकेगें।

उल्लेखनीय है कि विभिन्न रोगों के उपचार के लिए देश विदेश के 353 प्रकार की औषधीय प्रजातियों के पौधे यहां लगे है। बद्रीनाथ त्रासदी के बाद मानवसेवा को परमोधर्म मान कर इस पुनित कार्य में लगे हसंराज चोधरी अपने जमाने के ख्यातनाम रंगकर्मी रहे हैं। राजकीय सेवा से निवृति लेने के बाद उनको आयुर्वेद व वानस्पतिक पद्वति से इतना लगाव हुआ कि उन्होंने बाकायदा आयुर्वेद व पंचकर्म का डिप्लोमा भी किया।

चोधरी आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है क्यों कि देश से इनके पास आने वालों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। उनका संकल्प है कि यह आश्रम हर प्रकार के रोगों के उपचार का केंद्र बिंदू बने। तथा भारत केंसर मुक्त हो सके। हमेशा से ही आर्थिक लाभ से दूर रहने का संकल्प दोहराते हंसराज चोधरी कहते है कि उनके यहां आने वाला रोगी उनके उपचार पद्वति से ठीक हो जाता है तो उसे आत्मिक सकून मिलता है, मरीज से वो केवल इतना चाहते है कि वो भी इसी प्रकार लोगों की सेवा करें तथा अपने जैसे अन्य मरीजों को उनके यहां लाकर उनको ठीक करावें। उन्होंने अपनी पद्वति से नई पीढ़ी को पारंगत करने के लिए बाकायदा अपने यहां गुरूकुल भी प्रारंभ किया है जहां इन दिनों एक दर्जन विद्यार्थी उनसे शिक्षा दीक्षा ग्रहण कर रहे है। चैधरी चाहते है सनातन संस्कृति का हिस्सा रही प्राचीन चिकित्सा पद्वति की ओर से सामान्य लोगों का रूझान एक बार फिर बढे।

चोधरी बताते है कि उनके यहां रोपित किये गये 353 प्रकार के औषधिय पौधों से केंसर, टीबी, डायबिटिज जैसी गंभीर बिमारियों का निःशुल्क उपचार किया जाता है। दुर्लभ पत्तियों से मरीज का शर्तीया इलाज किया जाता हैं इन पत्तियों से केंसर, टीबी, डायबिटिज के अलावा दमा, टाईफाईड, ल्यूकोरिया, चर्मरोग, रेतीरोग रसौली, गठिया बाय, पाईल्स, पीलिया, साईटिका, मानसिक रोग जैसी बिमारियों का उपचार होता है।

अपने आपको सनातन संस्कृति का संवाहक व संर्वधक मानकर मरीजों की सेवा के कार्य में लगे हंसराज चोधरी वहां आने वाले मरीज के साथ काउंसलिंग कर पहले तो बिमारी के बारे में उसके मन में फैली भ्रांति को दूर करते है फिर उसे मानसिक रूप् से ठीक होने के लिए तैयार करते है। आस्था व विश्वास के सिद्वांत पर उपचार प्रांरभ कर हंसराज चैधरी निर्धारित समय में हर रोग को ठीक करने का दावा करते है।

उल्लेखनीय है कि इस आश्रम में प्रत्येक शनिवार व रविवार को आने वाले लोगों को निःशुल्क आयुर्वेदिक जानकारियां एवं मरीजों का इलाज किया जाता है। आश्रम के संचालक हंसराज चैधरी का दावा है कि वे विगत वर्षों में अब तक हजारों लोगों के कैंसर का इलाज आयुर्वेद पद्धति से सफलतापूर्वक कर चुके है। दरअसल वे कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी अभियान चला रहे है। उनसे मोाबाइल 07665555755 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने नियुक्त किया रिसोर्स परसन
आश्रम के अजय चोधरी ने बताया कि केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी हंसराज चैधरी को रिसोर्स पर्सन नियुक्त किया है, जिनका प्रमुख कार्य कैंसर जैसी बिमारियों का वानस्पतिक पद्वति से उपचार करने के बारे में खोजबीन कर केंद्र सरकार को रिपोर्ट देना है। इसके अलावा भी केंद्र सरकार ने चोधरी की सेवाएं वानस्पिक विभाग में भी सदस्य के रूप में स्वीकार की है।

देश में इतने औषधीय पौधे कहीं नहीं

नवग्रह आश्रम में वर्तमान में 353 प्रकार की औषधीय प्रजातियों के पौधे रोपित किये गये है। सभी पौधे अच्छी तरह से चल रहे है। उनको उनकी आवश्यकता के अनुरूप वहां पर वातावरण दिया जाता है। इनमें कई पौधे तो ऐसे है जो हिमालय की पहाड़ियों में ही उग सकते है, उनको भी बड़ी शिद्दत से यहां पर उगाया गया है। गत वर्ष आस्ट्रेलिया के विद्यार्थियों का दल भी नवग्रह आश्रम में अध्ययन करने आया था, यहां से जाने के बाद उन विद्यार्थियों ने वहां के भी पौधे भेजे जिनको भी यहां पर लगाया गया है। चोधरी दावा करते है कि देश भर में किसी भी एक परिसर में 353 प्रकार की औषधीय प्रजातियों के पौधे नवग्रह आश्रम के अलावा कहीं नहीं मिलेगें।

Leave A Reply

Your email address will not be published.