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नज़रिया

ब्राह्मणवाद से मुक्ति के लिए छटपटा रहा है ग्रामीण बहुजन भारत !

(भंवर मेघवंशी)  ऐसा लग रहा है कि ग्रामीण भारत ब्राह्मणवाद की सांस्कृतिक दासता से मुक्ति के लिए एक मजबूत लड़ाई लड़ रहा है और इसके अग्रगामी है निर्विवाद रूप से दलित बहुजन समाज की युवा पीढ़ी , आइये देखते है कि गांवों का जातिवाद से सना भारत…

अंधेरे को मत कोसो, अपने हिस्से का दीपक जलाते जाओ,अंधेरा मिटकर रहेगा !

(डॉ.एम.एल परिहार)   ••••••••••••••••••••••••• कल बाबा साहेब के परिनिर्वाण के अवसर पर जयपुर से सटे गांवों में बहुजन समाज की कई कोलोनियो में बुद्ध कबीर रैदास फुले और बाबासाहेब की विचारधारा का रात तक प्रचार किया। वहां अंबेडकर के चित्र व…

रवीश कुमार का पत्र दिवंगत पुलिस ऑफिसर के नाम !

(रवीश कुमार का पत्र)   सुबोध कुमार सिंह जी, मैं आपको एक पत्र लिख रहा हूं. मुझे मालूम है कि यह पत्र आप तक कभी नहीं पहुंच सकेगा. लेकिन मैं चाहता हूं कि आपकी हत्या करने वाली भीड़ में शामिल लड़कों तक पहुंच जाए. उनमें से किसी एक लड़के के पास…

क्या आज के दौर में ऐसा साझा मंच भी संभव है !

(डॉ. अनन्त भटनागर)   1996 के लोकसभा चुनाव में हम कुछ मित्रों  ने अपनी संस्था"प्रबुद्ध मंच" की ओर से "साझा मंच" कार्यक्रम की संकल्पना की। "साझा मंच" यानी  चुनाव के सभी प्रत्याशी एक ही मंच से जनता को संबोधित करें और जनता के सवालो के जवाब…

हमारा असल धर्म क्या है ?

(हिमांशु कुमार) सारे इंसानी समाज का धर्म यह है की दुनिया को तकलीफ से मुक्त बनाया जाये  , दुःख से मुक्त यानी ? कोई भूखा न रहे , कोई बिना इलाज न मरे , किसी को बेईज्ज़त ना किया जाये , किसी के साथ शारीरिक हिंसा ना हो , सभी…

विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम का ख़त उनके अपने और दुनिया के बेटों के नाम !

मैरी कॉम का ख़त उनके अपने और दुनिया के बेटों के नाम। मेरे बेटों, तुम अभी नौ और तीन साल के हो, लेकिन इस उम्र में भी हमें अपने आपको महिलाओं के साथ व्यवहार को लेकर जागरूक हो जाना चाहिए। ● मेरे साथ सबसे पहले मणिपुर में छेड़छाड़ हुई, फिर…

संविधान के उद्देश्यों को व्यर्थ करनेवालों में शीर्ष पर प्रधानमंत्री मोदी !

(एच.एल.दुसाध) आज 26 नवम्बर है: संविधान दिवस ! 1949 में आज ही के दिन बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने राष्ट्र को वह महान संविधान सौपा था, जिसकी उद्देश्यिका में भारत के लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुलभ कराने की घोषणा की गयी थी.…

अयोध्या में धर्म संसद : फिर मांद से निकले साधु-संत !

(एच.एल.दुसाध) विगत दो दशकों से जब-जब लोकसभा चुनावों का समय आता है, साधु-संत राम मंदिर निर्माण के प्रति अपनी उग्र प्रतिबद्धता का इजहार कर निरीह हिन्दुओं की धार्मिक चेतना का राजनीतिकरण करने की कोशिश में जुट जाते हैं और चुनाव ख़त्म होते ही…

यह समय मन मारकर बैठ जाने का नहीं, अपने प्रतिरोध को व्यक्त करने का है !

(एच.एल.दुसाध) मित्रों, समसामयिक मुद्दों पर सोशल मीडिया में जिस तरह वैविध्यपूर्ण टिप्पणियां आ रही हैं, दैनिक पत्रों के प्रति मेरा आकर्षण तो कमतर होते जा रहा है. इस मध्य गत एक माह से ‘डाइवर्सिटी डे’ के आयोजन में अतिरिक्त रूप से व्यस्त रहने…

नोटबंदी के 2 साल: काले धन के लिए आम जनता को भारी कीमत चुकानी पड़ी !

(यश मेघवाल)   दो साल पहले नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा कर राष्ट्र को आश्चर्यचकित कर दिया था I 500 और 1000 रुपए के नोट जो भारतीय मुद्रा में लगभग 86% थे वो अब बंद कर दिए गए । भारतीय सर्वहारा एक भ्रम में था कि नोटबंदी असमानता को कम करने…