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नज़रिया

केरल, मोपला क्रांति और साम्प्रदायिकीकरण

पिछले कुछ महीनों से केरल ख़बरों में है. मीडिया में राज्य की जम कर तारीफ हो रही है. केरल ने कोरोना वायरस का अत्यंत मानवीय, कार्यकुशल और प्रभावी ढंग से मुकाबला किया. इसके बहुत अच्छे नतीजे सामने आये और लोगों को कम से कम परेशानियाँ भोगनी

महात्मा गाँधी, नस्ल और जाति

-राम पुनियानी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने दुनिया के सबसे बड़े जनांदोलन का नेतृत्व किया था. यह जनांदोलन ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध था. गांधीजी के जनांदोलन ने हमें अन्यायी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए दो महत्वपूर्ण औज़ार दिए

कोविड-19 दलित महिलाओ को बना रहा है और ज्यादा गरीब !

( सुमन देवठिया ) इस समय कोरोना महामारी पूरे देश मे फ़ैल रही है जिसकी चपेट मे भारत भी है, इस कोरोना ने ना केवल इंसान के स्वास्थ्य को प्रभावित किया है बल्कि इंसान के रोजगार, आजादी और पसंद को छीन लिया है. कोरोना ने लोगो की आजादी,

वंचित समूहों को कब मिलेगी घुटन से मुक्ति ?

-राम पुनियानी अमरीका के मिनियापोलिस शहर में जॉर्ज फ्लॉयड नामक एक अश्वेत नागरिक की श्वेत पुलिसकर्मी डेरेक चौविन ने हत्या कर दी. चौविन ने अपना घुटना फ्लॉयड की गर्दन पर रख दिया जिससे उसका दम घुट गया. यह तकनीक इस्राइली पुलिस द्वारा खोजी गई

केरल में गर्भवती हथिनी की मौत: एक त्रासदी का साम्प्रदायिकीकरण

-राम पुनियानी भारत के विविधवर्णी समाज में साम्प्रदायिकता का रंग तेज़ी से घुलता जा रहा है. धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, उनके विरुद्ध हिंसा की जा रही है और फिर उसे औचित्यपूर्ण ठहराया जा रहा है. हमारे समाज के

धार्मिक स्वातंत्र्य: कहां खड़ा है भारत

-राम पुनियानी भारत अनेक धर्मों वाला बहुवादी देश है. हिन्दू धर्म के मानने वालों का यहाँ बहुमत है परन्तु इस्लाम और ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों की संख्या भी कम नहीं है. हमारे स्वाधीनता संग्राम के नेता सभी धर्मों को बराबरी का दर्जा

मानसिक तनाव व खुदकुशी का सामाजिक पहलू

(नीरज ‘थिंकर’) सुशांत सिंह राजपूत की मौत के साथ ही 'डिप्रेशन' और 'मेंटल हेल्थ' पर एक बार फ़िर से जोर-शोर से डिबेट शुरू हो गयी है..हालांकि आत्महत्या के आंकड़ों की अगर हम बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार पूरी दुनिया

मार्टिन लूथर किंग के सपने आज भी अधूरे

- एल. एस. हरदेनिया वर्ष 1963 में अगस्त 29 को अमरीका की राजधानी वाशिंगटन में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन का नेतृत्व मार्टिन लूथर किंग जूनियर कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी ‘हमें सम्मान और काम चाहिए’। इस

वे ग्यारह हैं !

( हिमांशु पंड्या ) आज से ठीक दो साल पहले इनमें से पाँच को गिरफ्तार किया गया. बाद में छह और गिरफ्तार हुए. इनमें से कोई अपनी भाषा के सबसे बड़े कवियों में से आता है, कोई भारत सरकार की प्रतिष्ठित फेलोशिप प्राप्त अध्येता है, कोई ज़िंदगी भर

क्या पसमांदा शब्द पर पुनः विचार करने की ज़रुरत है ?

जिस शब्द पर इतना खून पसीना लगा हो,उसे क्यों बदला जाये ?( खालिद अनीस अंसारी ) एक-दो दिन से व्हाट्सएप ग्रुप्स में पसमांदा शब्द पर कुछ बहसों को देख रहा था. कुछ लोगों की राय थी कि पसमांदा शब्द को बदलने की ज़रुरत है. मेरे हिसाब से तीन मुख्य