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नज़रिया

क्या सब्जी-फलों को धो लेने से कोरोना का खतरा नहीं होगा !

(डॉ.स्कन्द शुक्ला) जब दिनेश ने मुझे बताया कि इस समय कोविड 19-पैंडेमिक के दौरान वह अपने घर में आने वाली सब्ज़ियों-फलों को डेटॉल और सोडियम हायपोक्लोराइट से धो रहा है , तब मुझे आश्चर्य से अधिक दुःख हुआ। इस तरह अनियन्त्रित ढंग से भयभीत होकर हम

मैं 14 अप्रैल को भी बल्ब ही जलाऊंगा !

(Bhanwar Meghwanshi) दीये जलाने का अभिप्राय अंधेरा भगाना है,जब उजाले के लिए और कुछ न था,तो लोग रोशनी के लिए दीपक जलाते थे,फिर लालटेन जलाने लगे,उसके बाद बिजली आ गई, बल्ब का आविष्कार हो गया,बड़ी बड़ी लाइट्स जलने लगी ,जिससे पूरे मोहल्ले

कोरोनाः ईश्वर, धर्म और विज्ञान

(Dr.Ram Puniyani) इन दिनों पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है. इससे लड़ने और इसे परास्त करने के लिए विश्वव्यापी मुहिम चल रही है. मानवता एक लंबे समय के बाद इस तरह के खतरे का सामना कर रही है. किसी ज्योतिषी ने यह भविष्यवाणी नहीं की

ज़मात की हरकत और मुस्लिम विरोधी वातावरण !

(एल. एस. हरदेनिया) मुझे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर से मुलाकात करने में अत्यधिक बौद्धिक आनंद आता था। उनका जीवन संघर्ष से भरपूर था। उनके संस्मरण काफी दिलचस्प होते थे। एक दिन इसी तरह की मुलाकात के दौरान मैंने उनसे

उन घरों में दीया कब जलेगा जहां सदियों से अंधेरा हैं ?

कोरोना के इस संकट में सुरक्षा सुविधाओं की कमी के बावजूद देवदूत बनकर कोरोना वॉरियर्स अपनी जान को जोखिम में डालकर रात दिन काम कर रहे हैं. मेडिकल टीम, पुलिस, प्रशासन व सफाई कामगार साथी मानवता की बेमिसाल सेवा कर रहे हैं.दूसरी ओर ओलावृष्टि से

जब राजनेता अपनी सीमाएँ बन्द कर रहे हैं , वैज्ञानिक अपनी सीमाएँ खोल रहे हैं !

(स्कन्द शुक्ला) राजनीतिक समता और वैज्ञानिक समता में बहुत अन्तर है। यह सच है कि राजनीति में समता के संस्कार विज्ञान में हुई प्रगति का परिणाम हैं : सोलहवीं-सत्रहवीं अठारहवीं सदी में यदि एक-के-बाद-एक वैज्ञानिक खोजें न हुई होतीं , तब न

कोरोना से डरो ना..श्रमिकों का योगदान भूलो ना!

कोरोना का वायरस हजारों की मौत ला सकता है, यह प्रचारित होते ही बात समझ में आ गयी कि भारत में भी कितने लोग मौत से डरते है.... उनकी जिंदा रहने की जीजीविषा को सलाम! लेकिन जैसा कि छोटी, sponsored विज्ञापन डाक्यूमेंट्रीज में आजकल कोरोना का

सड़कों पर यमदूत !

( कहानी यमदूत बनकर भागते मजदूरों की )  - श्रवण सिंह राठौड़ सोशल मीडिया और टीवी पर समझदार चीख रहे हैं -  'सड़कों पर यमदूत दौड़ रहे हैं। ' यमदूत ?? हां, जी, इन समझदारों को ये यमदूत ही नज़र आ रहे है। यमदूत का सीधा मतलब, वो जो

भिक्षुओं ! जो मेरी सेवा करना चाहता है वह रोगी की सेवा करें

(डॉ.एम .एल.परिहार)एक बार गौतम बुद्ध आनंद के साथ एक बड़े विहार में भिक्षु निवास का निरीक्षण कर रहे थे. एक कमरे में एक भिक्षु अपने मल मूत्र में असहाय पड़ा था.बुद्ध ने पूछा.--भिक्षु ! तुम्हे क्या कष्ट है ?--भयंकर दस्त से पीड़ित हूं

कोरोना: पशुओं को लेकर भी सचेत रहें !

(स्कंद शुक्ला) वर्तमान कोविड-19 महामारी के समय लोग जानवरों को लेकर भी सशंकित और चिन्तित हैं। अनेक लोग आमिष भोजन करते रहे हैं और ढेरों के पास कोई-न-कोई पालतू जीव है। ऐसे में इनसे सम्बन्धित प्रश्नों का मन में उठना स्वाभाविक है।