ग्रामीण पत्रकारिता के लिए बेहतर माध्यम है वेब और सोशल मीडिया !

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(ललित मेघवंशी/जयपुर ) ग्रामीण पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जूम मीटिंग के द्वारा 5 दिन तक कईं सत्र आयोजित किये गए. प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे दिन के प्रथम सत्र में मीडिया संचालन विषय पर कानपुर के रामा विश्वविद्यालय के मास कम्यूनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार गौतम ने न्यू मीडिया के बारे में बताया। उन्होंने न्यू मीडिया के फैलते प्रभाव के बारे में बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फ़ेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ब्लॉग आदि ने लोगों को जोड़ा है। अब लोग इसका इस्तेमाल पत्रकारिता के लिए बहुत ज्यादा कर रहे है। इससे सिटीजन जर्नलिज्म को बढ़ावा मिला है। वेब जर्नलिज्म का भी दायरा तेज गति से बढ़ रहा है। लोग वेबसाइट बना रहे है और अपने – अपने क्षेत्र की खबरें प्रसारित रहे है। इस वक़्त सबसे अधिक लोग यूट्यूब चैनल बना रहे है लेकिन अलग-अलग चैनल बनाकर काम करने की बजाय एक साथ जोड़ कर एक चैनल के माध्यम से  अपने क्षेत्र की पत्रकारिता करने का  प्रयास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यूट्यूब चैनल बनाने का उद्देश्य तय करने सहित कंटेंट की गुणवत्ता पर सोचना भी जरूरी है। उन्होंने ” ग्रामीण पत्रकारिता” पर बात करते हुए खबर लहरिया, गांव कनेक्शन व आदिवासी जनजाग्रति जैसे मीडिया प्लेटफार्म के बारे में बताया कि कैसे ये प्लेटफार्म आदिवासी बहुल गांवों में आदिवासीयों के विभिन्न मुद्दों के लिए मीडिया पैरवी का कार्य कर रहे हैं।

दूसरे सत्र में मीडिया पत्रकारिता के मूल्य और आचार संहिता विषय पर वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ ने जानकारियां दी।

आपको बता दें कि मेवाड़ मीडिया रिसोर्स सेंटर एवं विविधा महिला आलेखन एवं संदर्भ केंद्र के तत्वावधान में पाँच दिवसीय ग्रामीण पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश भर के 6 राज्यों के 28 जिलों से 103 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के चौथे दिन कार्यक्रम का संचालन डेली राजस्थान के संपादक लखन सालवी ने किया।

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