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नज़रिया

धार्मिक राष्ट्रवादः नायक और विचारधारा

(राम पुनियानी) समावेशी बहुवाद पर आधारित वह राष्ट्रवाद, जो भारत के स्वाधीनता संग्राम की आत्मा था, आज खतरे में है. इसका कारण है संघ परिवार की राजनीति का बढ़ता प्रभामंडल. संघ से जुड़े अनेकानेक संगठन, हमारे सामाजिक और राजनैतिक

आरक्षण विरोधी पण्डों से दूर रहें आरक्षित कौमें !

कुछ लोग लाइलाज़  बीमारियों से ग्रस्त हैं,लेकिन उनको पता भी नहीं है कि उनको रोग है,वे अपनी बीमारी को अपनी विशिष्टता निरूपित करते हैं। ये ऐसे लोग है जो खुद सदियों से मिले हुये जन्मना जातिगत आरक्षण से मिली पुरोहिताई से पेट भराई करते

मैं रविदास मंदिर आन्दोलन से असहमत क्यों हूँ ?

रविदास मंदिर आंदोलन से कोई बुनियादी फर्क नहीं आने जा रहा है!( धर्म-अध्यात्म के नाम पर जो भी हलचल होगी, जो भी जनजागरण होगा, वह आखिर में जाकर मनुवादी ताकतों को मजबूती देगा, न कि दलित बहुजन आंदोलन और उसकी वैचारिकी को)-भंवर मेघवंशीमेरे लिये

अम्बेडकर के अंतिम संदेश: बुद्ध, धम्म और भूमि के लिए संघर्ष करो।

(प्रवीण कुमार अवर्ण ) बाबा साहब अम्बेडकर को लेकर यह आम धारणा है कि उन्होंने संसद की तरफ इशारा किया है। परन्तु बाबा साहब अम्बेडकर के जीवन के अंतिम चरण को अगर ध्यान से देखें तो पाएंगे कि उन्होंने सामाजिक एकता की ओर इशारा किया है और उस

बहुजन युवा लीडरशिप :दयनीय दशा और दिग्भ्रमित दिशा !

( डॉ एम. एल. परिहार ) किसी लीडर व संगठन के बिना बहुजन युवाओं ने गये साल 2अप्रैल को पूरे देश में आक्रोश लेकिन अनुशासन के साथ अपने मानवीय हकों के लिए एक होकर आवाज उठाई थी. आज कोई संगठन या लीडर लाख कोशिश करें तो भी ऐसा वैचारिक जलजला पैदा

मन्दिर-मस्जिद की तरफ नहीं, स्कूल की तरफ बढ़ो !

(शेषनाथ वर्णवाल ) थॉमस अल्वा एडिसन ने कभी किसी खुदा, ईश्वर या गॉड को नहीं माना और दुनियां के हर मजहब, हर विश्वास के मानने वालों के घरों को रोशन कर दिया, लोगों की जिंदगी से अंधेरे को विदा कर दिया। इसलिए दुनियां आज खुदा, ईश्वर या गॉड की

बुलंदशहर हिंसा के आरोपियों को जमानत पर रिहा कर क्या संदेश दे रहा है न्यायालय ?

दिसम्बर 2018 में बुलंदशहर जिले में स्थित सयाना में कथित गौ-हत्या के मामले पर विरोध प्रदर्शन के उग्र रूप धारण करने से हुई हिंसा जिसमें पुलिस इन्सपेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या हो गई के मामले में गिरफ्तार सात लोगों को

आस्था की अंधी दौड़ कहीं नहीं पहुंचायेगी !

( हिमांशु कुमार )पूजा करता है वह भक्त बनता है ,पूजा करवाना और भक्त बनाना यह ब्राह्मणवाद का आधार है.ब्राह्मणवाद को समाप्त करने का रास्ता है भक्ति खत्म की जाए पूजा बंद की जाए .भले ही आप वह भक्ति परशुराम की करें या रविदास की करें ,गांधी की

श्रद्धा, अंधश्रद्धा और वैज्ञानिक सोच

- राम पुनियानी भारतीय राजनीति में भाजपा के उत्थान के समानांतर, देश में शिक्षा के पतन की प्रक्रिया चल रही है। देश की नई शिक्षा नीति का अंतिम स्वरूप क्या होगा, यह जानना अभी बाकी है। परंतु भाजपा, पाठ्यक्रमों और शोधकार्य को कौनसी

आप क्या मैसेज देना चाहते है चंद्रशेखर ?

(सतीश कुमार पिल्लई ) हाथ मे लट्ठ गले मे नीला पटका ,मसल्स का सार्वजनिक प्रदर्शन कर देश भर से आई बहुजन जमात को क्या संदेश देना चाहते हैं ये नेता जी  कि सारे लोग लट्ठ उठा लें या सारे लोग बाहू वल का प्रयोग करें ? अगर इसका सीधा सा