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कला एवम् साहित्य

‘मैं एक कारसेवक था’ पुस्तक पढ़ते हुए एक दर्द भरी आहट सुनाई देती है !

(रेणुका पामेचा) भँवर मेघवंशी द्वारा लिखित यह आत्मकथा एक संगठन के अन्दर की दोगली नीति को इतने स्व अनुभव से सामने लाती है कि लगता है जैसे आज भी वही घटित हो रहा है. एक युवा बाहरी तामझाम व बड़े-बड़े नारे देखकर कितनी निष्ठा से राष्ट्रीय

कम्यूनल हिप्पोक्रेसी को बेनकाब करती रचना ‘मैं एक कारसेवक था’

( बी.एल. पारस )निब्बाण प्रकाशन और बोधि फाउंडेशन द्वारा जुन 2019 में आयोजित प्रथम राजस्थानी दलित साहित्य सम्मेलन में एक सत्र में दलित आत्मकथाओं के संदर्भ में चर्चा करते हुए मैंने कहा था कि आत्मकथाओं के बिना दलित साहित्य अधूरा है । कारण- 

जयपुर में हुआ जन साहित्य पर्व का आगाज़,जलियाँवाला बाग की शहादत को है समर्पित !

( Jaipur ,15 November 2019) जनवादी लेखक संघ और जन संस्कृति मंच द्वारा तीन दिवसीय जन साहित्य पर्व की शुरुआत आज देराश्री शिक्षक सदन ,राजस्थान विश्वविद्यालय में हुयी . इस बार का आयोजन जलियांवाला बाग की शहादत को समर्पित किया गया है और आयोजन

जन साहित्य पर्व 2019 के पहले सत्र में होगी भारत के सौ साल के संघर्ष की विरासत पर चर्चा !

(13 नवम्बर 2019,जयपुर)पिछले वर्ष की तरह ‘‘जन-साहित्य पर्व’’ का तीन दिवसीय आयोजन जनवादी लेखक संघ और जन संस्कृति मंच द्वारा देराश्री शिक्षक में 15 से 17 नवम्बर 2019 तक आयोजित किया जा रहा है।इस बार का पर्व की थीम ‘जलियांवाला बाग की शहादत’ और

जलियांवाला बाग की शहादत की शताब्दी को समर्पित रहेगा जन साहित्य पर्व !

(11 नवम्बर 2019, जयपुर ) पिछले वर्ष की तरह ‘‘जन साहित्य पर्व’’ का तीन दिवसीय आयोजन जनवादी लेखक संघ और जन संस्कृति मंच द्वारा देराश्री शिक्षक सदन, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में 15 नवम्बर से 17 नवम्बर, 2019 तक आयोजित किया जा रहा है।आज

दूसरा जन साहित्य पर्व 15 नवम्बर से जयपुर में !

(जयपुर,6 नवम्बर 2019) जनवादी लेखक संघ,राजस्थान एवं जन संस्कृति मंच द्वारा पिछले वर्ष की भांति इस बार भी जयपुर में दूसरा 'जन साहित्य पर्व' आयोजित किया जा रहा है . यह आयोजन 15 से 17 नवम्बर 2019 तक आयोजित किया जा रहा है . इस बार का आयोजन 3

पठनीय पुस्तक है -” मैं एक कारसेवक था”

(डॉ नवीन जोशी )भंवर मेघवंशी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पिछले दो दशकों में उन्होंने देश में दलित अस्मिता के लिए रिक्त पड़े आंदोलन को अपनी बेबाक चुनौतियों से पाट दिया है। सामाजिक असमानता के हजारों सालों के भंवर को इस भंवर ने एक हद

आर एस एस के प्रति आगाह करती एक जरूरी किताब !

 ( तारा राम गौतम ) 20 अक्टूबर 2019 को जयपुर मैं पी एम बौद्ध द्वारा आयोज्य एक कार्यक्रम में शरीक होने का अवसर मिला। कार्यक्रम में कई लोगों से मिलकर अच्छा लगा। वहां पर पी एम बौद्ध की व्यस्तता के कारण उनसे क्षण भर की मुलाकात ही हुई, कोई

डॉ.अंबेडकर को समझने के लिए एक जरुरी पुस्तक

( इन्द्रेश मैखुरी )पीछे मुड़ कर देखना एक जरूरी काम है. लेकिन राजनीति में पीछे मुड़ के देखने के दो नजरिए हैं. प्रतिगामी विचार के वाहक अतीत में ही जीते हैं और तमाम आधुनिक संसाधनों का लाभ उठाते हुए,वैचारिक स्तर पर समाज को पीछे ही ले जाना

महानगर में कहाँ खोजूं चांद ?

(हरिराम मीणा)आज करवा चौथ है! चाँद का चक्कर है!! मेरे इस लेख को करवा चौथ समर्थक व विरोधियों दोनों को गौर से पढ़ना चाहिए.  मेरी दिक्कत करवा चौथ या शेष बची ग्यारह चौथों के व्रतों के साथ न होकर चाँद देखकर व्रत को तोड़ने की जिद से पैदा होती