करजालिया में मनाई गई राणा पूंजा भील की जयंती !

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करजालिया ग्राम पंचायत में भील राणा पूंजा की जयंती दलित आदिवासी एवम घुमन्तू अधिकार अभियान राजस्थान के द्वारा मनाई गई । जयंती समारोह के मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने इस अवसर पर कहा कि मेवाड़ की आज़ादी में और हल्दीघाटी के युद्ध मे महाराणा प्रताप को सबसे मजबूत सहयोग भील आदिवासी समाज का मिला ,जिनका नेतृत्व राणा पूंजा भील कर रहे थे ।
मेघवंशी ने बताया कि झडोल के भोमट परगने के पानरवा गांव के भील राजा पूंजा ने महाराणा प्रताप के साथ जान की बाजी लगा दी थी ,उन्होंने ही महाराणा के परिवार की रक्षा की थी ,इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि जब हल्दीघाटी युद्ध के उपरांत प्रताप अपनी माँ को लेने पानरवा पंहुचे तो उनकी माँ ने कहा कि -पूंजा भी तुम्हारी तरह मेरा पुत्र है और उसको मेवाड़ महाराणा के बराबर आदर सत्कार देते रहना .फलस्वरूप मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ महाराणा और दूसरी तरफ भील राणा पूंजा को अंकित किया गया और आज भी पूर्व राजपरिवार में राजतिलक जैसी प्रथा भील सरदार के पांव के अंगूठे के रक्त से किया जाता है ।
इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष भील समाज आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष नारूलाल भील ने कहा कि भील समाज ने सदैव मेवाड़ की आन बान को बरकरार रखने के लिए अपना बलिदान दिया ,उन्होंने नानकजी भील ,टंट्या भील ,कालीबाई सहित अन्य भील वीरों और रामायण के रचयिता आदि भील पुरुष वाल्मीकि के बारे में भी बताया । नारूलाल ने कहा कि आज भील समाज की स्थिति बडी विकट है ,उनके संसाधन छीने जा रहे है ,उन पर अत्याचार बढ़ रहे है ।जिनकी रोकथाम जरूरी है ।
कार्यक्रम के समन्वयक डगर के कार्यकारी प्रांतीय संयोजक देबी लाल मेघवंशी ने अपने संबोधन में कहा कि भील समाज एक स्वाभिमानी समाज रहा है और उसे आज़ादी सदैव प्रिय रही है ,राणा पूंजा भील ने महाराणा को जो मदद की ,उसके लिए मेवाड़ ही नही बल्कि पूरे मुल्क को उनका आभारी रहना चाहिए । राणा पूंजा जयंती के इस कार्यक्रम में रामलाल भील ,भील आदिवासी महासभा के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश भील ,प्यारेलाल रेगर ,हरीश सालवी ,हीरालाल मेघवंशी ,ललित मेघवंशी सहित कई अन्य लोग भी मौजूद थे ,कार्यक्रम के अंत मे मुख्य अतिथि भंवर मेघवंशी ने तीर चला कर किया ।

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