Browsing Category

रूबरू

‘ग्यारसी बुआ ‘ जैसे लोग कभी नहीं मरते !

(लखन सालवी) उसने सामाजिक बंधनों को तोड़ा, कच्ची टापरी की दहलीज लांघी, रात में 4-4 किलोमीटर पैदल चलकर रात्रि शाला में शिक्षा से जुड़ी। हस्ताक्षर करना सीख कर प्रमाणित साक्षर बनी। यहां उसने "ले मशाले चल पड़े है लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा…

डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्मस का पॉजिटिव यूज आम जन को सशक्त कर सकता है – मेघवंशी

( शून्यकाल एक गांव से चलाया जा रहा सोशल मीडिया इनिशिएटिव है,जिसने बहुत कम समय मे अपनी पहचान बनाई है,25 मई 2018 को दिल्ली में स्थित होटल यूरोज में डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन द्वारा आयोजित समारोह में शून्यकाल को सोशल मीडिया फ़ॉर एम्पावरमेंट…

हिमांशु कुमार का कोई एनजीओ नहीं है !

जब हम आदिवासियों के पक्ष में आवाज़ उठाते हैं,तो बहुत से खाते पीते मौज की ज़िन्दगी जीने वाले सवर्ण हमसे कहते हैं कि तुम लोग विदेशी एजेंट हो, डालर से चंदा लेते हो, हवाई जहाज से घूमते हो सरकार के बारे में झूठा प्रचार करते हो, और आदिवासियों का…

अब उनका फोन कभी नहीं आएगा

तेरे केस का क्या हो रहा है ? कहाँ आंदोलन चला रहा है ,बड़ा बुरा हाल है , दिल्ली आना तो मिलना ,तू कुछ कर यार ,समाजवादी आंदोलन फिर खड़ा करना है ,वो विजय क्या कर रहा है? सच्चर साहेब की यह आत्मीयता भरी उलाहने भरी आवाज़ कानों में रह रह कर गूंज रही…

पाली के पूर्व जिला प्रमुख खुशवीरसिंह ने फेसबुक पर उजागर की अपने मन की पीड़ा

3 अप्रेल से मै सोशल मीडिया पर देख रहा हूँ और ऑडियो भी सुन रहा हूँ.जैसे मैंने कोई राष्ट्र द्रोह कर दिया हो.कई राजपूत समाज के नासमझ बच्चे जिन्होंने मेंरे लिये जिन-2 शब्दों का उपयोग किया हैं,मुझे तो वो शब्द दोहराते भी शर्म आती है,मैंने ऐसा कौन…

मैं पब्लिक न्यूज़ रूम में काम करता हूं

हमारा चैनल अब कई शहरों में नहीं आता है। इससे काम करने के उत्साह पर भी असर पड़ता है। शहर का शहर नहीं देख पा रहा है, सुनकर उदासी तो होती है। इससे ज्यादा उदासी होती है कि संसाधन की कमी के कारण आपके द्वारा भेजी गई हर समस्या को रिपोर्ट नहीं…

ये जगत मामा है !

ये है जगत मामा , जिनका नाम शायद आपने भी सुना होगा। आज दुनिया जहाँ पल - पल पैसे के पीछे दोड रही है , वहीँ जगत मामा हर पल पैसे को पानी की तरह बहा रहे है। उन्हें पैसा बाँटने की धुन सी है। सिर पर दुधिया रंग का साफा, खाकी रंग में फटी सी धोती ,…

वहां मैंने जिस रवीश कुमार को देखा !

कल एक लम्बा लेख पढ़ा,जो किसी सज्जन ने रवीश कुमार के ख़िलाफ़ लिखा था.कांग्रेस गवर्नमेंट के समय शायद, एक बार रवीश जी ने कहा था, कि हैदर साहब मुझे मेरे जैसे चार पत्रकार और मिल जाएँ तो सरकारों को लाइन पर ले आएँगे हम लोग,लेकिन मेरी कहानी उसके…

कोटड़ा में आदिवासी महिलाओं का सम्मान समारोह सम्पन्न

आदिवासी विकास मंच कोटड़ा और आदिवासी जागरूक युवा संगठन कोटड़ा के साझा प्रयास से आदिवासी महिला सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन हुआ.यह कार्यक्रम विश्व महिला दिवस के उपलक्ष में आयोजित किया गया.इसमें उन महिलायों को शामिल किया गया है जो समाज के…

कोई इस जोशिल को समझाओ

ये जोशिल बड़ा बेवकूफ आदमी है! कब से समझा रहा हूं! समझता ही नहीं! फिर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गया.4 दिन पूरे भी हो गए. किसी छोटे अखबार ने भी न तो इसके सस्‍पेंड होने को खबर बनने लायक समझा और न इसकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को!…