आखिर सोशल मीडिया से भाजपा इतना क्यों घबरा रही है ?

- एस.पी.मित्तल

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केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की धमकी के बाद 22 मार्च को फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से माफी मांगी ली है। जुकरबर्ग हिन्दुस्तान से अरबों रुपए कमा रहे हैै। इसलिए माफी का मामला अलग है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर 21 राज्यों और केन्द्र में सरकार चलाने वाली भाजपा सोशल मीडिया से इतनी घबराई हुई क्यों हैं?

फेसबुक के मालिक जुकरबर्ग पर आरोप है कि पहले बिहार और फिर पंजाब और गुजरात के विधानसभा चुनावों में एक ब्रिटिश कंपनी को फेसबुक यूजर्स का डाटा चोरी से दे दिया। इस कंपनी ने फेसबुक के यूजर्स का डाटा कांग्रेस को दिया। चुनावों में पंजाब और बिहार में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और गुजरात में 180 सीटों से कांग्रेस को 80 से ज्यादा सीटें मिल गई। खबर है कि अब 2019 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस फेसबुक के माध्यम से जीत हासिल करना चाहती है। इसलिए केन्द्रीय मंत्री ने फेसबुक को धमकी दे दी।

हालांकि फेसबुक के द्वारा यूजर्स का डाटा देना अनैतिक है, लेकिन भाजपा की घबराहट बता रही है कि अब सूचनाओं के प्रसारण में प्रिंट और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया से ज्यादा ताकतवर सोशल मीडिया हो गया है। कोई भी सरकार विज्ञापनों का डर दिखा कर प्रिंट और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया को काबू कर सकती है। लेकिन सोशल मीडिया को नहीं।

2014 में लोकसभा के चुनाव के समय जब केन्द्र में यूपीए की सरकार थी तो प्रिंट और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया के हालातों को देखते हुए भाजपा ने अपना कैम्पीयन सोशल मीडिया पर ही केन्द्रित रखा। तब भाजपा को सोशल मीडिया बहुत पसंद आया। सोशल मीडिया की वजह से ही भाजपा को केन्द्र में पूर्ण बहुमत मिला गया। यानि जो भाजपा सोशल मीडिया के दम पर सत्ता में आई, अब वो ही सोशल मीडिया से घबरा रही है।

भाजपा को फेसबुक को धमकाने के बजाए उन कारणों का पता लगाना चाहिए जिसमें फेसबुक के यूजर्स नाराज हैं। भाजपा देश की ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। स्वाभाविक है कि भारत में सबसे ज्यादा यूजर्स भाजपा के कार्यकर्ता ही होंगे। सोशल मीडिया से जुड़े लोग बेहद समझदार और बुद्धिमान हैं। ऐसे में कोई राजनीतिक दल डाटा चुरा कर दुरुपयोग नहीं कर सकता। यदि सरकार अच्छे कार्य कर रही है तो सोशल मीडिया पर अपने आप प्रचार होगा। कोई गुमराह करना चाहेगा तो भी नहीं होगा। अच्छा हो कि भाजपा अपनी राज्य सरकारों की खामियों को दूर करें।

यदि सत्ता के नशे में सोशल मीडिया पर घमंड परोसा जाएगा तो फिर भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं होंगे। सरकार माने या नहीं, लेकिन आज भी कांग्रेस के मुकाबले भाजपा के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय हैं। ये बात अलग है कि अब भाजपा विचार धारा वाले यूजर्स ही सरकार की खिंचाई कर रहे हैं।

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार है )

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