आखिर फलोदी के सवर्ण हिन्दू संगठनों को दलित आदिवासियों से इतनी चिढ क्यों है ?

राजस्थान में जारी दलित आदिवासी दमन की दास्तान – 9

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जोधपुर जिले के फलोदी उपखंड मुख्यालय पर 2 अप्रेल के भारत बंद के दौरान अम्बेडकर सर्कल पर करीब 12 बजे एक शांतिपूर्ण सभा चल रही थी ,जिसमें 5 हजार लोग शामिल थे ,कस्बे का माहौल पहले से ही तनावपूर्ण होने के कारण दलित आदिवासी संगठनों ने यहाँ पर बंद का आह्वान नहीं किया था ,सिर्फ रैली निकालते हुये ज्ञापन देने का ही निश्चय किया गया ,इसकी भी समय रहते सूचना एसडीएम और थानाधिकारी फलोदी को दे दी गई .

शांतिपूर्ण सभा के आयोजकों को खबर मिली कि दलित आदिवासी समुदाय की प्रस्तावित रैली को रोकने तथा उस पर हमला करने की तैयारी में सैंकड़ों लोग हाथों में सरिये ,लाठियां ,हथोड़े आदि ले कर बिजलीघर चौराहे पर इकट्ठा हो रहे है,अगर ऐसी स्थिति में रैली की जायेगी तो टकराव होना संभव है ,इसलिए आयोजकों ने किसी भी तरह का टकराव टालते हुये रैली को तुरंत ही स्थगित करने का निर्णय लिया और उप जिला कलेक्टर को सभा स्थल पर ही बुला कर ज्ञापन सौंप दिया .

जैसे ही इसकी खबर जातिवादी कट्टरपंथी समूह के लोगों को मिली ,वे आक्रोशित हो गये और असामाजिक तत्वों की उग्र भीड़ नगरपालिका से अम्बेडकर सर्कल जाने वाली रोड की ओर बढ़ने लगी ,इनके हाथों में हथियार थे और गले में भगवा गमछे ,पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यह भीड़ दलित आदिवासियों की शांतिपूर्ण सभा की ओर बढ़ी और उन्होंने ‘ नीम कड़वा है – भीम भडवा है ‘ जैसे अपमानजनक नारे लगाते हुये अम्बेडकर प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करना शुरू कर दिया ,उन्होंने बाबा साहब की प्रतिमा के नाक ,कान और चश्मे को नुकसान पंहुचा दिया , आक्रोशित दलितों ने जबइसका प्रतिवाद किया तो ये हथियारों से लेश लोग निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर भी टूट पड़े ,उन्हें ‘नीच ,कमीण ,ढेढ़’ आदि गालियाँ देते हुये मारने पीटने लगे ,टेन्ट तोड़ दिये. पुलिस प्रारम्भ में तो मूकदर्शक रही ,फिर उसने भी दलित आदिवासियों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया .

स्थानीय पुलिस ने शांतिपूर्ण सभा में मौजूद लोगों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे ,जिससे वहां अफरातफरी मच गई ,तीतर बीतर होते लोगों को निशाना बना कर सवर्ण जातिवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने दौड़ा दौड़ा कर मारा ,जिससे कईं लोग चोटिल हो गये .

दलित अधिकार अभियान ,पश्चिमी राजस्थान द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गये ज्ञापन में बताया गया कि – 2 अप्रेल को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक फलोदी कस्बे के विभिन्न क्षेत्रों में दलित आदिवासी समुदाय के दर्जनों लोगों पर करणी सेना ,विश्व हिन्दू परिषद तथा बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मारपीट की ,घरों में घुस कर हमले किये ,मोटर साईकिलें तोड़ी और जमकर जातिगत गाली गलौज किया .

पूर्व सरपंच दुर्गादेवी द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक 2 अप्रेल की शाम 4 बजे बाद 10-15 लोग भगवा कपड़ा मुंह पर बांध कर आये और घर में घुस कर तोड़ फोड़ की ,उन्होंने घर के अंदर लगे बाबा साहब के पोस्टर को काट डाला ,फिर हल्ला मचने से मोहल्ले के लोगों के आ जाने से करणी सेना के ये लोग भाग गये .

यह चिंतनीय प्रश्न है कि दलित समुदाय के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस की शह से कतिपय जातिवादी संगठनों के हथियारों से लेश लोग हमला करते है ,दर्जनों लोगों को घायल कर देते है ,संपत्ति को नुकसान पंहुचाते है ,महिलाओं को अपमानित करते है ,जातिगत अपमानित करने का नंगा नाच करते है ,लेकिन पुलिस प्रशासन उनके खिलाफ दी गई 8 रिपोर्ट्स में से सिर्फ 4 दर्ज करता है ,जबकि पीड़ित दलितों के खिलाफ संगीन धाराओं में 46 लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किये जाते है ,यह पुलिस की एकतरफा ,पूर्वाग्रहग्रस्त मानसिकता की पराकाष्ठा ही है कि जिन समूहों और लोगों ने हमले किये ,उनका बचाव किया गया और जो लोग हमलों के शिकार बने ,उन्हीं को उल्टा फंसाया गया .

आखिर फलोदी के सवर्ण हिन्दू संगठनों को दलित आदिवासियों से इतनी चिढ क्यों है ? क्या उन्हें अपनी बात कहने का हक़ नहीं है ,क्या उन्हें अपने अधिकार बचाने के लिये सड़कों पर आने के लिये सवर्ण जातिवादी तत्वों से परमिशन लेनी चाहिए ,क्या उन्हें अब जातीय सेनाओं के रहमोकरम पर जीना पड़ेगा ? आखिर कैसा अराजक माहौल बना रखा है ,क्या प्रोब्लम हो गई बाजार की ताकतों को ? जब फलोदी में बंद ही नहीं करवाया गया ,रैली ही नहीं निकाली गई ,कुछ भी नहीं किया गया ,तब क्या दिक्कत हुई सवर्ण हिन्दू समुदाय को ? क्या मीटिंग भी नहीं करे दलित आदिवासी ? ज्ञापन भी ना दें ? बाबा साहब की जय भी नहीं बोले ?

जिस तरह की हिंसा और प्रतिहिंसा का खेल फलोदी में पुलिस और जातिवादी सवर्ण हिन्दू समूहों ने खेला ,वह ऑंखें खोलने वाला है ,भगवा कपड़ा मुंह पर बांध कर और गलों में लटका कर बाबा साहब को गालियाँ देते हुये जिस तरह की नफरत का इज़हार उस दिन कथित उच्च जाति के हिन्दू समुदाय ने किया ,वह नाकाबिले बर्दाश्त है ? करणी सेना ,बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद् के लोग आखिर दलित आदिवासियों को सबक सिखाने पर क्यों तुले हुये है ,आखिर क्यों वे दलित आदिवासियों को दबा कर रखना चाहते है ? उन्हें बाबा साहब अम्बेडकर ,जय भीम के नारे और नीले झंडे से इतनी घृणा क्यों है ?

फलोदी पुलिस की भूमिका इतनी दलित विरोधी क्यों है ? क्यों राज्य का दमनकारी चरित्र इतने नंगे रूप में सामने आ रहा है ? ज़िम्मेदार पुलिस अधिकारी क्यों इतने गैर जिम्मेदाराना बयान दे रहे है ? किसके इशारों पर मुकदमों में दलित आदिवासी समुदाय के तमाम जागरूक लोगों को निशाना बना कर नामजद किया गया है ?

दलित आदिवासी कार्यकर्ताओं की हिटलिस्ट कहाँ बनाई गई है ? वो कौनसी ताकते है जो दलित आदिवासी समुदाय को नेस्तनाबूद करने की साजिशें रच रही है ? इन दलित आदिवासी विरोधी शक्तियों की शिनाख्त जरुरी है और इनका सम्पूर्ण बहिष्कार भी करना होगा ,इनको दान और मान देना पूरी तरह से बंद करना होगा ,इनका राजनितिक रूप से उन्मूलन भी आवश्यक है .

जो जो जातियां अन्याय अत्याचार कर रही है ,उनको एक भी वोट किसी भी स्तर के चुनाव में नहीं देने की कसम खानी होगी ,जो जो संगठन इस जुल्म में शरीके गुनाह है ,उनकी पहचान करके उनसे पूर्णत अलग रहना होगा .

फलोदी में हिन्दू संगठनों के दलित आदिवासी विरोधी रवैय्ये ने इस बात को साबित कर दिया है कि उनका ‘हिन्दू हिन्दू -भाई भाई’ का नारा फर्जी है ,यह नारा अब इस तरह है – ‘ सवर्ण हिन्दू – भाई भाई ‘उनका बंधुत्व सिर्फ और सिर्फ सवर्ण समुदाय के लिये है ,दलित आदिवासियों के प्रति उनकी शास्वत घृणा में रत्ती भर में अंतर नहीं आया है .

उनकी समरसता की बातें ,उनकी भगवा मुलाकातें और बाबा साहब को राष्ट्र ऋषि बनाने की साजिशें और 14 अप्रेल के पथ संचलन सब भुलावे के लिये है ,वे चाहते है कि सवर्ण हिन्दू समाज और उनके अतिवादी कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हमारे अस्तित्व को मिटाए जाने के सारे षड्यंत्रों को भूल कर हम मुसलमानों को अपना दुश्मन माने और उनसे लड़ कर ख़त्म हो जाये !
क्या हमें ऐसा आत्मघाती हिंदुत्व मंजूर होना चाहिए ?

– भंवर मेघवंशी
( स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता )

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