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नज़रिया

संविधान जलाये जाने पर आरक्षित सीटो से चुने गये जनप्रतिनिधि खामोश क्यों !

- कमल भट्ट 9 अगस्त भारत की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर भारत के सबसे बड़े व महत्तवपूर्ण ग्रंथ, महामानव विश्वरत्न डाँ. अम्बेडकर का अपमान, आरक्षण मुर्दाबाद, SC ST मुर्दाबाद तथा चमार मुर्दाबाद के नारे लगा कर देश के संविधान और वंचित वर्ग…

तुमने हमें चमार कहा !

- अशोक दास ( लेखक दलित दस्तक के संपादक है ) जब तुम संविधान जलाते हुए 'चमार' मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे, मुझे गुस्सा बिल्कुल नहीं आया। मुझे लगा कि 5 हजार साल पीछे से दौड़ शुरू कर सिर्फ 70 साल में ही अपनी मेहनत के बूते खुद को सबल बनाने…

मांडलगढ़ से इस बार कोई भील उम्मीदवार क्यों नहीं ?

- भंवर मेघवंशी विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष.... राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 48 प्रतिशत मतदाता अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के है । यह इलाका विजयसिंह पथिक के किसान आंदोलन का है,यहां नानक भील के संघर्ष…

समता सैनिक दल (बाबा साहेब अंबेडकर की फौज) के स्वर्णिम इतिहास पर हम सबको गर्व है !

- प्रदेश उपाध्यक्ष समता सैनिक दल राजस्थान प्रदेश. बाबा साहेब अंबेडकर की फौज,समता सैनिक दल के इतिहास को जानना एवं समझना बहुत जरूरी है । बात उस वक्त की है जब बाबा साहेब अंबेडकर अमेरिका और लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत…

कल सर्वव्यापी भागदारी के लिए मैं भी भूख हड़ताल पर रहूँगा और आप ?

अगर 1960 के दशक के आरपीआई के भूमि सुधार आन्दोलन को अगर अपवाद मान लिया जाय तो आर्थिक मुद्दों से जुड़े तमाम दलित आन्दोलन, खासकर नयी सदी के, आरक्षण अर्थात नौकरियों के मुद्दे पर केन्द्रित रहे.इस क्रम में समय-समय पर प्रमोशन में आरक्षण, निजी…

रवीश कुमार के पास कोई सचिवालय नहीं है, काश होता कोई !

- रवीश कुमार दोस्तों, मेरे पास कोई सचिवालय नहीं है। आए दिन लोगों के इतने मेसेज आते हैं कि सबको पढ़ना भी बस की बात नहीं । पढ़कर वादा करना भी मुश्किल है। तादाद इतनी है कि 90 फीसदी तो यूं ही पढ़कर डिलिट कर देना पड़ता है। कोई दस बीस नहीं, हर…

क्या “मंदसौर” शिवराज सरकार के खिलाफ जनाक्रोश के केंद्र के रूप में उभरा है !

- जावेद अनीस कुछ समय से “मंदसौर” लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, इस बार मामला 7 वर्षीय बच्ची के साथ की गयी दरिंदगी का है जिसके बाद शिवराज सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था के सवालों को लेकर घेरे में है. पिछले साल किसानों के खिलाफ पुलिस…

मनुवादियों के झाडू लगाने से वाल्मिकी समाज परेशान क्यों ?

- डाॅ गुलाब चन्द जिन्दल राजस्थान के निकायों में सफाई कर्मचारियों की भर्ती के सामान्य वर्ग (मनुवादी) के लोगों ने भी निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण करते हुए (सफाई करने का अनुभव प्रमाणपत्र के साथ) आवेदन किया था। और कई व्यक्तियों को सफाई कर्मचारी…

एक नया दलित आन्दोलन : भीख नहीं, भागीदारी !

- एच.एल.दुसाध दलित आन्दोलनों की महत्वपूर्ण तिथियों में 13 फरवरी,1938 का खास महत्व है. इसी दिन नासिक जिले के मनमाड में दलित रेलवे कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने घोषणा किया था, ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद हमारे…

NGO सेक्टर की सरकारी फंडिंग में लागू हो आरक्षण !

- दिलीप मंडल भारत में NGO सेक्टर में काफी पैसा है. काफी मतलब अरबों रुपए की बात है. सरकार ने कई काम से अपने हाथ खींच लिए हैं और वे काम एनजीओे से कराए जा रहे हैं. देश में सरकारी सेक्टर के बाद NGO सेक्टर रोजगार और आमदनी का बेहद…