अभिरंग का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

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नाटक दार्शनिक सम्बद्धता के साथ जीवन से संवाद – प्रो आशुतोष मोहन
दिल्ली। ‘नाटक दार्शनिक सम्बद्धता के साथ जीवन से संवाद है। यदि हम यथार्थ से आगे का जीवन देखना -समझना चाहते हैं तो हमें रंगमंच की तरफ जाना ही होगा।’ गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो आशुतोष मोहन ने उक्त  विचार अभिरंग के दीक्षांत समारोह में व्यक्त किये। हिन्दू कालेज की हिंदी नाट्य संस्था के दीक्षांत समारोह में प्रो मोहन ने कहा कि कला को जानना, समझना और जीवन में उतारना बहुत कठिन है किन्तु हमने इसके लिए सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए। समारोह के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध अभिनेता और रंगकर्मी अनूप त्रिवेदी ने अपने गुरु हबीब तनवीर के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि रंगमंच पढ़ने से ज्यादा करने की कला है। उन्होंने हिन्दू कालेज की रंग गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि इस अभ्यास से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में निश्चित ही सकारात्मक परिवर्तन आऐंगे। त्रिवेदी ने असग़र वजाहत के प्रसिद्ध नाटक ‘जस लाहौर नी वेख्या’ से एक ग़ज़ल भी गाकर सुनाई।
इससे पहले अभिरंग के परामर्शदाता डॉ पल्लव ने सत्र 2018 -19 की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एक नाटक, एक नुक्कड़ नाटक के साथ सत्र में शैक्षिक और सह शैक्षणिक गतिविधियों में भी अभिरंग की सक्रियता बनी रही। अभिरंग द्वारा मंचित नाटक ‘जात जात की बात’ के निर्देशक हिरण्य हिमकर ने राहुल सहाय और काजल साहू को इस सत्र के श्रेष्ठ अभिनेता और अभिनेत्री का पुरस्कार दिया। विदा ले रहे विद्यार्थियों को डॉ धर्मेंद्र और डॉ नौशाद ने स्मृति चिह्न भेंट किये। समारोह में अभिरंग से जुड़े पुराने विद्यार्थी तथा शिक्षक भी उपस्थित थे। अंत में सचिव विकाश मौर्य ने सभी का आभार व्यक्त किया।
फोटो- पीयूष पुष्पम
रिपोर्ट – अजीत यादव

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