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नज़रिया

क्या धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण है !

-(राम पुनियानी )     हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जब सामाजिक मानकों और संवैधानिक मूल्यों का बार-बार और लगातार उल्लंघन हो रहा है. पिछले कुछ वर्षों में दलितों पर बढ़ते अत्याचार और गौरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों की लिंचिंग ने समाज को झिंझोड़…

जो अंबेडकर की मूर्ति से घृणा करते है,वे अंबेडकर को पढ़ेंगे,तो नमन करेंगे !

(डॉ.एम.एल.परिहार)   आज बहुजन समाज गली गली में अंधाधुंध अंबेडकर की मूर्तियां खड़ी कर अपनी परेशानियों के जाल खुद तैयार कर रहा है.बाबासाहेब नायक पूजा (hero worship)के सख्त खिलाफ थे ,उन्हें यह कभी अच्छा नहीं लगता था कि उनके प्रशंसक उनका…

क्या दलित केवल धरना प्रदर्शन करने के लिए ही पैदा हुए हैं ?

(बी.एल.बौद्ध) वैसे तो लोकतंत्र में धरना प्रदर्शन करना कोई बुरी बात नहीं है क्योंकि भारत का संविधान हमें ऐसा करने की इजाजत देता है कि हम शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार या कोई भी कानूनी मांग  मनवाने के लिए अथवा अपना अधिकार लेने के लिए धरना…

सोशल मीडिया बहुजनों के लिए अनमोल है  !

(डॉ.एम.एल.परिहार) कुछ महीनों पहले मैं फेसबुक से अनजान था किताबों में ही ज्यादा व्यस्त था लेकिन अब फेसबुकिया संसार को थोड़ा जानने लगा हूं. जब दलित शोषित वंचित समाज का अपना कोई मीडिया नहीं था. समाज का दुख सुख अन्त र्राष्ट्रीय स्तर पर…

राजग को प्रचंड जनादेश मिला है ..!

(ओम थानवी) लोग पूछते हैं, राजग को प्रचंड जनादेश मिला है। आप अब भी आलोचक क्यों हैं? कोई बताए कि क्या जनादेश आलोचना का हक़ छीन लेता है? मेरा गिला राजनेताओं से उतना नहीं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों की अपनी ही…

यह ध्रुवीकृत जनादेश है !

(भंवर मेघवंशी)   भारत मे लोकसभा के चुनाव के परिणामों में एक बार पुनः  नरेंद्र मोदी को ही प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रचंड बहुमत देने वाला जनादेश दिया गया है,विपक्ष के लिए बिल्कुल ही अपेक्षा के विपरीत आये परिणाम है,उसे…

कांग्रेस की हार के लिए क्या अकेले गहलोत ज़िम्मेदार है ?

(भंवर मेघवंशी) मीडिया में एक संगठित अभियान के द्वारा लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस की पराजय के लिए सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पूरी तरह ज़िम्मेदार ठहराने की होड़ सी लगी हुई है। यहां तक कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग…

गोड़से के राजनैतिक उत्तराधिकारी !

-(राम पुनियानी)   मालेगांव बम धमाके प्रकरण में आरोपी प्रज्ञा ठाकुर, जो कि स्वास्थ्य के आधार पर ज़मानत पर रिहा हैं, नाथूराम गोड़से पर अपने बयान के कारण विवादों के घेरे में आ गई. बल्कि, उसके पहले से ही अलग-अलग कारणों से उनकी आलोचना हो रही…

बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध के दुश्मनों को पहचानिए !

(संजय श्रमण)   बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध के सबसे पुराने और सबसे शातिर दुश्मनों को आप आसानी से पहचान सकते हैं। यह दिन बहुत ख़ास है इस दिन आँखें खोलकर चारों तरफ देखिये। बुद्ध की मूल शिक्षाओं को नष्ट करके…

टोगड़ा-टोगड़ी की शादी की चिंता, लेकिन कुंआरों की फौज खड़ी है !

(डॉ.एम.एल.परिहार) ------------------------------ मेघवाल समाज आए दिन दूसरी जातियों को कोसते रहता हैं लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि हमारी अशिक्षा, गरीबी व दरिद्रता के लिए काफी हद तक हम खुद ही जिम्मेदार हैं। मेघवाल समाज ने कुरीतियों से मानो…