“बिचून- धरी रह गई चादर”

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( डाॅ गुलाब चन्द जिन्दल ‘मेघ,’ अजमेर)
बिचून- बलाई समाज की प्रमुख पीठ समष ॠषि गद्दी स्थान, बिचून जिला जयपुर के पीठाधीश आचार्य गोजीत साहेब 25 जून 2018 सोमवार को स्वरूपलीन हो गये थे। इस अवसर पर 10 जुलाई को सत्संग जागरण और 11 जुलाई को विशाल भंडारा और नये पीठाधीश के चयन कर चादर रस्म का आयोजन रखा गया था।
भंडारा और सत्संग आयोजन के लिए भंडारा प्रबंधन व्यवस्था समिति बनाकर श्री जग्गा राम वर्मा को अध्यक्ष मनोनीत किया गया। नये पीठाधीश के चयन के लिए 21 सदस्यीय ‘पीठाधीश चयन समिति’ बनाकर श्री छीतर जी सोडा को अध्यक्ष मनोनीत किया। रात्रि जागरण से पूर्व समाज के संत-महंतों का ग्राम में जुलूस निकाला गया। रात्रि को जागरण हुआ इसमें दूर-दराज़ के संतों ने शिरकत की।
चयन समिति के पास तीन व्यक्तियों ने बिचून गद्दी के लिए इच्छा व्यक्त की जिसे चयन समिति और संत समाज ने विचार और साक्षात्कार उपरांत पीठाधीश पद की गरिमा के अनुकूल नहीं पाया।
11जुलाई बुधवार को दोपहर समारोह स्थल पर चयन समिति के सभी पदाधिकारियों सहित समाज बंधुओं की सभा हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय संत योग गुरु स्वयंप्रकाश जी पीठाधीश ओमप्रकाश आश्रम रूपाहेली धाम (भीलवाड़ा), महंत प्रेम बारूपाल जी पीठाधीश रणसिंह जी, नरेना (जयपुर) आसन पर विराजमान थे। दोपहर बाद संत  गोविंद दास जी पीठाधीश खींवण ऋषि स्थान दूदू, संत हरी दास जी पीर किशनगढ़ भी पहुँचे।
चयन समिति अध्यक्ष ने जानकारी दी कि वर्तमान में समष ॠषि गद्दी स्थान, बिचून के लिए नये पीठाधीश का चयन नहीं हो सका है और आगामी छः माह की अवधि में किसी योग्य व्यक्ति का चयन किया जाना प्रस्तावित है, जिसे उपस्थित समाज बंधुओं ने स्वीकृति दी। वर्तमान में इस पीठ की सामान्य देखभाल आदि के लिए समाज बंधुओं की अनुशंसा से चयन समिति ने अस्थायी पुजारी मोहन लाल जी (कबीर पंथी) को मनोनीत किया गया।
 मोहन लाल जी नागौर जिले के पीलवा के पास स्थित मालास गांव के निवासी हैं। आपने आचार्य गोजीत साहेब से ही शिष्यत्व ग्रहण किया है और कई वर्षों तक इस स्थान पर रहे हैं। चयन समिति ने समाज बंधुओं की अनुशंसा पर पाँच हजार रूपये प्रतिमाह आगामी छः माह तक मानदेय देने की स्वीकृति जारी की। मानदेय राशि की व्यवस्था तत्काल ही उपस्थित समाज के भामाशाहों ने आवश्यकता से भी अधिक की करते हुये अपनी सह्रदयता का परिचय दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 32 व्यक्तियों ने 5-5 सौ रूपये प्रति माह छः माह तक,2 व्यक्तियों ने 1100 रूपये प्रति माह छः माह तक,200,200,250 रूपये प्रति माह छः माह तक देने की घोषणा की। साथ ही लगभग 40 समाज बंधुओं ने लगभग 35 हजार रुपयों का एक मुश्त सहयोग व्यवस्थार्थ दिया।(अनुदान सहयोग राशि अनुमानित है।) गेहूँ की बोरी, आटा, तेल का पीपे का भी सहयोग किया।
भंडारा प्रबंधन व्यवस्था समिति ने  आयोजन स्थल पर समाज बंधुओं, साधु-सन्तों के लिए अच्छी व्यवस्था की। भीष्म गर्मी में जगह-जगह बड़े कूलर पंखे, आदि की व्यवस्था की। इस व्यवस्था एवं आयोजन पर समाज के लोगों ने, बलाई समाज के विभिन्न सकल पंचों आदि ने अपनी तरफ़ से भंडारा प्रबंधन व्यवस्था समिति को लाखों रूपये का आर्थिक सहयोग किया। हमारे साधु-सन्तों ने भी आर्थिक सहयोग दिया इसमें संत गोविंद दास जी पीठाधीश खींवण ऋषि स्थान दूदू ने ग्यारह हजार रूपये का सहयोग भंडारा समिति को दिया। (कई बार तो आयोजक अपने समाज के ऐसे साधु-सन्त को भी आमंत्रित कर बैठते हैं जो समारोह में आने पर कार के पेट्रोल का खर्चे के साथ हजारों रूपये भेंट के नाम पर वसूल करते हैं) भंडारा प्रबंधन व्यवस्था समिति ने अनुदान की रसीद भी दी।
आयोजन स्थल पर पेंफलेट में दी गई कार्यक्रम की जानकारी के अनुसार कार्य में अव्यवस्था देखी गई। प्रबंधन समुचित नहीं रह सका। उपस्थित संतों को सुनने का अवसर नहीं मिला। आचार्य गोजीत साहेब के कमरों पर ताले रहे। 50-60 ग्रमीण महिलाएं भी थीं।
भोजन व्यवस्था – 11 जुलाई को भोजन में आटा-शक्कर के मालपूए, दाल एवं पकोड़े बनाये गये। हलवाई द्वारा सभी सामग्री बनाने में स्वच्छता का सामान्य ध्यान भी नहीं रखा। भोजन बनाने  और खिलाने की व्यवस्था ने पुरानी कथाओं में लिखीं बातें याद दिला दीं की दलित वर्ग के लोगों के लिए भोजन कैसे बनाया जाता था और किस तरह खिलाया जाता था। लोग-बाग पूड़ी की मांग करते देखे गए। मैं स्वयं भी दाल और पकोड़े से ही भूख की तृप्ति कर सका। भोजन खिलाने वाले स्वयंसेवकों का कार्य सराहनीय था। सभी को सम्मान और प्रेम से भोजन परोस रहे थे।
समारोह के समापन से पूर्व आचार्य गोजीत साहेब की समाधि स्थल पर भंडारा प्रबंधन व्यवस्था समिति द्वारा शिलालेख लगाते समय विवाद की स्थिति देखी गई।  शिलालेख नहीं लगाया जा सका।आचार्य गोजीत साहेब ने समष ॠषि गद्दी स्थान, बिचून की काया-कल्प कर दी। बहुत सराहनीय निर्माण कार्य कराये हैं। समाज बंधु उनके इन कार्यों की प्रशंसा करते देखे गये।
इस तरह के आयोजनों में समाज बंधु लाखों रुपयों के सहयोग देते हैं लेकिन इस राशि का समाज के शैक्षणिक, सामाजिक उन्नयन में कोई विशेष योगदान नहीं देखा जाता है। इस पर हमारे साधु-सन्तों बाबा लोगों को,सामाजिक पदाधिकारियों को विचार करना चाहिए।

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