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स्पेशल रिपोर्ट

भवन एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल में दलाल व ई-मित्र संचालक मिलकर कर रहे हैं हजारों की दलाली।

भीम. 21 अक्टूबर, 2019-मज़दूर किसान शक्ति संगठन, सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान व श्रम विभाग के संयुक्त तत्वाधान में 16 अक्टूबर  से शुरू हुई सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया अंतिम दिन आज 21 अक्टूबर को जन सुनवाई का आयोजन किया गया जिसमें

जम्मू कश्मीर में दलित अधिकारों की आवाज अनुपस्थित क्यों?

( प्रवीण कुमार अवर्ण ) जम्मू कश्मीर राज्य तीन क्षेत्रों से मिलकर बना हुआ है - जम्मू, कश्मीर और लद्दाख। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक लागू होने के बाद ,नया जम्मू-कश्मीर अस्तित्व में आ सकता है। परन्तु अब तक यही जम्मू कश्मीर है। जम्मू

मेंस्ट्रुअल कप्स- मासिक की चिंता से आज़ादी

(Nazia Naeem)जब दो साल पहले ही सैनिटरी पैड्स के नुकसानों के बारे में पोस्ट की थी तो बहुत बहस हुई थी। जगह-जगह टैग मेंशन करके गरियाया गया था कि अभी तो मेंस्ट्रुअल हाइजीन की शुरुआत ही हुई है और मैं फिर से पीछे ले जाना चाहती हूँ। पैडमेन जैसी

सूचना के अधिकार के 15 वीं वर्षगाँठ, पारदर्शिता के क्षेत्र में कईं कदम चलना बाकी !

* (जयपुर,12 अक्टूबर2019)देश में सूचना के अधिकार के लिए एक लंबा आंदोलन हुआ जिसकी शुरुआत मध्य राजस्थान से हुई और उसके बाद राजस्थान में सन 2000 में सूचना का अधिकार कानून बना और पूरे देश के लिए 2005 में यह

बालरडा में बाबा रामदेव मंदिर का विवाद गहराया !

-हरलाल बैरवा कपासन विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है.इसी वर्ग का भाजपा से विधायक है, पर यहाँ के दलित समाज के लोग आज भी बराबरी के मोहताज है .दलितों का गाँवों में मंदिर प्रवेश वर्जित है ,घोड़ी पर बिन्दोली आज भी पुलिस की मदद के

‘भोजन के अधिकार अभियान ‘ का सातवां अधिवेशन छतीसगढ़ में शुरू !

(20 सितम्बर 2019,रायपुर-छतीसगढ़)रोजी रोटी अधिकार अभियान का भोजन एवं काम के अधिकार पर 7th राष्ट्रीय अधिवेशन रायपुर,छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ । तीन दिवसीय इस अधिवेशन के पहले दिन के सत्र में हक़ के लिए संघर्ष, लोकतंत्र पर हमला,कल्याणकारी राज्य पर

धम्मभूमि थाईलैंड : भ्रांतियां एवं सत्य

(डॉ.एम.एल. परिहार) इन दिनों हम दस साथी थाईलैंड (सियाम देश ) की यात्रा पर हैं. राजधानी बैंकॉक के बुद्ध विहारों के अलावा सवा सौ किमी. दूर प्राचीन राजधानी अयूथ्या व ग्रामीण क्षेत्र का भी भ्रमण किया. भारत की तरह थाईलैंड का भी बुद्ध व धम्म

बुद्ध कोई सजावट की वस्तु नहीं !

(डॉ.एम.एल.परिहार)बौद्ध देशों में तथागत बुद्ध का दैनिक जीवन में वास्तव में बहुत सम्मान किया जाता है.बुद्ध की प्रतिमाओं व चित्रों का उपयोग बहुत सोच समझकर करते हैं. जबकि भारत में तो बीड़ी गुटखा व मिलावटी जहरीली विनाशकारी वस्तुएं भी देवी

थाईलैंड का ग्रामीण बौद्ध जनजीवन !

(डॉ.एम.एल .परिहार ) थाईलैंड कभी किसी देश का गुलाम नहीं रहा. इसके आसपास म्यांमार (बर्मा) लाओस, वियतनाम, कंबोडिया फिर आगे जावा, सुमात्रा ,कंबोडिया सभी देश आज भी बुद्ध की करुणामयी वाणी से गुंजायमान है.थाईलैंड की जनसंख्या साढे छ: करोड़ है.

रेमन मैगसेसे अवॉर्ड में रवीश कुमार का भाषण

नमस्कार, भारत चांद पर पहुंचने वाला है. गौरव के इस क्षण में मेरी नज़र चांद पर भी है और ज़मीन पर भी, जहां चांद से भी ज़्यादा गहरे गड्ढे हैं. दुनियाभर में सूरज की आग में जलते लोकतंत्र को चांद की ठंडक चाहिए. यह ठंडक आएगी सूचनाओं की पवित्रता और