मनुवादियों के लिए अम्बेडकर घाटे का सौदा साबित हो रहे है !

- बी एल बौद्ध

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जिस प्रकार पशुओं की अथवा जमीन की सौदेबाजी की जाती है उसी प्रकार मनुवादी लोग बाबा साहेब अंबेडकर पर भी सौदेबाजी करते हैं जो राजनीति दल बाबा साहेब अंबेडकर को देशद्रोही कहते थे उन्होंने भी बाबा साहेब को फायदे का सौदा समझकर दाव लगाना शुरू कर दिया और अपने मंचो से बाबा साहेब का नाम लेना शुरू कर दिया साथ ही अपने बैनर एवं होर्डिंग में भी बाबा साहेब का चित्र लगाना शुरू कर दिया।

अभी अभी राजस्थान प्रदेश की भाजपा सरकार ने तो प्रदेश की सभी नगरपालिका मुख्यालयों पर डॉ अम्बेडकर भवन निर्माण के लिए बजट की घोषणा भी की है।लेकिन इतना सारा प्रयास करने के बाउजूद भी मनुवादी पार्टियों द्वारा डॉ अम्बेडकर पर लगाया हुआ दाव उल्टा ही पड़ता दिख रहा है और उन्हें नफे की बजाय नुकसान ही उठाना पड़ रहा है।

अब विचार करने वाली बात यह है कि मनुवादी पार्टियां बाबा साहेब अंबेडकर पर सौदेबाजी क्यों करती हैं और इस सौदे में उन्हें घाटा क्यों हो रहा है ? जैसा कि आप सब जानते हैं कि भारत में जितने भी नेता अथवा महापुरुष हुए हैं उनमें से सबसे ज्यादा लोकप्रिय बाबा साहेब अंबेडकर उभरकर सामने आए हैं साथ ही उनके करोड़ों अनुयायी तैयार हो चुके हैं इसलिये उन लोगों को यह लगता है कि यदि हम लोग डॉ अम्बेडकर पर दांव पेंच लगाते हैं तो हो सकता है बाबा साहेब के करोड़ों अनुयायियों का रूझान भी हमारी पार्टी की ओर बढ़ जाये।

लेकिन बहुजन समाज के युवा बड़ी समझदारी दिखा रहे हैं और वे अच्छी तरह समझ रहे हैं कि वे लोग बाबा साहेब के नाम पर हमारे वोटों को हड़पने का षड्यंत्र रच रहे हैं क्योंकि यदि वे सच में ही बाबा साहेब अंबेडकर को स्वीकार करते तो सबसे पहले बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा को अपनाते परन्तु ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाता है बल्कि इसके विपरीत जाकर बाबा साहेब अंबेडकर के साहित्य को छपने से रोका जा रहा है और केवल रोका ही नहीं जा रहा है बल्कि बाजार से गायब भी करवाया जा रहा है।

अभी कुछ दिनों पहले ही गुजरात सरकार ने स्कूलों से बाबा साहेब अंबेडकर के साहित्य को यह कहकर हटवा दिया कि इससे हिंदुओं की भावना को ठेस पहुंच रही है। भाजपा सरकार ने इससे पहले बाबा साहेब अंबेडकर का करोड़ों रुपये का साहित्य इसलिये कण्डम स्टोर में डाल दिया था क्योंकि उनमें बाबा साहेब अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं छप गई थी।

मनुवादी लोगों को यह मालूम होना चाहिए कि डॉ अम्बेडकर अकेला नहीं है बल्कि उनके साथ विशाल साहित्य का भंडार भी है और आप लोग उनकी फोटो में अम्बेडकर को देखते हो जबकि उनके अनुयायी साहित्य में बाबा साहेब को देखते हैं। मनुवादी लोग है कि बाबा साहेब अंबेडकर के साहित्य को स्वीकार नहीं करते हैं, जबकि बाबा साहेब अंबेडकर के अनुयायी साहित्य को छोड़ नहीं सकते हैं इसीलिये डॉ अम्बेडकर मनुवादियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

राजस्थान प्रदेश के अम्बेडकरवादियों ने यह सिध्द कर दिया है कि बाबा साहेब के नाम पर अब हमें बरगलाया नहीं जा सकता है इसलिए राजस्थान में अब डॉ अम्बेडकर को छोड़कर अर्जुन राम जी मेघवाल को हाईलाइट करने की रणनीति बनाई जा रही है। लेकिन इतना तो निश्चित है कि मनुवादियों की कोई भी चाल अथवा रणनीति को अब भीम सैनिक सफल नहीं होने देंगे।

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