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क्या चुन्नी बाई जैसे लोगों का यही भविष्य है ?

(भंवर मेघवंशी)कल चुन्नी बाई से मुलाकात कर आया। राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम ब्लॉक के देवडूंगरी गांव के चाक हिरात की निवासी 74 वर्षीया सामाजिक कार्यकर्ता चुन्नी बाई से कल शाम जा कर मिल आया,उनके साथ करीब 2 घण्टे गुजारे, उनकी परिस्थितियों

बुद्ध की हवा में जाना खतरे से खाली नहीं…..!

( डॉ एम एल परिहार )बुद्ध प्रेम,करुणा, ध्यान के पहले विद्रोह का नाम है. परम्परागत रूढियों, सड़ी गली मान्यताओं , अंधविश्वासों व अज्ञान के अंधेरे के खात्मे का नाम है. इसलिए इस पृथ्वी पर जब भी कोई धाम्मिक व्यक्ति हुआ है वह विद्रोही होता है. वह

भगत सिंह एक शोला था – नेहरू

भगत सिंह क्या था. वह एक नौजवान लड़का था. उसके अंदर मुल्क के लिए आग भरी थी. वह शोला था. चंद महीनों के अंदर वह आग की एक चिंगारी बन गया, जो मुल्क में एक कोने से दूसरे कोने तक आग फैल गई. मुल्क में अंधेरा था, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा नजर आता

गौतम बुद्ध और उनका धम्म !

-हिमांशु कुमार  बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ जो अब नेपाल में है,इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।इनके पिता का नाम शुदोधन था।ज्योतिष ने भविष्य वाणी करी थी कि यह या तो चक्रवर्ती सम्राट बनेगा,लेकिन अगर दुःख देख लेगा तो सन्यासी हो जाएगा.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक छात्र डॉ शोएब अहमद से आपकी मुलाक़ात कराता हूँ।

- रवीश कुमार आज सर सैय्यद डे है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए बड़ा दिन है। इसके छात्र अपने संस्थापक को चाहत से याद करते हैं। वो अपने वजूद में उनके वजूद को भी जोड़ते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पुराने छात्रों के इतने

ये डॉ. श्याम सुंदर ज्याणी है !

-विरमा राम बीकानेर के प्रतिष्ठित डूंगर कॉलेज में समाजशास्त्र पढ़ाते हैं, हालांकि मैं आज तक इन्हें वनस्पतिशास्त्र का शिक्षक/आचार्य मानता रहा था। ज्याणीजी पहली मर्तबा करीब 6 महीने पहले हमारे एक मित्र जितेन्द्र धारणिया जी के सौजन्य से

बहुजन मिशन की समर्पित हस्ती है डीएन केराला

(मनोहर मेघवाल) आज एक बहुत महानतम् शख्सियत से कॉल पर वार्तालाप हुई, अनुभवों के खजाने से बात करके बहुत अच्छा लगा। उनका नाम डीएन केराला साहब है, जो पिछले वर्ष कांडला पोर्ट में इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन से वरिष्ठ फोरमैन के प्रतिष्ठित पद से

नहीं रहे एसीबी के हीरो !

(श्रीपाल शक्तावत)"जिन्दगी तो हजार साल की भी कम होती है । मैं जल्द निकल भी गया तो क्या ? एक सुकून के साथ तो जाऊंगा कि मैं बिका नहीं, डिगा नहीं । मैंने मेरा काम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से किया । बच गया तो और काम करेंगे ।" ये शब्द मेरे कानों

मानवाधिकार के योद्धा लाखन सिंह का जाना समाज की बड़ी क्षति !

(उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल) सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक आंदोलन में मानवाधिकार के लिए लंबे समय से संघर्षरत जुझारू और सुलझे हुए शख्सियत के धनी लाखन सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका जाना मानवाधिकार आंदोलन लिए छत्तीसगढ़ सहित पूरे

महामना रामस्वरुप वर्मा अमर रहें !

- प्रशांत निहाल "जिसमें समता की चाह नहीं, वह बढ़िया इन्सान नहीं-समता बिना समाज नहीं, बिन समाज जनराज नहीं।" ये वर्मा जी का मशहूर नारा था . इस नारे से पता चलता है वर्मा जी कितने समतावादी इंसान थे. आज महामना श्री रामस्वरूप वर्मा की