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नज़रिया

गाँधी और गोडसे: विरोधाभासी राष्ट्रवाद

( राम पुनियानी ) इस वर्ष गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2020) पर ट्विटर पर ‘नाथूराम गोडसे जिन्दाबाद’ के संदेशों का सैलाब सा आ गया और इसने इसी प्लेटफार्म पर गांधीजी को दी गई श्रद्धांजलियों को पीछे छोड़ दिया. इस वर्ष गोडसे पर एक लाख से ज्यादा

हाथरस की बेटी के साथ न्याय हो : जातीय गुंडों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो

( विद्या भूषण रावत )उत्तर प्रदेश के हाथरस में वाल्मीकि समाज की लड़की की जिस बेरहमी से बलात्कार के बाद ह्त्या की गयी है वह दिल दहला देने वाली है. वैसे यह घटना 14 सितम्बर को घटी और उसके बाद से ही लड़की के परिवार वाले भटक रहे थे के उसके साथ

‘अशोक चक्र’ से जात ढूंढ़ लेने वाले लोग कौन है ?

- कुणाल रामटेके मुंबई स्थित ‘टाटा समाजिक विज्ञान संस्था’ के हमारे साथी तथा पीएचडी स्कॉलर एडवोकेट सुजीत निकालजे और उनके परिवार पर हुआ कथित जातिगत हमला आज भी भारतीय समाज की उस समस्या को अधोरेखित करता है जिसके दृढ़ीकरण हेतु धार्मिक

भारतीय ट्राइबल पार्टी और आदिवासी लोग !

कैलाश चंद्र रोत    दक्षिण राजस्थान में हाल का राजनीतिक परिदृश्य देश के परिदृश्य से किन्हीं  बातों से खास है या यू कह सकते हैं कि किसी भी समाज और उसमें रहने  वाले लोगों के नियमों को  संस्कृति री  ति रिवाज परिपाटी इत्या दि से ही  समाज

अब भी अगर ख़ामोश रहे तो …!

- भंवर मेघवंशी भीमा कोरेगाँव प्रकरण में जेल में बंद मानव अधिकार समर्थकों को आज दो साल हो गये है . क्या देश है और क्या ही उसका निजाम है ? जिन्होंने दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काई , वे नामज़द आरोपी आराम से बाहर घूम रहे है , लेकिन जो हिंसा

काश , हम सब शंकर की कठपुतलियाँ बन जायें !

- डॉ. रेणुका पामेचालिखनेवाला जब जन आंदोलनों का प्रत्यक्ष साक्षी हो तो लेखन में ताज़ी हवा का झौंका महसूस होता है.शंकर सिंह के जीवन पर जो उपन्यास लिखा गया है,वह बहती नदी की तरह धारा प्रवाह है.मेरी नज़रों में शंकर एक ऐसा इन्सान है जो

हागिया सोफिया का संग्रहालय से मस्जिद बनना: बदल रहा है समय

( राम पुनियानी ) पिछले तीन दशकों में वैश्विक राजनैतिक परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन आये हैं. उसके पहले के दशकों में दुनिया के विभिन्न देशों में साम्राज्यवादी और औपनिवेशिक ताकतों से मुक्ति के आन्दोलन उभरे और लोगों का ध्यान दुनियावी मसलों

कोविड के बहाने शिक्षा का साम्प्रदायिकीकरण

( राम पुनियानी ) कोविड 19 ने जहाँ पूरी दुनिया में कहर बरपा कर रखा है वहीं कई देशों के शासक इस महामारी के बहाने अपने-अपने संकीर्ण लक्ष्य साधने में लगे हैं. कई देशों में अलग-अलग तरीकों से प्रजातान्त्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है,

ये जो बच्चे 95 और 99.9 प्रतिशत अंक पा रहे हैं ..!

(कविता कृष्णपल्लवी ) जमकर अंक ला रहे बच्चों के माँ-बाप अपना 56 इंची सीना टोले-मोहल्ले और फेसबुक पर दिखा रहे हैं, मुआफ़ करें, इससे मुझे कोई खुशी या उत्साह अनुभव नहीं हो पाता. ऐसे तमाम अभिभावक अपने बच्चों को हैसियत, पैसे और सुरक्षा

राजद्रोह कानून का प्रयोग अपने विरोधियों के खिलाफ न करे राजस्थान सरकार !

पण्डित नेहरू ने इसे खराब बताया था तथा कांग्रेस के घोषणा पत्र 2019 में इसे हटाने की बात कहीं गई है। पिछले कुछ हफ्तों में देखा गया है कि राजस्थान में सत्ता दल के कुछ विधायक तथा विपक्षी दल मिलकर कांग्रेस की विधिवत रूप से निर्वाचित सरकार को