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 जवाबदेही यात्रा ने 20 दिसम्बर, 2021 से 6 जनवरी, 2022 तक 13 जिलों का सफर किया

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कोविड के बढ़ते मामलों के कारण यात्रा स्थगित, जवाबदेही क़ानून के लिए आंदोलन जारी रहेगा; अरुणा रॉय 

प्रदेश में जवाबदेही कानून के लिए बड़ा जनसमर्थन i सरकार बजट सत्र में हर सूरत में  कानून पारित करे : निखिल डे  

जयपुर , 7 जनवरी 2022- सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान राजस्थान के बैनर  तले सौ से भी अधिक जन-संगठनों, अभियानों, नागरिक संगठनों/समूहों आदि के साथ एक 45-दिवसीय जवाबदेही यात्रा निकाली जा रही है, जिसकी राज्य के सभी 33 ज़िलों में जाने की योजना थी। पिछले 17 दिनों के दौरान जिन 13 ज़िलों में यात्रा गई है वहाँ इसे भारी जन-समर्थन मिला है। इस दौरान यात्रा कोविड नियमों/दिशा-निर्देशों की सावधानी-पूर्वक पालना के साथ चलती रही है। लेकिन हाल के नए वेरीएंट के तेज़ी से फैलने की वजह से स्थिति अनिश्चित और चिंताजनक हो गई है। राजस्थान सरकार ने भी एक प्रोटोकॉल की घोषणा की है और लोगों भारी-भीड़ से बचने की सलाह दी है।

हमारी अपनी चिंताओं और ज़िम्मेदार संगठनों और व्यक्तियों के तौर पर अपने कर्तव्य को देखते हुए हमने तय किया है कि जन-केंद्रित जवाबदेही क़ानून की पैरवी करने के लिए हम कोई और रास्ता निकालें और ऐसा करते समय यह भी ध्यान रखें कि कोविड का और ज़्यादा फैलाव ना हो इसीलिए हमने जवाबदेही यात्रा को अस्थाई तौर पर स्थगित करने का निर्णय लिया है, लेकिन हम स्पष्ट करना चाहते कि जवाबदेही कानून के लिए ये आन्दोलन जारी रहेगा और इसके लिए नए तरीके खोजे जायेंगे.  

जवाबदेही क़ानून को पारित आगामी विधान सभा सत्र में किया जाए : मांग दस सालों से हो रही है

यद्यपि, यात्रा के हमारे अनुभव को देखते हुए हम राजस्थान विधानसभा के 2022 के बजट सत्र में जवाबदेही क़ानून को पारित किए जाने की माँग के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। यह वादा राजस्थान कांग्रेस कमेटी ने अपने 2018 के चुनावी घोषणा पत्र में किया था और मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने 2019 के बजट भाषण में इसे दोहराया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने राम लुभाया पूर्व आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में समिति बनाई, जिसने कानूनी मसौदा महीने में प्रस्तुत किया, लेकिन आज दिन तक वह कानून को विधानसभा के पटल पर पेश नहीं किया।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान की जनता विगत 10 साल से जवाबदेही कानून की मांग को लेकर आंदोलनरत है. वर्ष 2015-16 में एस.आर. अभियान द्वारा राजस्थान के सभी 33 जिलों में 100 दिन की पहली जवाबदेही यात्रा निकाली गयी थी। यात्रा के दौरान अभियान द्वारा लगभग 10,000 शिकायतों का पंजीकरण किया गया जिसमें राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर भी डाला गया था और उनका पीछा किया गया था, इसके बाद जयपुर में 22 दिन का जवाबदेही धरना लगाया गया और सरकार से तुरंत यह कानून पारित करने की मांग की गई ताकि लाखों लोगों के मूलभूत अधिकारों के हो रहे उल्लंघन को रोका जा सके। 

 13 जिलों से एक ही मांग की मजबूत जवाबदेही कानून चाहिए

20 दिसंबर 2021 से जयपुर से शुरू हुई द्वितीय जवाबदेही यात्रा के दौरान विभिन्न जिला मुख्यालयों पर जवाबदेही यात्रा गई है तथा इस दौरान राज्य भर से जवाबदेही क़ानून पारित किए जाने के अनुरोध वाले पोस्टकार्ड राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को उन अनेक लोगों के द्वारा भेजे जा रहे हैं जो पूरे राज्य में इस यात्रा को समर्थन दे रहे हैं। हर ज़िले में हमने छोटी-बड़ी नुक्कड़ सभाएं की। ज़िला मुख्यालय/क़स्बों में रैलियां, गांवों और बस्तियों में शिक़ायत निवारण के शिविर, ज़िला मुख्यालयों पर ज़िला कलक्टरों और विभिन्न सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़े ज़िला-स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठकें आदि की हैं। इस सबसे हमारा यह विश्वास और गहरा हुआ है कि एक मज़बूत और प्रभावी सामाजिक जवाबदेही क़ानून की बहुत ज़रूरत है। हमें सैकड़ों ऐसे लोग मिले जो बेसब्री से अपने विधि-सम्मत अधिकारों के साकार होने की राह देख रहे हैं। इनमें जीवनयापन से जुड़े बुनियादी मुद्दों जैसे राशन, पेंशन, मनरेगा में काम, वन अधिकार क़ानून के तहत व्यक्तिगत या सामुदायिक पट्टे, सिलिकोसिस में राहत-राशि, घुमंतू समुदायों के पट्टे आदि के साथ ही आधारभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं।

 योजनाओं के क्रियान्वयन में कर्मचारी / अधिकारी द्वारा कोताही बरतना

यात्रा के दौरान यह अनुभव हुआ है कि जनता के हित में सरकार द्वारा अधिकाधिक योजनाएं बनाने के संकल्प के बावजूद जब तक लोगों के हाथ में इन योजनाओं के उचित क्रियान्वयन की देखरेख और निगरानी का अधिकार नहीं होगा तब तक यह योजनाएँ ठीक से काम नहीं करेंगी। इसका कारण सरकारी कर्मचारियों, अधिकारीयों और जन प्रतिनिधियों का अपने दायित्व का पालन करने में अकुशल, असफल और संवेदनहीन होना भी है। ऐसे में बेहतरीन काम करने वाले चुनिंदा सरकारी कर्मचारियों पर बोझ बहुत अधिक बढ़ जाता है और वे यह भार उठा पाने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए हमारा मानना है कि सिर्फ़ प्रभावी डिजिटल व्यवस्थाओं और प्रतिबद्ध कर्मचारियों के होने मात्र से ही उचित क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं होगा और जवाबदेही तय नहीं होगी। इसलिए बहुत जरुरी है कि प्रभावी जवाबदेही क़ानून लागू किया जाये.

यात्रा में सब जगह आरटीआई कार्यकर्ताओं को मिल रही धमकियों पर बात हुई I बाड़मेर में जिस कदर rti कार्यकराओं पर लगातार धमकियाँ मिलन व जिस तरह के  हमले हो रहे है, अमरा राम के साथ जो 21 दिसम्बर को गिड़ा थाना इलाके में हुआ, वह हर जगह चर्चा में था और सभी हमलावरों की गिरफ़्तारी की मांग भी की गई  I इससे अभियान को स्पष्ट हुआ है की जवाबदेही व्यवस्था तय करने के लिए जरूरी है की शिकायत कर्ताओं की सुरक्षा जवादेही कानून में ही सुनिश्चित हो और हमलावरों के अवैध कामों की भी विस्तृत जांच हो I

 यात्रा ने किया 13 जिलों का सफर

20 दिसम्बर को जयपुर से प्रस्थान कर जवाबदेही यात्रा अजमेर, राजसमंद, पाली, जालोर, सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूंदी होते हुये आज कोटा में यात्रा के प्रथम चरण को स्थगित किया जा रहा है.

 13 में से 12 जिलों में जिला प्रशासन के साथ बैठकें हुई और जवाबदेही पर बात हुई

अजमेर, राजसमंद, पाली, जालौर, सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और बूंदी में जिला प्रशासन के साथ आम जन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लंबी चर्चाएं हुई।  जिलों के ज़िला कलेक्टर्स और अन्य ज़िला अधिकारियों द्वारा हर दिन जवाबदेही यात्रा समूह के साथ एक से डेढ़ घंटे की मीटिंग करके आम जनता के मसलों को सुना, कईं मामलों में त्वरित निस्तारण के लिए भी दिशा निर्देश जारी किए, इसके लिए ज़िला प्रशासन का भी हम धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। 

कुल शिकायतें जो यात्रा में दर्ज हुई

कुल मिल कर इन सभी जिलों में  2366 शिकायतें यात्रा में दर्ज हुई I इसके साथ 1903 संपर्क पोर्टल पर दर्ज की गई I संपर्क पोर्टल के हिसाब से 123 विभिन्न विभागों ने निस्तारण कर दी हैं I जिसमे 53 में कुछ हल निकल लेकिन 70 शिकायतों को निरस्त किया I (संलग्न परिशिष्ठ 1) कुछ शिकायतों का उल्लेख परिशिष्ठ में भी है I

पेंशन के मामलों के निस्तारण में त्रुटियां 

 पेंशन ना मिलने  को लेकर भी  शिकायतें दर्ज हुई I यात्रियों ने जब इसकी छान बिन की तो मालूम पड़ा की, राजस्थान सोशल सिक्युरिटी पेंशन पोर्टल (Rajssp) के मुताबिक कुल पेंशन जो निरस्त  (cancel) कर दी गई वह 20 लाख के ऊपर है (20,05612) , हैरानी की बात है की 1,22,192 लोगों की पेंशन अस्थाई रूप से रोक दी है, क्योंकि उनका वार्षिक सत्यापन नही हो पाया व बैंक के विवरण में कुछ त्रुटियाँ थी I

यात्रा में निर्णय  लिया गए की सरकार की तरफ स निर्देश जाना चाहिए की हर ग्राम विकास अधिकारी को एक समय सीमा में यह रुकी हुई पेंशन का सत्यापन कर त्वरित निस्तारण करे

यात्रा ने 17 दिन में 2,417 किलोमीटर की दूरी तय की

विगत 17 दिनों में 14 जिलों में 2,917 हज़ार किलोमीटर की यात्रा की गई, जिसमें दर्जनों टोल नाके आये, सभी टोल कम्पनियों ने जवाबदेही यात्रा के लिए टोल शुल्क माफ़ करके  सहयोग दिया, उनको भी यात्रा की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है, राज्य शासन, पुलिस तथा सरकार, जनता और मीडिया सहित हर तरफ़ से इस आंदोलन को समर्थन मिला, जिसके लिए हम तहे दिल से आभारी है.

पुलिस प्रशासन ने भी एक दो जगह छोड़कर सहयोगी रहा

एक या दो कटु अनुभवों को छोड़ कर बाक़ी जगह पर पुलिस प्रशासन का रवैया सहयोगात्मक रहा, क़ानून और व्यवस्था बनाने तथा यात्रा को सुरक्षा देने के लिए राजस्थान पुलिस  का भी धन्यवाद.

लोक कलाकारों ने जन जागरूकता में निभाई अहम भूमिका

राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से आए पारंपरिक लोक कलाकारों ने यात्रा से पूर्व दस दिवसीय शिविर करके जवाबदेही आंदोलन के पक्ष में नारे, गीत, नाटक रचे और निस्वार्थ भाव से यात्रा के साथ चलते हुए उनको प्रस्तुत करके जन जागरण किया, लोकनाद समूह के विनय व चारूल ने आंदोलन के लिए गीत लिखा. भीलवाड़ा में हरीश पंवार और उनके साथी आए तथा उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जिससे यात्रा को बहुत बल मिला है.

राज्य के विभिन्न नागरिक संगठनों ने यात्रा के रहने खाने और ठहराने की व्यवस्था की

यात्रा के दौरान विभिन्न व्यक्तियों, समूहों और नागरिक संगठनों ने रहने और खाने के लिए व्यवस्थाएं प्रदान की, हम उनका भी तहे दिल से धन्यवाद देते हैं। 

इस दौरान यात्रा को 123595 रुपये का चौराहे चौराहे पर जन सहयोग मिला

यह पूरी यात्रा जन सहयोग से चल रही है, इस दौरान झोली फैलाने, रसीद काटने से 123595 रुपये का आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ है जो इस यात्रा के लिए बहुत ही जरुरी और महत्वपूर्ण है.

विभिन्न प्रकार की गतिविधियां यात्रा के दौरान की गई

4500 पोस्टकार्ड 17 दिन की यात्रा के दौरान विभिन्न जगहों के आम नागरिकों के द्वारा लिखे गए.

लगभग 25000 लोगों द्वारा आन्दोलन के समर्थन में हमारे मिस्ड कॉल पर कॉल किए। 

लगभग 2400 विभिन्न प्रकार की शिकायतें इस यात्रा के दौरान लोगों द्वारा लिखी गई जिन्हें राजस्थान संपर्क पर दर्ज किया जा रहा है।

कई हज़ार हस्ताक्षर कपड़े के बैनर पर यात्रा के दौरान लोगों द्वारा किए गये। आम जन को जवाबदेही क़ानून के मुख्य प्रावधान समझाने के लिए 26 हज़ार पर्चे वितरित किए गये। जन आन्दोलनों के साहित्य की बिक्री से लगभग 20 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई I

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