आम जन का मीडिया
Baba Saheb was not Meghwal, Regar, Khatik or Bairwa !

बाबा साहब तो मेघवाल ,रेगर ,खटीक या बैरवा नहीं थे !

– मंगल पिण्डियार, गुगरियाली
हम लोग अपनी अपनी जातियों को मजबूत करने में लगे हुए हैं.बाबा साहब अम्बेडकर तो मेघवाल नहीं थे,रैगर नहीं थे,खटीक नहीं थे,जाटव नहीं थे,बैरवा नहीं थे,नायक,धाणक ,सांसी ,भंगी,पासी नहीं थे,लेकिन उन्होंने इन सभी को मेरा अपना समाज कह कर पुकारा . पुकारा ही नहीं बल्कि सभी के लिए संघर्ष भी किया एवं स्वयं की जाति के समान ही सभी को अधिकार दिलाने का काम किया और सभी को संगठित होने का संदेश देकर गए,लेकिन हमारे लोग तो बाबा साहब अम्बेडकर के विरुद्ध काम करने में अपनी शान समझते हैं ,अपनी-अपनी जातियों की महासभा बनाकर समाज को तोड़ने का काम कर रहे हैं ,फिर समाज मजबूत कहाँ से और कैसे होगा.
यदि हम लोग वास्तव मे बहुजन समाज को मजबूत बनाना चाहते हैं ,तो सबसे पहले जातियों के नाम पर बनाई हुई सभी महासभाओं को खत्म कर केवल बहुजन महासभा के बेनर तले आना ही होगा, उसमें सभी की एक ही जाति होगी और वह बहुजन जाति होगी।जब तक हमारे लोग अलग-अलग जातियों की महासभाओं में बंटे रहेंगे तब तक समाज मजबूत नहीं हो सकता है।हम लोग बाबा साहब अम्बेडकर का नाम लेते ज़रूर हैं लेकिन उनकी बातों पर अमल नहीं करते, क्योंकि हमनें बाबा साहब को समझने की कोशिश ही नहीं की।

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