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कला एवम् साहित्य

कुसुमार्चन’ पर परिसंवाद सम्पन्न !

- फारूक आफरीदी जयपुर : शब्द संसार और डॉ राधाकृष्ण राज्य पुस्तकालय के तत्वावधान में सोमवार को यहाँ मूर्धन्य साहित्यकार डॉ नरेन्द्र शर्मा कुसुम पर केन्द्रित ग्रन्थ ‘कुसुमार्चन’ पर परिसंवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध…

सांस्कृतिक संवेदनशीलता बढ़ाना मीडिया की जिम्मेदारी – चतुर्वेदी

- राहुल हिन्दू कालेज में अभिरंग की गतिविधियों का उद्घाटन... नयी दिल्ली। पत्रकार ही सत्ता के गाजे बाजे में शामिल हो जाएगा तो सच कैसे लिखेगा? भारतीय मीडिया में सच की इस कमी के कारण ही अब समाज पत्रकारों पर विश्वास नहीं करता। यदि आज…

बसेड़ा के बच्चों ने सीखा कथक नृत्य, स्पिक मैके कार्यशाला बसेड़ा तक पहूंची !

माणिक - संयोजक, हेरिटेज क्लब ऑफ़ बसेड़ा, (छोटीसादड़ी) भारत अपनी संस्कति की वजह से पूरे विश्व में जाना जाता है उसमें भी खासकर हमारी संगीत और नृत्य की विरासत के कारण इसका बड़ा नाम है। मैं बहुत खुशनसीब हूँ कि मुझे कथक नृत्य के जयपुर घराने…

साहित्यिक जुलाई !

( अनंत भटनागर ) अमूमन हिंदी दिवस/सप्ताह/पखवाड़े के चलते सितम्बर में साहित्यिक कार्यक्रमो की धूम रहती है।इस बार अजमेर में जुलाई साहित्यमयी रही । कई कार्यक्रमों में शिरकत के साथ किसी न किसी रूप में भागीदारी भी रही। 4 जुलाई को आर डी सैनी जो…

इस मुल्क का मसीहा न तो मीडिया था, न है और न होने लायक है- विनीत कुमार

( रवीश कुमार ) किसी फिल्म की समीक्षा या रिलीज होने के पहले उस पर लिखने के क्रम में उसकी कहानी या नॉक प्वाइंट खोलकर रख देना सबसे खराब लेखन है. ऐसा करके आप फिल्म निर्देशक और उसकी पूरी टीम की मेहनत की सांकेतिक हत्या कर दे रहे होते हैं.…

हिन्दू कॉलेज में प्रेमचंद जयंती

सेवासदन में भारतीय विवाह संस्था का क्रिटिक - गरिमा श्रीवास्तव -डॉ रचना सिंह (प्रभारी -हिंदी विभाग,हिन्दू कालेज,दिल्ली ) दिल्ली। प्रेमचंद समाज की गतिविधियों को शब्द और संवाद ही नहीं देते बल्कि उसमें दखल भी देते हैं। सेवासदन में…

लुगदी साहित्य का जादुई संसार

(अनिल जनविजय ) इन किताबों को शरीफ परिवारों में अच्छा नहीं माना जाता था। पर ये किताबें दिखती कम थीं और बिकती ज्यादा थीं। ‘दहेज में रिवॉल्वर’, ‘डायन’, ‘बीवी का नशा’, ‘छह करोड़ का मुर्दा’ जैसी मोटी-ताजी भड़कीली किताबों ने हिंदी पट्टी के…

सुखराम नट के गांव में

( ईशमधु तलवार ) वैर से कोई चार किमी लंबी सड़क, जिसमें सड़क नाम की चीज अब कहीं-कहीं पर ही बची है, मुहारी गांव ले जाती है। दोनों ओर लगे जामुन और अमरूदों के बागों की खुशबू हम तक अपने आप पहुंच जाती है, क्योंकि इस बीहड़ रास्ते पर…

लोकतंत्र बढ़ने के स्थान पर घटा है – असग़र वजाहत

(राघवेन्द्र रावत) जयपुर । ‘‘साम्प्रदायिक विभाजन की चेतना व्यक्तियां को अन्दर व बाहर से तोडती है और पूरे समाज को गहरे अंधेरे में ले जाती है। बड़े देश पहचान की राजनीति का खेल खेलते हैं और विकासशील देशों में विकास का पहिया गरीब एवं शोषित जनता…

शिवमूर्ति के उपन्यास तर्पण का एक अंश 

दो बड़े बड़े गन्ने कन्धे पर रखे और कोंछ में पाँच किलो धान की मजदूरी सँभाले चलती हुई रजपत्ती का पैर इलाके के नम्बरी मेंड़कटा’ नत्थूसिंह की मेंड़ पर दो बार फिसला। कोंछ के…