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कला एवम् साहित्य

दलित आत्मकथाएं : सिर्फ विलाप और शोषण की कहानियाँ !

( संजय श्रमण ) बहुत गई अपने दारिद्रय और पिटने की कहानियाँ यानी दलित साहित्य की समस्याएँ और समाधान ! कोई भी साहित्य जिस किसी भी वर्ग या समुदाय के ज्ञानवर्धन के लिए लिखा जाता है उसी को लाभ होता है। दलन या शोषण का साहित्य दलितों या

इस किताब में कैंसर से लड़ाई की दास्तान है !

- रवीश कुमार इस किताब में डरावना कुछ भी नहीं है। संभावना है जिसके ख़त्म होने की आशंका है। फिर भी कोई जी रही है। उस आशंका पर संभावना लिख रही है। आप एक साँस में पढ़ते चले जाते हैं जैसे वो अपनी साँसों को हिसाब रखने लगी थी ताकि बची हुई

‘गाथा बंदिनी’ में बयां हुई क़ैदी औरतों की व्‍यथा-कथा !

मॉब लिंचिंग से लेकर हिंदू कोड बिल तक की चर्चा विकल्प नाट्य संगठन के संरक्षक श्री ईशमधु तलवार की पूज्य माताजी- रचनाधर्मीं और समाजसेवी दिवंगत श्रीमति शकुंतला देवी तलवार की पुण्य स्मृति में 19 अगस्त' 2019 सोमवार, शाम 7 बजे,

भुजरियाँ : कृषक की कामनाओं का पर्व

-जितेंद्र विसारिया बरसात आ गई है। किसान ने जो बीज अगली फ़सल के लिए घर में संरक्षित कर रखा है। वह उस फ़सल के लिए कितना उपयोगी बचा है। ...अपने खेत की मिट्टी और घर में संरक्षित रखे बीज के परीक्षण का उत्सव है-भुजरियाँ पर्व! भुजरियाँ यदि

चौपाल के मोहनकृष्ण बोहरा पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण

जोधपुर। पढ़ो तो पूरा पढ़ो, तल तक जाओ। आगे बढ़ो तो उत्स तक जाओ।' हिंदी के वयोवृद्ध आलोचक प्रो. मोहनकृष्ण बोहरा ने उकत विचार अपने अस्सीवें जन्मदिन पर चौपाल द्वारा आयोजित समारोह में व्यक्त किये। जोधपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स के

जोमैटो

हांलाकि अधिकतर को नहीं पता कि क्या हैं जोमेटो .पर उसने 'भारतीयता' को संवारा कहकर कि जाति-धर्म में मत- बंटो एक खाना आर्डर करने परपरोसने वाली कंपनी जिसकी मुस्लिम डिलीवरी बॉयबदलने की ग्राहक से ठनी जबलपुर के अमित शुक्ला ने जोमेटो से मंगवाया

एक अभिनव पहल – ‘सांगानेर स्टडी सर्किल’ का ‘अपना पुस्तकालय’

यह प्रेरक कहानी राजस्थान के भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से आती है,जहाँ नगर परिषद की सीमा में बसा हुआ है,उप नगर सांगानेर।एक प्राचीन किला जिसकी चार बुर्जे है,यहां आज भी खड़ा है,ऐतिहासिक कस्बा है सांगानेर ,लेकिन इतिहास क्या है,ज्यादा जानकारी नहीं

‘चौपाल’ के अंग्रेजी साहित्य आलोचना विशेषांक का लोकार्पण

अकादमिकी और साहित्यिकी में आवाजाही बढ़ाने की जरूरत- कुलपति प्रो आशुतोष मोहन गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में शुक्रवार को 'साहित्य की पत्रकारिता और हमारा समय' पर एक परिसंवाद आयोजित किया गया। आयोजन में 'चौपाल'

चार लेखक संगठनों का साझा बयान

लेखक-कलाकार हमेशा से सत्ता के विरोध में रहे हैं, लेकिन मोदीराज में सत्ता के विरोध का विरोध एक स्थायी रुझान बनता जा रहा है. जब 2015 में लेखकों-कलाकारों-वैज्ञानिकों ने अपने पुरस्कार लौटा कर सत्ताधारी दल की असहिष्णुता का विरोध किया तो एक

पुस्तकें संस्कृतियों और पीढ़ीयों के बीच अनगिनत पुलों का निर्माण करती है-नाथानी

उद्योगपति व शिक्षाविद एसपी नाथानी ने अपना पुस्तकालय किया नवग्रह आश्रम को भेंट भीलवाड़ा( मूलचंद पेसवानी )भीलवाड़ा के जाने माने उद्योगपति व शिक्षाविद सुर्यप्रकाश नाथानी ने अपने फार्म हाउस में संरक्षित पुस्तकालय की महत्वपूर्ण चार सौ से