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नज़रिया

एससी-एसटी एक्ट को लेकर फैलाये जा रहे झूठ का मुकाबला कैसे करें ?

(भँवर मेघवंशी) सोशल मीडिया पर एससी एसटी एक्ट में हुए बदलावों  की अपनी ही तरह से व्याख्या करते हुए एक पेम्पलेट प्रचारित किया जा रहा है ,जिसे लोग सच मानकर फॉरवर्ड कर रहे है, जबकि इस मामले में तथ्य यह कहते है ? किसी भी कानून का विरोध…

तो अब नोटा और सोटा की तैयारी हो रही है !

कैसी दादागिरी है ? जालिमों को जुल्म करने का लाइसेंस चाहिए ,ताकि अत्याचार भी करे लेकिन कानून से भी बचे रहें । किसी शायर ने कहा - " बेकसर चाबुक चलाये ,बेरहम जल्लाद ने /और अश्कों को छलकने की इजाज़त तक न दी ।" मतलब जाति रखेंगे, जातिगत…

पाण्डेय जी ने किया दलित आदिवासियों के ख़िलाफ़ एक राष्ट्रवादी गुनाह !

( भंवर मेघवंशी ) " हिंदुत्व वादी सवर्ण नेता नित्यानंद पांडेय ने एससी ,एसटी समुदाय का सामाजिक एवं आर्थिक बहिष्कार करने की अपील की है " कोई राष्ट्रवादी युवा वाहिनी है ,जो आरएसएस जनित लगती है ,क्योंकि उसके लेटरहेड पर संघ की…

‘कालूड़ी’ का ‘काला सच’ – दलित गाँव छोड़ने को है मजबूर !

- भट्टा राम देश आजाद होने के 71 वर्षों के बाद भी दलित गुलामी में जी रहे है। बाड़मेर जिले के पुलिस थाना बालोतरा के अंतर्गत कालूड़ी गांव के अनुसूचित जाति के मेघवाल जाति के 70 परिवारों की बहिष्कृत कर दिया गया है। कुछ दिन पहले…

जिस धर्म व्यवस्था में अपमान हो ,उसे ठोकर मारे !

जालोर में मन्दिर की भोजनशाला में खाना खाने पर दलित की पिटाई    - भंवर मेघवंशी जालोर जिले के सांचौर तहसील क्षेत्र के झाब थाना इलाके के चौरा गांव का एक धर्मभीरु आस्तिक हिन्दू दलित बिजरोल खेड़ा के खेतेश्वर मन्दिर में जाति…

‘घुमन्तुओं के संघीकरण’ की परियोजना पूरी हो चुकी है !

-  भंवर मेघवंशी आज देश भर में "घुमन्तू मुक्ति दिवस" मनाया जा रहा है । ऐसा माना जाता है कि तकरीबन 666 जातियां है जो घुमन्तू,अर्धघुमंतू व विमुक्त की श्रेणी में आती है ,इनकी आबादी 15 करोड़ से अधिक अनुमानित है । ये लोग अलग अलग जगहों पर अलग…

तोषिणा में दलित समाज की आम सभा में उमड़ा जन सैलाब !

भीख नहीं भागीदारी चाहिये, देश की हर ईंट में हिस्सेदारी के महाआंदोलन के तहत अनिश्चित भूख हड़ताल ( एडवोकेट कमल भट्ट ) अंबेड़कर महासभा की राष्टी्य अध्यक्षा विद्या गौतम व्दारा *भीख नही भागीदारी चाहिये इस देश की हर ईंट में हिस्सेदारी…

भारत के सभ्य और समर्थ होने की दिशा: धार्मिक सुधार आन्दोलन

 ( संजय श्रमण ) पहले तरह के लोग और उनकी प्रतिक्रिया: ये वे लोग हैं जिनके परिवार, गाँवों गली मुहल्लों रिश्तेदारों में पुराने शोषक धर्म के कारण बहुत सारा भेदभाव और दुःख पसरा हुआ है. ये लोग नयी…

ये दुकानदार ‘सामान्य वर्ग’ के है ,इनसे सामान न खरीदें !

ये दुकानदार 'सामान्य वर्ग' के है , इनका मतलब शायद यह है कि इनके अलावा बाकी सब लोग 'असामान्य' है । इस देश मे गजब की चीजें चलती है ,जैसे कि जनरल कैटेगरी अर्थात - सामान्य वर्ग ,जबकि सच्चाई यह है कि सामान्य असामान्य जैसे कोई वर्ग है ही…

भाग्य, किस्मत और लक – ये सब बकवास है !

( बी एल बौद्ध ) जब से होश संभाला है तभी से लोगों से सुनते आ रहे हैं कि ऐसा मेरे भाग्य में नहीं लिखा था, मेरी किस्मत ही खराब थी,तेरा लक ठीक है। अब विचार करने वाली…