जोधपुर के इंटर्न डॉक्टरों ने चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के खिलाफ नारे लगाए

(एस.पी.मित्तल)  स्टाइफंड की राशि बढ़ाने में रोड़ा बने हुए हैं रघु शर्माकोरोना काल में राजस्थान भर में फैल सकता है डॉक्टरों का आंदोलन।  राजस्थान के जोधपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी एमडीएम अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों ने 11 अक्टूबर को

चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा पर कांग्रेस के दलित विधायक बैरवा का गुस्सा फूटा

( अशफाक कायमखानी )राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खासमखास व विवादों मे रहने वाले चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा पर कठूमर से निर्वाचित कांग्रेस विधायक बाबूलाल बैरवा ने सीधे तौर पर ब्राह्मण बिरादरी से ही ताल्लुक रखने के कारण दलित

भीम आर्मी ने मंदिर को किया पाठशाला में तब्दील !

( सुरेश चंद्र मेघवंशी )कोरोना काल में जहां एक ओर बच्चो की पढ़ाई बाधित हो रही है , जिसके कारण बच्चे पढ़ाई से दूर हो रहे हैं, वहीं भीम आर्मी शंभूगढ़ ने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में अनूठी पहल करते हुये मंदिर को ही पाठशाला में तब्दील

‘नक्सली भाभी’ का सच !

( भंवर मेघवंशी )उत्तरप्रदेश के हाथरस ज़िले के बोलगढ़ी गाँव में एक दलित बालिका के साथ हुई हैवानियत और उसके बाद राज्य प्रायोजित अमानवीयता के घटना क्रम से सारा देश वाक़िफ़ है . जिसने भी इस दरिदंगी के बारे में सुना है , उनकी पीड़ितों के

यह कठपुतलियों के बोलने का समय है।

(डाॅ. रेणु व्यास )‘ये दुनिया है रंगमंच, हम हैं इसकी कठपुतलियाँ’ अगर इतना सा ही सच होता तो दुनिया-भर में कुछ ताक़तवर कठपुतलियाँ बाकी सभी को अपने इशारों पर न नचातीं। यानी शेक्सपियर को कहना चाहिए था - ये दुनिया अगर ‘रंगमंच’ है तो कुछ नचाने

रामदेव पीर की आध्यात्मिक धारा से अवगत कराती है यह किताब !

( पूरा राम ) डॉ कुसुम मेघवाल की 'मेघवाल बाबा रामदेव' पढ़ ही रहा था कि भंवर मेघवंशी की दो पुस्तकें 'कितनी कठपुतलियाँ' और 'महान समाज प्रचेता  रामदेव पीर' हस्तगत हुई . रामदेव जी के जीवन के संदर्भ में और जानने की उत्कंठा में इस पुस्तक को

जाति का अनुभव !

( विकास जाटव ) कई बार समूह चर्चा में यह सुनने को मिल जाता है की अब दलित राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के जज, प्रशासनिक अधिकारी, से लेकर काफी उच्च पद प्राप्त कर चुके है. इसलिए अब जातिवाद खत्म हो रहा है. समय बदल चूका है. लेकिन अगर कोई दलित

अपनी ही मिट्टी के लाल से परिचित करवाता है यह उपन्यास

( डॉ. गोविंद मेघवंशी ) सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक भंवर  मेघवंशी ने द्वारा लिखित कितनी कठपुतलियां उपन्यास इन दिनों पढ़ने का अवसर मिला . इसे लिखकर लेखक ने हमें शंकर सिंह जैसे ज़मीन से जुड़े एक आदर्श सामाजिक कार्यकर्ता से अपरिचित होने से

हाथरस की बेटी के साथ न्याय हो : जातीय गुंडों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो

( विद्या भूषण रावत )उत्तर प्रदेश के हाथरस में वाल्मीकि समाज की लड़की की जिस बेरहमी से बलात्कार के बाद ह्त्या की गयी है वह दिल दहला देने वाली है. वैसे यह घटना 14 सितम्बर को घटी और उसके बाद से ही लड़की के परिवार वाले भटक रहे थे के उसके साथ

चार दशक के अदम्य संघर्ष की कहानी है “कितनी कठपुतलियाँ”

( एस आर मेहरा ) “कितनी कठपुतलियाँ"में कठपुतलियाँ भले ही अनगिनत हों पर नायक शंकर सिंह जैसा वास्तविक और संघर्ष करने वाला हो और लेखक भंवर मेघवंशी जैसा बेबाक,निर्भिक,स्वतंत्र और जमीनीं स्तर का संजीदगी से भरा हो तो इन्हीं अनगिनत