डॉ.अंबेडकर ने 14 अक्टूबर को ही बौद्ध धम्म की दीक्षा क्यों ग्रहण की ?

180

( बी एल बौद्ध )

आज 14 अक्टूबर का दिन है. कुछ लोग आज धम्म क्रांति दिवस मना रहे हैं, तो कुछ लोग बौद्ध महोत्सव मना रहे हैं और लोगों को बता रहे हैं कि आज ही के दिन बाबा साहेब अंबेडकर ने नागपुर में 10 लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा ग्रहण की थी।

वैसे तो बाबा साहेब अंबेडकर का 14 अक्टूबर से कोई सरोकार नहीं था .उन्होंने तो अशोक विजय दशमी का महत्वपूर्ण दिन दीक्षा ग्रहण करने के लिए चुना था. संयोगवश उस दिन 14 अक्टूबर का दिन था ,लेकिन आज बाबा साहेब के कुछ अनुयायी 14 अक्टूबर को बौद्ध महोत्सव के रूप में मनाकर बाबा साहेब अंबेडकर की सोच के विरुद्ध काम कर रहे हैं।


भारत में विजय दशमी का दिन ऐतिहासिक दिन रहा है. इसी दिन चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ग्रहण की थी.इस ऐतिहासिक दिन को इतिहास के पन्नो से गायब करने के उद्देश्य से मनुवादियों ने इस दिन को रावण की मौत से जोड़कर दशहरे के रूप में प्रचारित करने का काम किया, लेकिन बाबा साहेब अंबेडकर को यह कतई मंजूर नहीं था. इसलिए उन्होंने अशोक विजयी दशमी का दिन बौद्ध धम्म की दीक्षा ग्रहण करने के लिए निर्धारित कर यह संदेश देने का काम किया था कि विजयी दशमी का रावण की मौत से कोई मतलब नहीं है ,बल्कि चक्रवर्ती सम्राट अशोक की बौद्ध धम्म दीक्षा के कारण यह दिन ऐतिहासिक दिन बना था .इसलिए हम कह सकते हैं कि 14 अक्टूबर से बाबा साहेब अंबेडकर का कोई मतलब नहीं था उन्होंने तो चक्रवर्ती सम्राट अशोक की धम्म दीक्षा ग्रहण करने वाले दिन को पुनः ऐतिहासिक बनाने के लिए अशोक विजयी दशमी का दिन दीक्षा लेने के लिए निर्धारित किया था .यह अलग बात है कि संयोगवश उस दिन 14 अक्टूबर का दिन पड़ रहा था ।


कई वर्षों तक नागपुर की दीक्षा भूमि पर 14 अक्टूबर को ही धम्म दीक्षा महोत्सव मनाया जाता रहा है, लेकिन सच्चाई समझ में आने के बाद अभी पिछले कुछ वर्षों से अब वहाँ पर अशोक विजयी दशमी के दिन 3 दिनों तक चलने वाला समारोह आयोजित किया जाता है ,जिसमें पूरे देश से करीब 10 लाख लोग शामिल होते हैं. अतः बाबा साहेब अंबेडकर की सोच को समझते हुए 14 अक्टूबर की बजाय अशोक विजयी दशमी के दिन ही बौद्ध महोत्सव वगैरह मनाया जाना चाहिए।

Leave A Reply

Your email address will not be published.