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नज़रिया

संसद क्या धार्मिक नारेबाजी का अखाड़ा है ?

-(राम पुनियानी)   हाल में, दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र ने अपने विधि-निर्माताओं, अर्थात सांसदों, को चुनने की वृहद कवायद संपन्न की। सत्ताधारी दल भाजपा को मिले जबरदस्त जनादेश के परिप्रेक्ष्य में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो…

मंडल के मसीहा को क्यों भूल गये लोग ?

(विद्याभूषण रावत)   क्या विश्ववनाथ प्रताप सिंह इस लायक भी नहीं के उन्हें मंडल कमीशन की सिफारिशे लागु करने के लिए जिम्मेवार माना जाए. आज उनका जन्मदिन है लेकिन उनको याद करने वाले कम लोग है. बहुत से उन्हें आज भी जी भर के पानी पी पी के…

आम चुनाव 2019: भारतीय प्रजातंत्र का एक नया अध्याय !

(नेहा दाबाड़े)   दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र में हाल में संपन्न आम चुनाव में भाजपा को एक बार फिर देश पर अगले पांच साल तक राज करने का जनादेश प्राप्त हुआ है. लोकसभा की 543 में से 303 सीटें जीत कर भाजपा ने जबरदस्त बहुमत हासिल किया है.…

स्वामी विवेकानंद और उनका मानववाद !

(नेहा दाभाड़े) आज जिस भारत में हम रह रहे हैं, उसमें धर्म और धार्मिक पहचान ने सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है और वे सार्वजनिक और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित कर  रहे हैं। नागरिकता संशोधन विधेयक, कुछ धर्मों को अन्य…

मेडिकल कॉलेजों के भीतर पसरी यह एक अघोषित वर्ण व्यवस्था है !

(स्कंद शुक्ला)   जिस लड़के से आपकी अभी-अभी अस्पताल के वॉर्ड में झड़प हुई है , उसने कल से खाना नहीं खाया है और तीन घण्टे नींद ली है। मेडिकल-कॉलेजों में आये दिन डॉक्टरों और रोगियों के रिश्तेदारों के बीच कहासुनी और मारपीट के क़िस्से सुनने…

हुजूर के साथ ऐसा बर्ताव क्यों ?

(विद्या भूषण रावत) .................................................................................................... हमारे प्रिय मित्र फ्रैंक हुजूर ने अपनी आखिरी रात किताबों के ढेर और उनकी प्यारी बिल्लियों के साथ खुले में बिताई…

क्या धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण है !

-(राम पुनियानी )     हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जब सामाजिक मानकों और संवैधानिक मूल्यों का बार-बार और लगातार उल्लंघन हो रहा है. पिछले कुछ वर्षों में दलितों पर बढ़ते अत्याचार और गौरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों की लिंचिंग ने समाज को झिंझोड़…

जो अंबेडकर की मूर्ति से घृणा करते है,वे अंबेडकर को पढ़ेंगे,तो नमन करेंगे !

(डॉ.एम.एल.परिहार)   आज बहुजन समाज गली गली में अंधाधुंध अंबेडकर की मूर्तियां खड़ी कर अपनी परेशानियों के जाल खुद तैयार कर रहा है.बाबासाहेब नायक पूजा (hero worship)के सख्त खिलाफ थे ,उन्हें यह कभी अच्छा नहीं लगता था कि उनके प्रशंसक उनका…

क्या दलित केवल धरना प्रदर्शन करने के लिए ही पैदा हुए हैं ?

(बी.एल.बौद्ध) वैसे तो लोकतंत्र में धरना प्रदर्शन करना कोई बुरी बात नहीं है क्योंकि भारत का संविधान हमें ऐसा करने की इजाजत देता है कि हम शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार या कोई भी कानूनी मांग  मनवाने के लिए अथवा अपना अधिकार लेने के लिए धरना…

सोशल मीडिया बहुजनों के लिए अनमोल है  !

(डॉ.एम.एल.परिहार) कुछ महीनों पहले मैं फेसबुक से अनजान था किताबों में ही ज्यादा व्यस्त था लेकिन अब फेसबुकिया संसार को थोड़ा जानने लगा हूं. जब दलित शोषित वंचित समाज का अपना कोई मीडिया नहीं था. समाज का दुख सुख अन्त र्राष्ट्रीय स्तर पर…