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नज़रिया

अदृश्य नायक ‘राणा पूंजा’ जिन्हें भुला दिया गया !

1576 ई. में मेवाड़ में मुगलों का संकट उभरा। इस संकट के काल में महाराणा प्रताप ने भील राणा पूंजा का सहयोग मांगा। ऐसे समय में भील मां के वीर पुत्र राणा पूंजा ने मुगलों से मुकाबला करने के लिए मेवाड़ के साथ अपने दल के साथ खड़े रहने का निर्णय…

आरक्षण पर सर्वे को लेकर गुलाब कोठारी के नाम ख़त !

प्रिय कोठारी जी , आरक्षण को लेकर आपने एक सर्वे किया है, आपके अखबार को लेकर एक रिसर्च मैंने भी की है। हाल ही में आपके अखबार के प्रथम पृष्ठ पर एक सर्वे छपा, जिसमें बताया गया था कि आरक्षण से किस प्रकार समाज में वैमनस्य बढ़ रहा हैं। हालांकि…

यहां कौन है तेरा ,मुसाफिर तू जायेगा कैसे ?

राजस्थान रोडवेज -रोज करोडो का घाटा  पर फायदा किसकी जेब में जा रहा है ? प्राइवेट की पॉकेट में।  प्राइवेट में कौन है ? कुछ नेताओ की बसे है ,कुछ उनके मिलने वालो की है ,कुछ उनके मर्जीदानो की है।  खामियाजा कौन भुगत रहा है ? आम जनता और…

आरक्षण व प्रमोशन की अंधी दौड़ दलितों को बर्बाद कर देगी !

ज्यादा नहीं सिर्फ पांच साल बाद ही देख लेना, सरकारी दफ्तरों में दलित चपरासी से लेकर डायरेक्टर तक के नामों की तख्तियां गायब हो जाएंगी। क्योंकि बाबासाहेब की बदौलत सुख भोग रहे....

मिशन..मिशन…काहे का मिशन…?

कल मेरे पास एक युवा का बार बार मिस्ड कॉल आ रहा था। आखिर मैंने ही वापस कॉल कर पुछा , भाई ! बार बार मिस्ड कॉल क्यों कर रहे हो ? वह विनम्रता से बोला,. सर , मोबाइल में बैलेंस नहीं है इसलिए....

स्वयं तुलसीदास जी उस दौर में ‘आधार’ की महत्ता का बखान कर चुके हैं !

आधार ! इसका माहत्म्य समझो।  स्वयं तुलसीदास जी ने उस दौर में आधार की महत्ता का बखान किया था।  रामायण में वे कहते है ' कलियुग केवल नाम आधारा सुमिर सुमिर न उतरहि पारा ' / कलियुग में वे ही सुखी होंगे जिनके पास आधार है। 

बहुत कर ली राजनीति, अब सेवा करना चाहता हूँ !

बहुत कर ली राजनीति  अब सेवा करना चाहता हूँ ! यह सुनते ही बैठक में सब को सांप सूंघ गया। हालाँकि सांप खुद बैठकों में जाने से डरते है।पर मुहावरा है। भाई साहब ने जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।पिछली बार कार्यकर्ताओ ने उनके त्याग पत्र को…

अब ये आरएसएस की ‘मुख्यधारा’ क्या बला है !

(भँवर मेघवंशी) हर कोई हर किसी को मुख्यधारा से जोड़ने में लगा है । कोई दलितों को तो कोई आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है ,किसी को फिक्र है कि देश का अल्पसंख्यक मुख्यधारा से दूर है । बरसों बाद आर एस एस को पता चला है कि घुमन्तू समुदाय…

कालूड़ी मामला यू एन ओ तक पहुंच गया लेकिन शोषित समाज के कानों तक नहीं पहुंचा क्यों !

- ( बी एल बौद्ध ) कई लोगों से मोबाईल पर जानना चाहा कि अभी कालूड़ी मामले का क्या चल रहा है तो कुछ लोगों को तो आधी अधूरी जानकारी है लेकिन अधिकतर लोगों को इस मामले के बारे में बिल्कुल भी खबर नहीं है,कालूड़ी का नाम सुनते ही कई लोग तो किसी…

“शहरी नक्सल” दूरगामी सोच पर राजसत्ता का हमला !

(सुनील कुमार) गौतम नवलखा सहित पांच सामाजिक कार्यकर्ता 28 अगस्त से अपने-अपने घर में कैद हैं। राज्य सत्ता आखिर इन लोगों से क्यों डरती है? इन पांचों लोगों की उम्र 50-83 साल के करीब है। आखिर इस उम्र में वे ऐसा क्या कर रहे थे? मैंने इसमें से…