Browsing Category

कला एवम् साहित्य

इस मुल्क का मसीहा न तो मीडिया था, न है और न होने लायक है- विनीत कुमार

( रवीश कुमार ) किसी फिल्म की समीक्षा या रिलीज होने के पहले उस पर लिखने के क्रम में उसकी कहानी या नॉक प्वाइंट खोलकर रख देना सबसे खराब लेखन है. ऐसा करके आप फिल्म निर्देशक और उसकी पूरी टीम की मेहनत की सांकेतिक हत्या कर दे रहे होते हैं.…

हिन्दू कॉलेज में प्रेमचंद जयंती

सेवासदन में भारतीय विवाह संस्था का क्रिटिक - गरिमा श्रीवास्तव -डॉ रचना सिंह (प्रभारी -हिंदी विभाग,हिन्दू कालेज,दिल्ली ) दिल्ली। प्रेमचंद समाज की गतिविधियों को शब्द और संवाद ही नहीं देते बल्कि उसमें दखल भी देते हैं। सेवासदन में…

लुगदी साहित्य का जादुई संसार

(अनिल जनविजय ) इन किताबों को शरीफ परिवारों में अच्छा नहीं माना जाता था। पर ये किताबें दिखती कम थीं और बिकती ज्यादा थीं। ‘दहेज में रिवॉल्वर’, ‘डायन’, ‘बीवी का नशा’, ‘छह करोड़ का मुर्दा’ जैसी मोटी-ताजी भड़कीली किताबों ने हिंदी पट्टी के…

सुखराम नट के गांव में

( ईशमधु तलवार ) वैर से कोई चार किमी लंबी सड़क, जिसमें सड़क नाम की चीज अब कहीं-कहीं पर ही बची है, मुहारी गांव ले जाती है। दोनों ओर लगे जामुन और अमरूदों के बागों की खुशबू हम तक अपने आप पहुंच जाती है, क्योंकि इस बीहड़ रास्ते पर…

लोकतंत्र बढ़ने के स्थान पर घटा है – असग़र वजाहत

(राघवेन्द्र रावत) जयपुर । ‘‘साम्प्रदायिक विभाजन की चेतना व्यक्तियां को अन्दर व बाहर से तोडती है और पूरे समाज को गहरे अंधेरे में ले जाती है। बड़े देश पहचान की राजनीति का खेल खेलते हैं और विकासशील देशों में विकास का पहिया गरीब एवं शोषित जनता…

शिवमूर्ति के उपन्यास तर्पण का एक अंश 

दो बड़े बड़े गन्ने कन्धे पर रखे और कोंछ में पाँच किलो धान की मजदूरी सँभाले चलती हुई रजपत्ती का पैर इलाके के नम्बरी मेंड़कटा’ नत्थूसिंह की मेंड़ पर दो बार फिसला। कोंछ के…

‘मदारीपुर जंक्शन’ की आजकल बड़ी चर्चा है !

व्यंग्य पढ़ने सुनने में कितना भी आसान क्यों न लगे पर उसे साधना इतना भी आसान नहीं. ज्यादातर व्यंग्य रचनाओं में सार्काज़म् कब दबे पांव आकर सटायर के सिर पर सवार हो जाता है पता ही नहीं चलता. शायद यही वजह है कि पत्र-पत्रिकाओं में भरभर के व्यंग्य…

क्या पवित्र ग्रन्थ गीता सौदरानंद की नक़ल है ?

गीता हिन्दू अभिजन का केंद्रीय धर्मग्रन्थ तो है ही , इसका राष्ट्रीय मूल्य भी है . हमारे राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन में तिलक और गाँधी ने इसे वैचारिक औजार के रूप में इस्तेमाल किया और तमाम भारतीय जुबानों में इसकी जाने कितनी व्याख्याएं हुईं .…

बसेड़ा में स्पिक मैके हेरिटेज क्लब का गठन

बसेड़ा(छोटीसादड़ी) 9 मई, 2018 युवाओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति के संवर्धन हेतु बीते चालीस साल से संचालित छात्र सहभागी सांस्कृतिक आन्दोलन स्पिक मैके अब अपनी गतिविधियाँ बसेड़ा में आरम्भ कर रहा है। प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी तहसील…

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में असग़र वजाहत रचना संचयन का लोकार्पण

" अलीगढ ने मुझे बनाया है। इस संचयन का रस्मे इजरा अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में होना मेरे लिए बेहद ख़ास मौक़ा है। आज यहाँ मैं अनूठे शायर शहरयार, जावेद कमाल और कुंवरपाल सिंह को भी याद कर रहा हूँ।" सुप्रसिध्द कथाकार-नाटककार असग़र वजाहत ने अलीगढ़…