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नज़रिया

उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्षा का शराब माफिया को समर्थन कतई अस्वीकार्य

पिछले दिनों उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजय बड़थ्वाल जी, जो कि 3 बार विधायक भी रह चुकी हैं, उन्होंने भागीरथी गंगा व अलकनंदा गंगा के संगम देवप्रयाग में शराब की बॉटलिंग प्लांट का समर्थन यह कहते हुए किया कि शराब तो लोग

एक अभिभावक का भारत के प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र

( सुनील कुमार की कलम से )मान्यवर,प्रधानमंत्री महोदय,आपने 2014 के लोकसभा चुनाव में स्लोगन दिया था-‘बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार’। इसके बाद आप देश के प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनने के बाद आप का स्लोगन ‘बेटी बचाओ, बेटी

आदिवासियों का धर्म और जाति क्या है ?

पृथक कॉलम/कोड में आदिवासियों की जनगणना की मांग के विमर्श के दौरान एक जिज्ञासु आदिवासी (कमलेश गमेती, डूंगरपुर, राजस्थान) पूछते हैं कि - हम हिन्दू नहीं है ,आदिवासी हैं तो हमारा धर्म क्या है और हम चाहते क्या है ? ऐसे गहरे और विवाद पैदा

पाठ्यपुस्तकों में आरएसएसः राष्ट्र और राष्ट्र निर्माण की विरोधाभासी अवधारणाएं

-राम पुनियानी राष्ट्रवाद एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केन्द्र में है. पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा कि किस तरह सरकार के आलोचकों को राष्ट्रद्रोही घोषित कर दिया गया. हमने यह भी देखा कि दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को

वेस्ट पाकिस्तानी शरणार्थी : आज़ाद देश के गुलाम लोग !

( पश्चिमी पाकिस्तान से आये इन लाखों शरणार्थियों में 90 फीसदी लोग दलित व पिछड़े वर्ग के हैं,आज़ाद भारत मे पिछले 70 साल से उनको नागरिकता का अधिकार भी नहीं मिल पाया है,वे गुलामों से भी बदतर ज़िन्दगी जीने को मजबूर है ) - भंवर मेघवंशी

गुरु पूर्णिमा और गौतम बुद्ध का मध्यमार्ग

गुरु पूर्णिमा का उत्सव मनाते हुए आप ख़ुशी मनाइए लेकिन एक सावधानी जरुर रखियेगा। गुरु पूर्णिमा मनाते समय यह देखना जरुरी है कि आप किस ढंग से और किस गुरु को अपना मार्गदर्शक समझ रहे हैं? इतिहास और धर्म-दर्शन की खोजों ने यह सिद्ध कर दिया है कि…

जलते मजदूर, सोती सरकार

शनिवार को सुबह रोज की तरह फ्रेंडस कॉलोनी गली नं. 4 में चहल-पहल थी। इसी गली में कॉरस बाथ नामक फैक्ट्री है, जो कि पीतल और प्लास्टिक की टूटी बनाने का काम करती है। फैक्ट्री के गेट पर न तो नम्बर लिखा है और ना ही कोई नाम, यानी कोई अनजान व्यक्ति…

जातिवादी समाज पर चोट करती ‘आर्टिकल 15’

(ममता मेघवंशी) "आर्टिकल 15" फिल्म एक सोशल मैसेज देने वाली है । और यह बहुत संवेदनशील विषय है । यह फिल्म जातिवाद पर भारतीय समाज की एक सामूहिक विफलता पर बात करती है । भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 ऐसा मौलिक अधिकार है जो यह सुनिश्चित करता है…

क्या है फ़िल्म “आर्टीकल15” में !

(संजय जोठे)   आर्टिकल 15 एक अच्छी फिल्म है, सभी मित्रों को जरुर देखनी चाहिए. इसमें कई खूबियाँ और कई कमियाँ है. यहाँ जब मैं इसे अच्छी फिल्म कह रहा हूँ तो इसका यही अर्थ है कि यह बहुत सारी दिशाओं में विचार करने को विवश करती है. कोई भी फिल्म…

संसद क्या धार्मिक नारेबाजी का अखाड़ा है ?

-(राम पुनियानी)   हाल में, दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र ने अपने विधि-निर्माताओं, अर्थात सांसदों, को चुनने की वृहद कवायद संपन्न की। सत्ताधारी दल भाजपा को मिले जबरदस्त जनादेश के परिप्रेक्ष्य में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो…