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नज़रिया

भिक्षुओं ! जो मेरी सेवा करना चाहता है वह रोगी की सेवा करें

(डॉ.एम .एल.परिहार)एक बार गौतम बुद्ध आनंद के साथ एक बड़े विहार में भिक्षु निवास का निरीक्षण कर रहे थे. एक कमरे में एक भिक्षु अपने मल मूत्र में असहाय पड़ा था.बुद्ध ने पूछा.--भिक्षु ! तुम्हे क्या कष्ट है ?--भयंकर दस्त से पीड़ित हूं

कोरोना: पशुओं को लेकर भी सचेत रहें !

(स्कंद शुक्ला) वर्तमान कोविड-19 महामारी के समय लोग जानवरों को लेकर भी सशंकित और चिन्तित हैं। अनेक लोग आमिष भोजन करते रहे हैं और ढेरों के पास कोई-न-कोई पालतू जीव है। ऐसे में इनसे सम्बन्धित प्रश्नों का मन में उठना स्वाभाविक है। 

अमीरी के कुत्ते भी चर्बीले है ,मजदूर के चेहरे जर्द पीले है ..!

(नारायण बारेठ)उनके हाथ भारत में निर्माण करते है ,कोई बांध ,कोई बिजलीघर ,हॉस्पिटल और राजमार्ग उन हाथो के बनावट की गाथा सुनाते है .फिर वो लम्हा आया जब उन हाथो ने याचना की ,गुजरात में मेहनत मशक्क्त कर पेट पालते हजारो मजदूरों को बेसहारा छोड़

कोरोना वायरस : दलित समाज के लिए घातक हो सकता है

(डाॅ गुलाब चन्द जिन्दल 'मेघ' ) मैं बहुत चिंता में हूँ। जबसे कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की जानकारी भारत में आने लगी है। और इस वैश्विक महामारी के खतरे और प्रसार से बचने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। इनमें मंदिर, मस्जिद, चर्च,

बाहर मत भटको ,अपने अंदर देखो !

(डॉ.एम.एल. परिहार) बाहर यानी भटकाव, अंधेरा. अंदर यानी उजाला. अकेले हो तो ध्यान करो, समुह में हो तो प्रेम करो, मैत्री फैलाओ. भीतर का दीया जले, उजाला अंदर से हो, ज्ञान व ध्यान की ज्योति जले....जो धन से नहीं मिलता है वह ध्यान से हासिल होता

कोरोना वायरस के बाद की दुनिया : युवाल नोआ हरारी

(युवाल नोआ हरारी)मानवता इस समय एक वैश्विक संकट से जूझ रहा है। शायद हमारी पीढ़ी का यह सबसे बड़ा संकट है। अगले कुछ सप्ताहों में आम लोग और सरकारें जिस तरह की निर्णय लेंगी वह शायद यह तय करेगा कि आनेवाले वर्षों में दुनिया की तक़दीर कैसी होगी।

कोरोना से लड़ने के लिए डॉक्टरों को चाहिए रोज़ 5 लाख बॉडी कवर PPE, लेकिन मास्क है न दास्ताने !

(Ravish Kumar) कोरोना कवरेज़ की तस्वीरों को याद कीजिए। चीन के डाक्टर सफेद रंग के बॉडी कवर में दिखते थे। उनका चेहरा ढंका होता था। हेल्मेट जैसा पहने थे। सामने शीशा था। आपादमस्तक यानि सर से लकर पांव तक सब कुछ ढंका था। इस बाडी कवर के कई

ट्रंप का ‘चीनी’ वायरस और हमारे पूर्वाग्रह !

(सोपान जोशी)अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 'सारस-कोव-2' को चीनी वायरस कहा। पूर्वाग्रह ऐसे ही काम करता है। हम किसी नयी घटना को जानने के लिए अपनी समझ के दायरे को बड़ा करने के प्रयास नहीं करते हैं, बल्कि हर नयी घटना को अपने पूर्वाग्रह के

कोरोना : अनिश्चय और भय से उपजा व्यापार और व्यापार-क्षय !

(Skand Shukla)रोग का महामारी-स्वरूप सामाजिक अनिश्चय के लिए खाद-पानी है। जिस तरह से रोगियों की संख्या में वृद्धि होती है , उसी तरह से समाज में अनिश्चितता भी बढ़ती जाती है। वर्त्तमान कोरोना-पैंडेमिक के मामले में भी यही हो रहा है। जो लोग

आई टी सेल वाले कोटा में बच्चों की मौत पर लिखा रवीश कुमार का यह लेख पढ़ ले !

(रवीश कुमार) जब सारे देश में प्राथमिक स्वास्थ्य की खस्ता हालत पर लिखता और प्रोग्राम करता हूं तो आई टी सेल का गिरोह कंबल ओढ़ कर सो जाता है। वह तभी जागता है जब किसी अपराध में शामिल कोई मुसलमान दिखता है या फिर भी वो ग़ैर भाजपा सरकार से