Browsing Category

रूबरू

महामना रामस्वरुप वर्मा अमर रहें !

- प्रशांत निहाल "जिसमें समता की चाह नहीं, वह बढ़िया इन्सान नहीं-समता बिना समाज नहीं, बिन समाज जनराज नहीं।" ये वर्मा जी का मशहूर नारा था . इस नारे से पता चलता है वर्मा जी कितने समतावादी इंसान थे. आज महामना श्री रामस्वरूप वर्मा की

हाथ पसारना शौक नहीं , मजबूरी है इनकी

- रमेश डांगरीवाल  "अंश " तीन चार रोज पहले की बात है, मैं और मेरी पत्नी दोनों बाजार में कुछ खरीदारी करने गए . पत्नी ने कहा मैं मेरे कुछ जरूरी सामान ले लेती हूं ,आप भी अपना कोई आवश्यक काम हो तो उसे निपटा लो .हम दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त

बुद्ध और बाबा साहेब के सच्चे मिशनरी : डॅा. एम.एल. परिहार

- भंवर मेघवंशीजन्म सामंती राजस्थान के अतिसांमती जिले पाली की देसूरी तहसील में एक छोटा-सा गांव है करणवा।जातिवाद और सामंतवाद का भयानक मिश्रण जहां पर दलित अक्सर अपनी पूरी जिन्दगी हाली (बंधुआ मजदूर) के रूप में गुजारने को अभिशप्त थे,

अद्भुत है भीलवाड़ा का घुमन्तू स्कूल !

  भीख नही, क़िताब दो - साक्षरता अभियान राजस्थान के भीलवाड़ा जिला मुख्यालय के पंचवटी इलाके के घुमन्तू बच्चों के मध्य कुछ ज़ुनूनी युवजन बहुत सराहनीय काम कर रहे हैं। वे अपने अपने काम करते हुए समय निकाल कर एक स्कूल चला रहे हैं ,जो हाशिये

एक बार फिर से गूँजा पुष्कर के स्टेडियम में डाॅ. नवीन परिहार का नाम !

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त श्री पुष्कर पशु मेले के शानदार समापन समारोह में पशुपालन विभाग राजस्थान के सर्वश्रेष्ठ घुड़सवार और अश्व विशेषज्ञ वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ नवीन परिहार  ने अपने घोड़े बादल और घोड़ी कंचन पर जबरदस्त अश्व…

कुलदीप नैयर का चले जाना एक क़द का उठ जाना है !

 ( ओम थानवी ) कुलदीप नैयर का जाना पत्रकारिता में सन्नाटे की ख़बर है। छापे की दुनिया में वे सदा मुखर आवाज़ रहे। इमरजेंसी में उन्हें इंदिरा गांधी ने बिना मुक़दमे के ही धर लिया था। श्रीमती गांधी के कार्यालय में अधिकारी रहे बिशन टंडन ने अपनी…

माउंटेन मैन दशरथ माँझी 

( प्रवेश भारती ) "अपने बुलंद हौसलों और खुद को जो कुछ आता था, उसी के दम पर मैं मेहनत करता रहा. संघर्ष के दिनों में मेरी मां कहा करती थीं कि 12 साल में तो घूरे के भी दिन फिर जाते हैं. उनका यही मंत्र था कि अपनी धुन में लगे रहो. बस, मैंने भी…

सामाजिक न्याय के महानतम योद्धा करुणानिधि जी का जाना एक युग का अंत !

- चंद्रभूषण सिंह यादव जिस दक्षिण भारत मे वंचित समाज के लोग गले मे हंडिया और कमर में झाड़ू बांधकर चलते थे,शूद्र समाज की स्त्रियों को वक्ष ढंकने की इजाजत नही थी उस दक्षिण भारत के एक प्रमुख राज्य तमिलनाडु में पेरियार रामास्वामी नायकर जी के…

जब मैं तारक मेहता का उल्टा चश्मा के सेट पर पहुंचा !

- राजू तेली जब मैं पहुंचा'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' वाली गोकुलधाम सोसायटी में तो वहां के ये तमाम दृश्य देख कर आपको स्मृत हो गया होगा कि यह वही गोकुलधाम सोसायटी हैं, जहां 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' सीरियल के अंतर्गत बबिता जी के प्रति…

राम विलास : सवर्ण-हित में काम करने के लिये अभिशप्त एक दरिद्र नेता !

( एच एल दुसाध ) मेरा वर्षों से मानना रहा है कि रामविलास पासवान एक साधारण किस्म के पढ़े-लिखे अनपढ़ नेता रहे हैं . जिन्हें सरकम्सटेंसेज ने लोगों की नज़रों में असाधारण बना दिया.सिर्फ पासवान ही क्यों, इनके साथ दलित -पिछड़े समुदाय के जिन तीन-चार…