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नज़रिया

मानसिक तनाव व खुदकुशी का सामाजिक पहलू

(नीरज ‘थिंकर’) सुशांत सिंह राजपूत की मौत के साथ ही 'डिप्रेशन' और 'मेंटल हेल्थ' पर एक बार फ़िर से जोर-शोर से डिबेट शुरू हो गयी है..हालांकि आत्महत्या के आंकड़ों की अगर हम बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार पूरी दुनिया

मार्टिन लूथर किंग के सपने आज भी अधूरे

- एल. एस. हरदेनिया वर्ष 1963 में अगस्त 29 को अमरीका की राजधानी वाशिंगटन में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन का नेतृत्व मार्टिन लूथर किंग जूनियर कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी ‘हमें सम्मान और काम चाहिए’। इस

वे ग्यारह हैं !

( हिमांशु पंड्या ) आज से ठीक दो साल पहले इनमें से पाँच को गिरफ्तार किया गया. बाद में छह और गिरफ्तार हुए. इनमें से कोई अपनी भाषा के सबसे बड़े कवियों में से आता है, कोई भारत सरकार की प्रतिष्ठित फेलोशिप प्राप्त अध्येता है, कोई ज़िंदगी भर

क्या पसमांदा शब्द पर पुनः विचार करने की ज़रुरत है ?

जिस शब्द पर इतना खून पसीना लगा हो,उसे क्यों बदला जाये ?( खालिद अनीस अंसारी ) एक-दो दिन से व्हाट्सएप ग्रुप्स में पसमांदा शब्द पर कुछ बहसों को देख रहा था. कुछ लोगों की राय थी कि पसमांदा शब्द को बदलने की ज़रुरत है. मेरे हिसाब से तीन मुख्य

दो देश : एक संघर्ष

(सुरेंद्रसिंह शेखावत)"मेरा दम घुट रहा है ।"यह पंक्ति जॉर्ज फ्लॉयड द्वारा कहे गए अंतिम शब्द "आई कांट ब्रीथ" का अनुवाद है ।  इसी  नाम से अमेरिका में इन दिनों बहुत हिंसक प्रदर्शन हो रहे है । अफ्रीकी अमेरिकी अश्वेत आंदोलनकारी,  बीती 20 मई को

“हम सांस नही ले पा रहे हैं…. !”

(क्रान्ति कुमार ) 46 वर्षीया जॉर्ज फ्लॉयड ब्लैक अफ्रीकन अमेरिकन समुदाय से थे. इसी ब्लैक अफ्रीकन अमेरिकन समुदाय ने अपने श्रम उत्पादन मेहनत से अमेरिका को बसाया, विकसित अमेरिका बनाया.जॉर्ज छह और 22 वर्षीया दो बेटियों के पिता हैं. परिवार की

घृणा के वायरस से सावधान रहने की अपील

रविवार 19 अप्रैल के ‘टाईम्स आफ इंडिया‘ में सागरिका घोष का एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसमें वे कहती हैं कि घृणा का वायरस कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक है। कोरोना वायरस पर तो विजय पाई जा सकती है परंतु यदि घृणा का वायरस

हिंदू राष्ट्र के बारे में क्या सोचते थे डॉ. आंबेडकर ?

(डॉ. सिद्धार्थ)आज जब हम भारत के संदर्भ में राष्ट्रवाद के प्रश्न पर विचार कर रहे हैं, तो यह कोई अमूर्त अकादिमक विमर्श का प्रश्न नहीं, बल्कि बर्बर हिंदू राष्ट्रवाद अपने खूंख़ार नख-दंत के साथ हमारे सामने है। हिंदू राष्ट्र का ख़तरा आज भारत के

कोरोना वायरस से देश को बचाते सफ़ाई कर्मचारी

(धम्म दर्शन निगम ) अस्पतालों में जहां डॉक्टर, नर्स और बाकी स्टाफ़ कोरोना के मरीजों का ईलाज कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ सफाई कर्मचारी पूरे देश भर की सफाई रख कर सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोरोना को फैलने से रोका जाये।कोरोना को रोकने में

क्या हमें आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी पर खामोश रह जाना चाहिए ?

(भँवर मेघवंशी) 14 अप्रैल 2020 को जब देश बाबा साहब अम्बेडकर की 129 वी जयंती मना रहा था, तब नागरिक अधिकार कार्यकर्ता,चिंतक ,आलोचक व लेखक प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े को एनआईए ने हिरासत में ले लिया। कौन है आनंद ? आनंद तेलतुंबड़े भारत ही