कोरोना वायरस से देश को बचाते सफ़ाई कर्मचारी

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(धम्म दर्शन निगम )

अस्पतालों में जहां डॉक्टर, नर्स और बाकी स्टाफ़ कोरोना के मरीजों का ईलाज कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ सफाई कर्मचारी पूरे देश भर की सफाई रख कर सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोरोना को फैलने से रोका जाये।कोरोना को रोकने में डॉक्टर्स और सफाई कर्मचारी न सिर्फ अहम भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि हज़ारों ज़िंदगियों को बचाने के लिये, देश को बचाने के लिये, ख़ुद की ज़िंदगी भी जोख़िम में डाल रहे हैं। ऐसे में क्या हॉस्पिटल के तमाम स्टाफ और सफाई कर्मचारियों के पास खुद को इस वायरस से सुरक्षित रखने के लिये पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा संसाधन उपलब्ध हैं? नहीं हैं! जिसका जिक्र खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कर चुके हैं।ऐसी स्थिति में सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि अति-आवश्यक काम कर रहे सभी लोगों के लिये उनकी सुरक्षा की सभी सुविधायें उपलब्ध कराई जायें, न कि थाली पिटवा कर और दिये और मोमबत्ती जलवा कर उनका मनोबल बढ़ाने का ड्रामा किया जाये। इस महामारी में सभी स्वास्थ्य कर्मियों और सफाई कर्मचारियों का मनोबल उनके पास पूरे सुरक्षा के साधन होने से बढ़ेगा।

कोरोना के खिलाफ़ इस लड़ाई में डॉक्टर्स को जहां ‘Gods in white coats’ (सफ़ेद कोट में भगवान) कहा जा रहा है, वहीं सफाई कर्मचारियों के योगदान को एकदम से नज़र अंदाज किया जा रहा है।वैसे सफाई कर्मचारी नज़र अंदाज हों भी क्यों न, जब यहां के भगवान ख़ुद सफ़ाई का काम करने वाले लोगों को पसंद नहीं करते, उन्हें अछूत बोलते हैं।और यह बात तब और भी सच हो जाती है जब केंद्र सरकार वाले फ्रंट लाइन वर्कर्स (पहली पंक्ति के कामगार) को एक अलग बड़े संख्याबल से ऑनलाइन ट्रेनिंग देकर बदलने की बात कहती है।ऐसी ऑनलाइन ट्रेनिंग डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, हाइजीन वर्कर, टेकनिशियन, औक्सिलिअरी (सहायक) नर्सिंग मिडवाइफ, राज्य सरकार के अधिकारी, सिविल डिफेन्स ऑफिशियल, पुलिस संस्थायें, नेशनल कैडेट कोर्प्स, नेहरु युवा केंद्र संगठन, नेशनल सर्विस स्कीम, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, भारत स्काउट और गाइड्स और कुछ और भी संस्थाओं और समूहों के लिए उपलब्ध रहेगी। लेकिन इस लंबी सूची में केंद्र सरकार सफाई कर्मचारियों का नाम नहीं लेती।क्योंकि सफाई का काम तो वाल्मीकि, चूहड़ा, डोम, बासफोर, या भंगी आदि जाति से ही कराया जायेगा। ऐसा नहीं हुआ तो उनकी बची-कुची वर्ण-व्यवस्था जो भंग हो जायेगी। अब यह खबर भी मिलना शुरू हो गई हैं कि सफाई कर्मचारी कूड़ा, मेडिकल संबंधी कूड़ा, और नाले-गटर-मैला तक बिना किसी सुरक्षा (मास्क, ग्लव्स, बूट) के साफ़ कर रहे हैं, और अगर दिन में काम नहीं किया तो शाम को खाना तो होगा ही नहीं, साथ न नौकरी भी जाएगी

सफाई कर्मचारियों को अक्सर फ़ौजियों सा बताया जाता है कि जिस तरह फ़ौजी सरहद पर दुश्मनों से देश की रक्षा करते हैं, उसी तरह सफाई कर्मचारी भी अनेक बिमारियों से देश की रक्षा करते हैं।(यह कुछ वैसा ही है जैसा मोहनदास गांधी कहते थे कि ‘एक भंगी समाज के लिये वो करता है जो एक मां उसके बच्चे के लिये करती है’।)अगर ऐसा सच में है तो यह भी समझ लेना चाहिये कि देश के बॉर्डर्स की सुरक्षा ठेके पर नहीं दी जाती और न ही फ़ौजियों के साथ सस्ते मजदूर (cheap labour) सा व्यव्हार किया जाता, जैसा सफाई कर्मचारियों के साथ किया जाता है। एक सफाई कर्मचारी अपनी जगह है, डॉक्टर अपनी जगह, और फ़ौजी अपनी जगह।किसी भी काम की तुलना किसी दूसरे काम से क्यों ही की जाये! सभी काम ज़रूरी हैं! सभी कामों का अपना-अपना महत्त्व है! बस अलग-अलग काम करने वालों को बराबर सम्मान, बराबर सामाजिक-आर्थिक अधिकार दिये जायें।किसी एक काम का सम्मान दूसरे काम पर थोप कर लोगों का झूठा सम्मान न किया जाये, उनका झूठा मनोबल न बढ़ाया जाये।और यह तो कभी भी नहीं कहा जायेगा कि फौजी सरहद पर भंगियों या सफाई कर्मचारी जैसा काम करते हैं, या इस कोरोना की महामारी के समय में डॉक्टर्स और नर्स भंगियों जैसा काम कर रहे हैं। अतः सफाई कर्मचारियों को भी सफाई कर्मचारी ही बने रहने दिया जाये, उन्हें डॉक्टर्स या फ़ौजियों सा न बताया जाये। सरकार को सफाई कर्मचारियों के लिये कुछ करना ही है तो यह महामारी ख़तम होने के बाद,कोरोना से लड़ने और उसको ख़तम करने में सफाई कर्मचारियों के योगदान की कद्र करते हुये और उनके इस अति आवश्यक काम में ठेका प्रथा बंद कर उन्हें पक्की सरकारी नौकरी और बाकी सरकारी सुविधायें दी जायें जो डॉक्टर्स और फ़ौजियों को दी जाती हैं।और अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो यही कहा जा सकता है कि वर्णव्यवस्था के अनुसार, जातिप्रथा के अनुसार यह सफाई का काम अछूत सफाई कर्मचारियों पर थोपा गया है और उनकी तरक्की रोकने के लिये यह ज्यादा से ज्यादा ठेके पर, अनियमित और असंगठित रूप से कराया जाता है।

इस सब के बावजूद सफाई कर्मचारी पूरी लगन से उनका काम करते हैं।और अभी भी कोरोना से आम जनता, समाज और देश को बचाने के उनकी पूरी जी-जान लगा रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य और उनके लिये खाद्य सामग्री का पूरा ध्यान रखे, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही काफी ख़राब होती है।उन सरकारी संस्थाओं या प्राइवेट ठेकेदारों पर लगाम लगाये जो सफाई कर्मचारियों को काम से हटाने की धमकी दे रहे हैं या कम पैसा देकर ज्यादा काम करा रहे हैं।

(धम्म दर्शन निगम )

(Picture Credit- Patrika)

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