पत्रकार कल्याण योजना का लाभ देश के सभी गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों को भी मिलेगा !

भारत सरकार ने हाल ही बनाई पत्रकार कल्याण योजना के अंतर्गत गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों को भी लाभ देने का प्रावधान रखा है । इस योजना का लाभ पीआईबी के जरिये उठाया जा सकता है । प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के पत्रकारों के लिए केंद्र सरकार

“दलित साहित्य” को “दलित साहित्य” ही कहिए,जनाब !

( डॉ. काली चरण स्नेही ) विमर्शों की दुनिया में "दलित विमर्श"अर्थात् "दलित साहित्य" का लगभग पिछले चार- पाँच-दशकों से परचम लहरा रहा है।बोधिसत्व बाबासाहब की वैचारिकी पर आधारित दलित समाज की अन्तर्वेदना-आक्रोश तथा उत्पीड़न,इच्छा-आकांक्षा को इस

मेरा धर्म मुझे चुनने दो !

(डॉ. राम पुनियानी) (स्वतंत्रता पर चोट हैं धर्म स्वातंत्र्य कानून) भारत का संविधान हम सब को अपने धर्म में आस्था रखने, उसका आचरण करने और उसका प्रचार करने का हक़ देता है. यदि कोई नागरिक किसी भी धर्म का पालन

बड़ा दिन, बड़ा दिल, बड़े लोग !

(डाॅ. महेश अग्रवाल)आज 25 दिसंबर को बड़ा दिन है। बड़ा दिन है तो प्रभु येशु का जन्मदिन, लेकिन हमारे यहां ये बड़ा दिन बड़े लोगों का दिन होता है, इस दिन बड़े लोग, बड़े फैसले करते हैं, बड़े दिल से करते हैं। लेकिन हमारे यहां बड़ा दिन किसी बड़े

कारसेवक और राम जन्मभूमि आंदोलन !

( पवन बौद्ध )देश में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के गुंबद को हटाया गया और आस्था के नाम पर हिंदू विश्व परिषद, बजरंग दल,विहिप,हिंदू महासभा,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश के कई युवाओं को जोशीले भाषणों, सभाओं के मध्य से अयोध्या जाने का

क्या कबीर, गोरख और नानक यही चाहते थे ?

 ( संजय श्रमण ) कबीर क्या अब भी गरीबों दलितों आदिवासियों के लिए क्रान्ति की मशाल बने हुए हैं? यह सवाल बहुत जटिल और खतरनाक है. इसका उत्तर खोजने की बड़ी इच्छा होती है. कबीर को मानने और जानने वालों से गहराई से चर्चा कीजिये तो पता चलता है

कोई सूरत नज़र नहीं आती, फिर भी कलम चल रही है !

( डॉक्टर दुर्गा प्रसाद अग्रवाल )लिखने पढ़ने का शौक रखने वालों के लिए किताबें जीवन का पर्याय होती हैं. वे इससे ज़्यादा कुछ नहीं चाहते कि उन्हें लगातार उम्दा किताबें मिलती रहें. किताबों का मिलना उनके छपने पर निर्भर है और छपना उनके लिखे जाने

बीजेपी के पूर्व विधायक कँवर लाल मीना को अकलेरा की अदालत द्वारा 3 साल की कारावास !

                                                                                                                                           जयपुर. 14 दिसम्बर, 2020 सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान, MKSS एवं PUCL को ख़ुशी है कि अंततः अकलेरा,

एस सी / एस टी एक्ट का सही क्रियान्वयन क्यों नहीं हो पा रहा है ?

 ( रक्षित परमार )आइए जानते हैं कि आखिर क्या ऐसी दुविधाएं हैं कि अनुसूचित जाति -जनजाति कानून इसके मूर्त रूप में नहीं आ पा रहा है  ? इसके पीछे बहुत से ऐसे कारण हैं जिनको जानना ज़रूरी हैं , सबसे पहला कारण शुरू होता हैं , स्थानीय पुलिस

मेवाड़ सालवी समाज युवा महासभा ने समाजजनों को रक्तदान शिविर में बढ़ चढकर भाग लेने का आह्वान किया

 (गोपाल मेघवंशी) मातृकुण्डियां आम मेवाड़ सालवी समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों ने 13 दिसम्बर रविवार को मातृकुण्डियां में आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर हेतु मेवाड़ के हरिद्वार मातृकुण्डियां से शिविर के व्यापक प्रचार-प्रसार की शुरूआत