एक बाप का ’हैवान’ हो जाना

-प्रमोदपाल सिंह

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जिसने भी वायरल वीडियो देखा होगा। उसकी रूह कांप गई होगी। पांच छोटे-छोटे बच्चों का बाप आखिर अपने बच्चों के साथ इतनी हैवानियत से कैसे पेश आ सकता हैं? एक बाप से ज्यादा बेहतर बच्चों की परवरिश कर भी कौन सकता है? लेकिन अपने बच्चे को रस्सी से लटकाकर यातना दे रहे इस बाप को देखकर तो ’परवरिश’ शब्द ही अपना अर्थ खो देता हैं। जिन बच्चों की रगों में इस बेरहम बाप का खून दौड़ रहा है, उसी ने इन मासूम बच्चों को इस कदर बेरहमी के साथ पीटा कि दोनों बच्चे पिटते-पिटते अधमरे हो गए।

बेरहम बाप के हाथों पिटते इन बच्चों के कसूर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये मासूम अभी तक शायद अपना नाम भी ठीक तरह से नहीं बोल पाते होंगे। महज बिस्तर पर पेशाब कर देने से यह बाप हैवानियत पर उतर आया। अपने बाप के हाथों पिटते ये मासूम महज रो-रोकर अपना दर्द बयां करते रहे, जिसे ना तो इस बेरहम बाप ने सुना और ना ही किसी और ने।

मामला राजसमंद जिले के देवगढ़ थानाक्षेत्र के फुतिया का थड़ बस्ती का हैं। वीडियों में एक बाप अपनी झौपड़ी के छप्पर से चार साल के बच्चें को रस्से से लटकाकर पिटे जा रहा हैं। उसकी पिटाई से रो रहे बच्ची को भी वह पिट रहा हैं। एक ओर बच्ची भी दिखाई दे रही हैं। जो रस्सी से लटकते-तड़फते भाई पर तरस खा कर उसकी तरफ ब़ढ़ती जा रही हैं।

दो तीन दिन पुराने वीडियो के मंगलवार सवेरे वायरल होते ही सोशल मीडिया में इस हैवान बाप के खिलाफ लोगों में आक्रोश बढ़ गया। इसी के साथ राजसमंद का पुलिस-प्रशासन हरकत में आ गया। देवगढ़ पुलिस ने क्रुर बाप चैनसिंह रावत को गिरफ्तार कर लिया। घटना के वक्त बच्चों की मां पीहर गई हुई थी। अब इस पूरे मामले में वीडियो बनाने वाले पर पुलिस की पूरी नजर हैं। कहा गया कि उसने बच्चों को बचाने की बजाय वीडियो बनाया और वायरल भी कर दिया। पुलिस ने पता लगाया कि बच्चों के चाचा बन्नासिंह ने यह वीडियों बनाया था।

शायद यह रोज-रोज का मामला रहा होगा। बच्चों के चाचा बन्नासिंह के बस में नही रहा होगा अपने निर्दयी भाई को समझाना। इसलिए यह तरिका सूझा हो। बच्चों की मां भी इसे सामान्य बात बता रही हैं। बेरहम बाप आए दिन बच्चों को पिटता रहता हैं।

इस मामले को राज्य बाल अधिकार आयोग ने गंभीरता से लेते हुए प्रसंज्ञान लिया है। चतुर्वेदी ने राजसमंद की बाल कल्याण समिति को भी मौके पर जांच के लिए भेजा है। चतुर्वेदी ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से बच्चों की मन पर बुरा असर पड़ता है। आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को उनके व्यवहार के अनुसार समझाए,अपना गुस्सा बच्चो पर नहीं उतारे।

अक्सर मां-बाप अपने बच्चों की हिफाजत व सही परवरिश करने की खातिर नजदीक परिजनों को भी सुपर्द करने से भी कतराते है। बच्चे भी अपने माता-पिता के पास ही अपनी सुरक्षा महसूस करते है। तब एक बाप अपनी जिम्मेदारी से कोसों दूर मासूम बच्चों को इस कदर सजा दे रहा है कि देखने वाला सिहर जाए। तब एक बाप में ’राक्षस’ नजर आने लगता है। इस ‘राक्षसवृत्ति’ के मनोविज्ञान को समझ कर इसके निदान की दिशा में भी सरकार को ठोस उपाय करने की जरूरत हैं।

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