चुनावी वर्ष में भाजपा सरकार का ‘पकौड़ा बजट’ !

उच्च शिक्षा,छात्रवृत्ति,पीपीपी मॉडल,छात्रा-सुरक्षा तथा दलित अल्पसंख्यकों के सवाल पर बजट मौन।

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एसएफआई राज्य कमेटी राजस्थान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि राज्य की भाजपा सरकार ने अपना अंतिम बजट दिया। पिछले बजट से इस बजट तक प्रदेश की राजनैतिक बदलाव आये है, इसकी स्पष्ट अभिव्यक्ति दिखी है। किसान आंदोलन,प्रदेश के युवाओं में बढ़ती नाराजगी तथा तीनों उपचुनाव में हार से राज्य सरकार जनता को आंशिक राहत देने पर मजबूर हुई है।

राज्य बजट में मुख्यमंत्री ने लगातार सफेद झूठ बोला है कि युवाओं को 13 लाख रोजगार दे दिया है, जिसमें 1.50 लाख सरकारी सेवा में व 11.50 लाख निजि क्षेत्र में। 1.50 लाख से ज्यादा भर्तियां पिछली सरकार की है। राज्य की प्रत्येक भर्ती अटकी हुई है। कहीं नियुक्ति देने वाले नहीं है,तो अन्य भर्ती में हाईकोर्ट में याचिका लगी है। निजि क्षेत्र में रोजगार देने की बात झूठी है। प्रदेश में ऐसा कोई कारखाना या उद्योग नहीं लगा है जिसमें सौ लोगों को भी रोजगार दिया हो। कौशल विकास के नाम पर अपने चहेतों में, अरबो रूपये बांटकर रोजगार बताया गया है। इसमें कुर मजाक युवाओं के साथ क्या हो सकता है। इस बजट में एक लाख 18 हजार नई भर्तियों की घोषणा की गई।पिछली भर्तियों के अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि इस घोषणा का हाल रिफायनरी जैसा होगा।रिफायनरी में उद्घाटन के बाद काम बंद होने की खबरे लगातार मीडिया में आ रही है। पुलिस विभाग भर्ती परीक्षा तिथि घोषित नहीं हो पा रही है। ऐसे में नई पुलिस भर्ती घोषणा छलावा है।

इस बजट में उच्च शिक्षा की अनदेखी की गई है। प्रदेश के शेखावटी विवि. सीकर,मत्सय विवि अलवर ,भृतहरी विवि भरतपुर, तकनीकी विवि बीकानेर,गुरूगोविन्द सिंह आदिवासी वि.वि बांसवाड़ा कागजों पर है। ये सरकारी विवि 2-4-6 कमरों में चल रहे हैं। इसमें विकास व मूलभूत सुविधाओं पर कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया है।झुझुनूं में खेल वि वि का बजट में उल्लेख ही नहीं है। अन्य विवि. में शैक्षणिक स्टाफ की भर्ती, छात्रावास व अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार का जिक्र नहीं है। प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय का वादा अधूराहै। प्रदेश में 18 नये महाविद्यालय जनता के संघर्ष की जीत है। प्रत्येक राजकीय महाविद्यालयों में हजारों कॉलेज व्याख्याताओं के पद खाली। हर रोज छात्रों द्वारा धरना, प्रदर्शनतालाबंदी की गयी परन्तु अभी तक व्याख्याताओं कीनियुक्ति पर बजट मौन है।

विद्यालय शिक्षा में पिछले चार वर्ष में 40000विद्यालय एकीकरण ,समानीकरण के नाम बंद कर दिये हैं।दिसम्बर 2017 में विद्यालयों को पीपीपी मॉडल पर दे दिया गया था जिसे जनता को विरोध के कारण स्थगित करना पड़ा।जबकि दूसरी तरफ बजट में 163आदर्श विद्यालय 1832विद्यालयों को क्रमोन्त की बात कही गयी है। विधालय शिक्षा में वर्तमान मेंलाखो पद खाली पड़े है। ऐसे में बिना शिक्षक, के कैसे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिलेगी।प्रतियोगी परीक्षा अभ्यार्थियोंके निशुल्क आवेदन तथा रोजगार मिलने तक बेरोजगारी भत्ते के बारे में कोई प्रावधान नहीं किया गया। प्रदेश के लाखों छात्रों की छात्रवृति पिछले 3 वर्षों से रूकी पड़ी हैं। बजट में छात्रवृति का भुगतान तथा महंगाई से जोड़कर देने की बात पर मौन है।

राज्य सरकार निजि क्षेत्र के भरोसे कृषि महाविद्यालय तथा मेडिकल कॉलेज का सपना देख रही है जो दिन में तारे देखने जैसा है। महगी होती तकनीकी शिक्षा पर बजट चुप है। परिवहन विभाग तथा चिकित्सा विभाग में पीपीपी मॉडल का विस्तार किया गया है,जबकि आम जनता पीपीपी मॉडल वापिस लेने की माग कर रही है। आये दिन बढ़ते छात्राओं पर हमले,छेडछाड तथा बलात्कार पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। पिछले 2 वर्ष के बजट में बार-बार छात्राओं व महिला के सेनेटरी पैड वितरीत करने की घोषणा की जाती रही है। 2 चिकित्सा मंत्री बदल जाने तथा 5 वे बजट में तीसरी दफा घोषणा की गई है। यह सरकार की संवेदनहीनता दिखाती है। प्रदेश के दलित तथा अल्पसंख्यक समुदाय पर बढ़ते हमले, भेदभाव तथा बुनियादी आवश्यकताओं पर कोई प्रावधान की नहीं किया गया है। आदर्श मदरसा योजना के नाम से नाममात्र राशि की घोषणा की गई है।

बजट में किसानों के साथ छलावा किया है। राज्य सरकार द्वारा 13 सितम्बर 2007 के अखिल भारतीय किसान सभा के साथ प्रत्येक किसान का 50 हजार कर्जा माफ करने, 2000 वृद्धा पेंशन देने, आवारा पशुओं पर रोक लगाने सहित वादों पर आधी अधुरी घोषणा की है। प्रदेश के लाखों संविदाकर्मियों की मांगों को अनसुना कर दिया है। आगनबाड़ी वर्करों की मामूली वेतन बढ़ोतरी आगनबाड़ी कर्मियों के संघर्ष की जीत है।संविदाकर्मियों को स्थाई नौकरी,समान काम-समान वेतन,पेंशन की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। प्रदेश में लागू काला कानून वापिस लेने की घोषणा नहीं की गई है। वहीं दूसरी तरफ मंदिरों के 10 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। यह प्रावधान जनता के पैसे से,धर्म का राजनैतिक फायदा लेने की कोशिश है।

राज्य सरकार में पिछले चार वर्ष में जनता को लूटकर दोहन का करने काम किया है। आमजनता में बढ़ते आक्रोश में रोकने के नाम पर कुछ राहत की गई है। इस प्रकार अंतिम बजट में तथा चुनावी वर्ष में घोषणा का पुलिन्दा पेश किया है। पत्रकारों को वार्ता में स्वंय मुख्यमंत्री ने बजट लागू में जाने की गारन्टी देने से मना कर दिया तथा पत्रकार वार्ता को बीच में छोड़कर चली गयी है। यह व्यवहार दिखाता है कि सरकार सवालों से बचना चाहती है।यह पकोडा बजट है। एसएफआई राज्य कमेटी मांग करती है कि राज्य सरकार तुरन्त बजट में सुधार करे तथा आम जनता की सभी मांगों को पूरा करे.

( पवन बेनीवाल )
राज्य सचिवमण्डल सदस्य।
एसएफआई राजस्थान

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