आम जन का मीडिया
Before questioning on faith, the judges told the country about the circumstances of the Supreme Court

ईमान पर सवाल उठने से पहले जजों ने देश को बताए सुप्रीम कोर्ट के हालात

-प्रमोदपाल सिंह

देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने सुप्रीम कोर्ट के हालात को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जस्टिस जे चेलामेश्वर के घर के लॉन में हुई इस कॉन्फ्रेंस का मकसद यह जाहिर कर देना था कि आने वाले वक्त में कोई यह कह न दे की इन चार जजों ने अपनी अंतरआत्मा बेच दी’ थी। इन जजों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट नही बचा तो लोकतंत्र पर भी खतरा मंडराने वाला हैं। जब सरकार और चीफ जस्टिस ने उनकी बात नहीं सुनी तो देश की जनता के सामने अपनी बात रखनी पड़ी। इसके पीछे मूल भावना सुप्रीम कोर्ट के हालात की ओर इशारा करते हुए अपने आपको भविष्य में कलंकित होने से बचाने की रही। इस कॉन्फ्रेंस में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद वरिष्ठता क्रम के दूसरे नम्बर के जस्टिस चेलमेश्वर,तीसरे नम्बर के जस्टिस रंजन गोगोई,चौथे नम्बर के जस्टिस मदन लोकुर और पांचवे नम्बर के जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे।

इस दौरान चारों जजों ने एक पत्र भी जारी किया जिसमें लिखा कि मुख्य न्यायाधीश का पद समान स्तर के न्यायाधीशों में पहला होता है, न उससे कम और न उससे अधिक। सुप्रीम कोर्ट में सब ठीक नहीं हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि तय सिद्धांतों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश को रोस्टर तय करने का विशेषाधिकार होता है और वह कोर्ट के जजों या पीठों को सुनवाई के लिए मुकद्दमें आवंटित करता है। मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार अदालत के सुचारु रूप से कार्य संचालन एवं अनुशासन बनाये रखने के लिये है न कि मुख्य न्यायाधीश के अपने सहयोगी न्यायाधीशों पर अधिकारपूर्ण सर्वाेच्चता स्थापित करने के लिए।

कह सकते हैं कि चारों जज कितने मजबूर होकर प्रेस के सामने आए होगें? शायद इसके अतिरिक्त उनके पास कोई विकल्प ही नही रहा हो। ये चारों जज अपनी ईमानदारी, और न्यायपालिका के प्रति निष्ठा के लिए जाने जाते हैं। भविष्य में उन पर कोई अंगुली उठाए,यह उन्हें कताई बर्दाश्त नही था। लिहाजा उनकी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने देश का ध्यान खिंचा हैं। साथ ही अंदरूनी हालात ठीक नही होने के संकेत भी दिए। न्यायापालिका की गरिमा को देखते हुए व स्थितियों को असहज होने से बचाने के लिए वे नपातुला ही कह पाए। यह देश के सामने ऐतिहासिक्र,अभूतपूर्व व अप्रत्याशित घटना थी। जब एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में लोगों को अपनी न्याय तंत्र के शीर्ष पर बने हालात को सोचने-समझने का मौका मिला और जनता की सर्वोच्चता भी स्थापित हुई।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दुरगामी परिणाम क्या होगें। लेकिन जजों के आरोपों से निशाने पर आए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से मुलाकात की है। जजों के इन आरोपों के बाद केंद्र की मोदी सरकार इस मुद्दे पर वेट एंड वॉच की स्थिति में है। सीपीआई के सांसद डी राजा ने जस्टिस चेलमेश्वर से उनके आवास पर मुलाकात के बाद कहा कि जजों द्वारा उठाया गया कदम असाधारण है, और यह न्यायपालिका के गहरे संकट को दर्शाता है।

जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर राहुल गांधी ने अपने आवास पर कांग्रेस के सांसदों और वकीलों की बैठक की। कांग्रेेस से जुड़े वरिष्ठ वकिल सलमान खुर्शीद ने जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को काफी दुखद और दर्दनाक बताया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत भी इस तरह के तनाव से गुजर रही है और जजों को मीडिया से सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ रही है। इसके विपरित सरकारी उज्जवल निकम इसे काला दिन बताया और कहा कि यह गलत मिसाल बनेगी। रिटायर्ड जस्टिस आर एस सोढ़ी ने मीडिया से कहा है कि इन चारों जजों के खिलाफ महाभियोग चलाए जाए। रिटायर्ड जस्टिस आरएस सोढ़ी ने इन चारों जजों को पद से हटाया जाने की बात कही। इनके द्वारा फैसला सुनाना उचित नहीं है। वरिष्ठ वकील और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि जजों ने बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है. स्वामी ने कहा कि मुद्दे को उठाने वाले चारों जज बेहद ईमानदार हैं और उनकी मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में दखल देने की मांग की।

वरिष्ठ वकिल इंदिरा जयसिंह न्यायापालिका की आजादी को खतरे में बताया। उनका बड़ा सवाल यह हैं कि क्या कार्यपालिका न्यायपालिका में दखल कर रही है? उन्होंने नोट बंदी का केस अब तक नहीं लेने और आधार का मामला अब जाकर लेने को ’मनमर्जी’ कहा हैं। सीपीआई एम के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने इस मामले की पूरी जांच करने की मांग करते हुए कहा कि अदालत की आज़ादी और अखंडता में कैसे दखल दिया जा रहा है? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न्यायपालिका में केंद्र सरकार की दखलअंदाजी को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया हैं। गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने इसे संविधान के साथ छेड़छाड़ तक बताया है।

जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दबाव तो चौतरफा बना है।अब चीफ जस्टिस इस पर क्या कदम उठाते हैं? यह देखने वाली बात है। जस्टिस लोया की मौत का सच भी शायद अब सामने आ जाए। उम्मीद की जानी चाहिए।

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