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नज़रिया

दक्षिणपंथियों की धमकियाँ और कांग्रेस की आपराधिक चुप्पी !

पता नहीं क्यों प्रतिक्रियावादी दक्षिणपंथियों को संगीत नहीं भाता । यदि गुलाम अली की गजलों का कार्यक्रम घोषित होता है तो ये धमकी देते हैं कि हम उसे नहीं होने देंगे। अभी हाल में इन्होंने ऐसी ही घिनौनी हरकत की जब उन्होंने घोषणा की कि स्मिक मैके…

सेक्स बेचनेवाली क्रिमिनल और सेक्स खरीदने वाला निर्दोष !

(गीता यादव)   वेश्यावृत्ति रोकने का कानून ये कहता है कि वेश्या अगर सेक्स बेचने के लिए लुभाए तो वो अपराधी है, लेकिन मर्द अगर पैसे से लुभाकर सेक्स खरीदे तो वह निर्दोष है. इस महिला विरोधी कानून को बदलने की जरूरत है भारत में पैसे देकर सेक्स…

आरक्षित सीटों पर चौधराहट की नयी पेशकश !

(भंवर मेघवंशी)  नागौर जिले की मेड़ता रिजर्व सीट से भाजपा और कांग्रेस ने नया प्रयोग किया है,इस नवाचार में भाजपा व कांग्रेस से जो प्रत्याशी बने है,वे पूना पैक्ट की सबसे कमजोर औलादों का जीवंत उदाहरण है । भाजपा ने अपने वर्तमान विधायक सुखराम…

दलबदल कानून में हो संशोधन !

(डॉ.धीरज बेनीवाल)  चुनाव से पहले राजनेता को दल परिवर्तन को रोकने का ,मेरे नजरिये से सबसे अच्छा तरीका है कि "दल बदल कानून" में संशोधन किया जाए। "दल बदल कानून" 52वाँ संविधान संशोधन करके 1985 में 10 वी अनुसूची में जोड़ा गया था। यह कानून…

डिफीट बीजेपी !

(भंवर मेघवंशी) साम्प्रदायिक ताकतों को शिकस्त देने का समय है,इस फासीवादी उभार को रोकना है तो बहुत सारी असहमतियों को दरकिनार करने की जरूरत है। आदर्शवादी से ज्यादा यथार्थवादी होने की जरूरत है,दक्षिणपंथी संघ प्रेरित भाजपा को रोकना ही बड़ा…

इस हिन्दू राष्ट्र में दलितों की यही नियति है !

(भंवर मेघवंशी) भगवा झंडों वाला जो हिन्दू राष्ट्र आरएसएस बीजेपी निर्मित करने की फ़िराक में हैं,उसमें दलितों की क्या भूमिका होगी ,कोई भूमिका होगी भी या नहीं अथवा उनके लिए कोई जगह भी नहीं होगी ,उनको छिप छिप कर जीना पड़ेगा,इसके संकेत मिलने लगे…

चुनावों से ठीक पूर्व दलबदल को भ्रष्ट आचरण माना जाए !

(एल एस हरदेनिया) चुनाव के ठीक पूर्व के दलबदल ने प्रजातंत्र के लिए गंभीर कलंक का रूप ले लिया है। इस तरह का दलबदल सिर्फ चुनाव जीतने के लिए किया जाता है। दुःख और चिंता की बात यह है कि लगभग सभी पार्टियों को इस तरह के दलबदल से परहेज नहीं है। इस…

हमारा लोकतांत्रिकरण कब होगा ?

विभिन्न राजनीतिक दलों में कार्यरत कार्यकर्ताओं को बहुजन दलों से जुड़े कार्यकर्ता बहुत ही हेय दृष्टि से देखते है। उनके प्रति भयानक हिकारत का भाव दिखलाई पड़ता है,ये लोग अपने ही समुदाय में उपेक्षित और अत्यधिक गरियाये हुये नजर आते है। इनके…

विधानसभा चुनाव 2018: इस बार किधर जाएंगे दलित आदिवासी मतदाता ?

(भंवर मेघवंशी) साढ़े चार साल तक संगठित रहने की बात कहने वाले अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के मतदाताओं की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि चुनाव नजदीक आते ही वे बिखरने लग जाते है,जबकि अन्य समुदाय साढ़े चार साल झगड़ते है और चुनाव से 6 माह पहले एक…

सब चुप क्यों है…बेबस क्यों है ?

मूर्ति किसकी है यह महत्त्वपूर्ण नही है; मूर्ति लगा कौन रहा है यह ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है.अगर सवर्ण समाज के वर्चस्व का कोई नेता मूर्ति लगाएगा तो उसे मीडिया एवं तथाकथित बुद्धिजीवी महिमा मंडित करेगे. टीवी एंकर उस मूर्ति का महत्व रेखांकित…