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नज़रिया

किताबों से सामाजिक क्रांति होती है !

(डॉ.एम.एल परिहार) झारखंड के मुख्यमंत्री मान्य. हेमंत सोरेन ने जनता से अपील की है कि वे उनसे मुलाकात के दौरान फूलों के बुके भेंट नहीं करें बल्कि बुक्स यानी अपनी पसंद की  वैचारिक जाग्रति की किताबें ही भेंट करें . जॉर्ज बर्नार्ड शा ने कहा

गोडसे का महिमामंडन और गांधी का कद छोटा करने की दक्षिणपंथी कवायद !

(राम पुनियानी) हर राष्ट्रवाद अपने ‘इतिहास’ का निर्माण करता है. जाने-माने इतिहासविद् एरिक उब्सबान के अनुसार, “राष्ट्रवाद के लिए इतिहास वही है, जो गंजेड़ी के लिए गांजा”. इसमें हम यह जोड़ सकते हैं कि हर राष्ट्रवाद अपनी विचारधारा के अनुरूप

क्या दलित संविधान प्रदत अधिकार खोने जा रहे हैं !

 (एच.एल.दुसाध )                                                                                           आज 6 दिसम्बर है ,बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस. यूं तो आज के खास दिन बाबा साहेब को पूरा देश ही नहीं, जन्मगत

डॉ. अंबेडकर और भारतीय महिलाओं के लिए उनका योगदान !

(प्रेमचंद गांधी ) ‘मैं महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले आंदोलनों में गहरा विश्‍वास रखता हूं। उन्‍हें अगर सही ढंग से विश्‍वास में लिया जाए तो वे आज के तकलीफदेह सामाजिक माहौल को पूरी तरह बदल सकती हैं। अतीत में उन्‍होंने निम्‍न वर्ग के

“मैं एक कारसेवक था” एक व्यक्ति के बनने की गाथा है !

(राजाराम भादू) " मैं एक कार सेवक था " पुस्तक के नवारुण प्रकाशन से छपने की जब प्रथम सूचना लेखक भंवर मेघवंशी ने दी थी तो यह उल्लेख किया था कि इसकी पाण्डुलिपि किन हाथों से गुजरी और प्रकाशन की कैसी प्रक्रिया के बाद यह सामने आयी। मुझे

क्या पैसा हाथ का मैल है ?

( डॉ एम एल परिहार )भारतीय समाज बड़ा ढोंगी है, दोहरा जीवन जीता है कहता कुछ और हैं लेकिन करता कुछ और है कथनी और करनी में बहुत फर्क होता है.हमें बचपन से बार बार सुनाकर यह घुट्टी पिलाई जाती हैं कि पैसा हाथ का मैल है इसकी ज्यादा चिंता नहीं

मैं दिल्ली पुलिस के उस जवान के साथ खड़ा हूँ जिसे पीटा गया -रवीश कुमार

(रवीश कुमार) एक तस्वीर विचलित कर रही है। दिल्ली के साकेत कोर्ट के बाहर एक वकील पुलिसकर्मी को मार रहा है। मारता ही जा रहा है। पुलिस के जवान का हेल्मेट ले लिया गया है। जवान बाइक से निकलता है तो वकील उस हेल्मेट से बाइक पर दे मारता है। जवान

भाजपा का राष्ट्रवाद और चुनावी गणित

(राम पुनियानी) भाजपा एक नहीं बल्कि अनेक मायनों में ‘पार्टी विथ अ डिफरेंस’ है. वह देश की एकमात्र ऐसा बड़ी राजनैतिक पार्टी है जो भारतीय संविधान में निहित प्रजातंत्र और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के बावजूद यह मानती है कि भारत एक हिन्दू

भारत एक हिन्दू राष्ट्र नहीं हैः सिक्ख संगठन

- राम पुनियानी आरएसएस के चिंतक और नेता लगातार यह कहते आए हैं कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है। जाहिर है कि इस पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर सिक्खों और मुसलमानों, के अतिरिक्त भारतीय संविधान में आस्था रखने वालों को भी गंभीर आपत्ति है।

इतिहास में अब तक का महान क्रांतिकारी सूत्र

‘अत्त दीपो भव’ अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो..गौतम बुद्ध कहते है...'किसी दूसरे के उजाले में चलने की बजाय अपना प्रकाश ,अपनी प्रेरणा खुद बनो. खुद तो प्रकाशित हों ही, दूसरों के लिए भी एक प्रकाश पूंज की तरह जगमगाते रहो'...भगवान बुद्ध के महा