साहित्य से ही अभिनय में बौद्धिक पूर्णता संभव – अनूप त्रिवेदी

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हिन्दू कालेज में ‘जेनिथ 2021’ के अंतर्गत व्याख्यान 

( श्रेया राज )

नई दिल्ली। ‘साहित्य एक अभिनेता को बौद्धिक रूप से पूर्ण विकसित करता है। एक अभिनेता को वास्तविक कलाकार बनाने में साहित्य की अहम भूमिका है।’  प्रसिद्ध रंगमंच अभिनेता और निर्देशक अनूप त्रिवेदी ने उक्त विचार हिन्दू कालेज में आयोजित एक वेबिनार में व्यक्त किए। वे  बीए प्रोग्राम विभाग के वार्षिक समारोह  ‘जेनिथ 2021’ के एक सत्र में “हिंदी सिनेमा और थिएटर” विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि प्रेमचंद के उपन्यास को जिस कलाकार ने पढ़ा होगा वह उस का मंचन अधिक भाव के साथ कर पाएगा क्योंकि वह उस लेखक के शब्द के वास्तविक मर्म को समझेगा।  

रंगमंच से अपने जुड़ाव और अनुभवों की चर्चा करते हुए त्रिवेदी ने  बताया कि अपने गाँव की  रामलीला में एक छोटा का किरदार निभा कर उन्होंने पहली बार नाटक की दुनिया में कदम रखा था। आगे विख्यात निर्देशक हबीब तनवीर के संपर्क में आने और उनके साथ अभिनय के पहले अनुभव के संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने कहा कि तनवीर के साथ अभिनय के पहले प्रसंग ने ही उन्हें एक कलाकार के रूप में गढ़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। 

समकालीन सिनेमा पर अपनी टिप्पणी में त्रिवेदी ने कहा कि अब नये दौर में तकनीक के अपूर्व प्रयोगों के मध्य कलाकार को बहुत ही सधी हुई और जीवंत अदाकारी की आवश्यकता है और जब तक ज़रूरत ना हो, तब तक कुछ अधिक करने का प्रयास आपके अभिनय की सच्चाई को खत्म कर सकता है। त्रिवेदी ने इन माध्यमों में निर्देशक की भूमिका को अहम् बताते हुए कहा कि एक अभिनेता को निर्देशक के अनुसार ही काम करना चाहिए। साथ ही एक अभिनेता जितने निर्देशकों के साथ काम करेगा और जितना अधिक काम करेगा, उतना ही अधिक ग्रहण कर पाएगा।

सिनेमा और थिएटर में फर्क बताते हुए उन्होंने कहा कि थिएटर में कलाकार को दर्शक को एक वस्तु या अनुभूति का विश्वास अपने हाव-भाव और वाक्यों से दिलाना होता है। दर्शक वही देखेंगे और वही महसूस भी करेंगे जो उन्हें कलाकार दिखाएंगे लेकिन सिनेमा इससे अलग है क्योंकि  सिनेमा में तकनीक की मदद से बहुत सारी वस्तुएं दिखाई और समझाई जा सकती हैं।

अभिनय और साहित्य के संबंधों की चर्चा करते हुुए उन्होंने अभिनेता के जीवन में साहित्य की भूमिका पर भी उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला। प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन हुआ जिसका संयोजन बी.ए. प्रोग्राम के छात्र आकाश शुक्ला ने किया।  यहाँ रंगमंच पर संकट पर पूछी गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सिनेमा के आने से थियेटर पर कोई फर्क नहीं पड़ा सिनेमा पहले भी था और थिएटर तब भी था। सिनेमा आज भी है और थिएटर आज भी है। त्रिवेदी ने अपने द्वारा लिखित मंटो की कहानियों पर आधारित एक नाटक ‘दफा 292’ के कुछ अंशों की चर्चा की तथा एक सवाल के जवाब में कहा कि वर्तमान समय में सक्रिय नाटककारों में असग़र वजाहत की मौलिक और बेधक दृष्टि उन्हें सबसे विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण नाटककार बनाती है।  

इससे पहले प्रारम्भ में  विभाग के प्रभारी डॉ  पल्लव ने त्रिवेदी का स्वागत किया और मानविकी तथा समाज विज्ञान की पढ़ाई में रंगमंच के महत्त्व को दर्शाया। बी.ए. प्रोग्राम के छात्र रचित वर्मा ने उनका औपचारिक परिचय दिया। अंत में बी.ए. प्रोग्राम विभाग की छात्रा अध्यक्ष हर्षिनी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

जेनिथ 2021 के अंतर्गत एक अन्य आयोजन में उड़ीसा काडर के वरिष्ठ आई ए एस अधिकारी रामचन्द्र तेजावत ने ‘युवा वर्ग की शासन में भूमिका और सम्भावनाएँ’ विषय पर व्याख्यान दिया। सिविल सेवा में अपना कैरियर बनाने के लिए उत्सुक विद्यार्थियों के लिए अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी तेजावत ने अनेक उपयोगी बिंदुओं को रखा तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। हर्षिनी ने बताया कि जेनिथ के अंतरगत विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा रहा है।  

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