स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

चित्तौड़गढ़-20 जून। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान ’संभावना’ ने अपने संरक्षक और सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना के नाम पर दिए जाने वाले वार्षिक सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं।  संभावना

कोविड- 19 और महाराष्ट्र में दूसरी लहर का प्रभाव

( तेजेंद्र कुमार मीणा ) भारत में और विशेष रूप से महाराष्ट्र में कोविड -19 की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर घातक प्रतीत होती दिख रही है। यह कोरोना वायरस की दूसरी लहर है जिससे भारत सामना कर रहा है, और इसका भयावह प्रभाव आर्थिक

दलित आक्रोश की भीममय भावाभिव्यक्ति हैं ‘सुलगते शब्द’

( मोहनलाल सोनल 'मनहंस' ) 65 साहित्यकारों की तकरीबन 156 कविताओं का 280 पृष्ठीय बहुत ही चेतनादायी काव्य संकलन है संपादक 'श्याम निर्मोही' संकलित 'सुलगते शब्द' जो पाठक मन में आक्रोश की अगन भरते हुए दलित समाज के साथ अतीत से होते आये जुल्म के

अस्पतालों ने ठुकराया लेकिन परिजनों की सेवा ने बचा लिया भैरू लाल को !

( डॉ गोविन्द मेघवंशी )आईये चलते हैं राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कांदा ग्राम में ,जहाँ अपने पिता को बचाने के लिए उनके बेटे राजेन्द्र मेघवंशी और दामाद रामस्वरूप मेघवंशी, पत्नी सीता देवी, अंकल रामप्रसाद मेघवंशी ने अपनी जान की परवाह किये

डॉ रणदीप गुलेरिया- भारत के सबसे ख़ाली डॉक्टर का नाम जो दिन भर टीवी पर रहते हैं !

( रवीश कुमार ) इस वक़्त भारत में दो तरह के डॉक्टर हैं। एक तरफ़ वो सैंकड़ों डॉक्टर हैं जो जान लगा कर मरीज़ों की जान बचा रहे हैं। दूसरी तरफ़ अकेले एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया हैं, जो टीवी पर आने के लिए दिन भर जान लगाए रहते हैं।

धार्मिक रुढ़िवाद से मुक्त होता रेगर समाज

( हेमंत कुमार )पांचुलाल जी तंवर (जाटोलिया) निवासी मेगड़दा ( हाल निवास- जयपुर) का निधन 28 अप्रैल को हो गया था,उनके निधन के बाद इनके पुत्र चिरंजीलाल जाटोलिया द्वारा समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किये गये जो बाह्राणवादी तथा संर्कीण

आस्था, राजनीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य: कोविड-19

                                             ( राम पुनियानी ) कोविड-19 की दूसरी और कहीं अधिक खतरनाक लहर पूरे देश में छा चुकी है. जहाँ मरीज़ और उनके परिजन बिस्तरों, ऑक्सीजन और आवश्यक दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं वहीं कोविड योद्धा इस कठिन

नहीं रहे टंकण और भाषा के उस्ताद सुभाष जी

 ( संजय जोशी )नवारुण को विस्तार देने के क्रम में जब 2018  में एक नये टाइपिस्ट की खोज चल रही थी तब बनास जन जे संपादक और मित्र पल्लव ने किन्ही सुभाष जी का नाम बहुत जोर देकर सुझाया.फिर राजीव कुमार पाल की किताब 'एका' से सुभाष जी से जो रिश्ता

पे बैक टू सोसाइटी: सर्व फॉर योर सोसाइटी

( पवन बौद्ध ) वर्तमान परिपेक्ष में रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य हर किसी व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकताओं में से एक है। आजादी से पहले आजादी के पश्चात देश में कई ऐसी श्रेणीगत असमानता, राजनीतिक स्तर का सामाजिक रवैया, वैचारिक विचारों