‘कितनी कठपुतलियां’ लिखकर स्व. प्रभाष जोशी के स्वप्न को पूरा करने की कोशिश की- मेघवंशी

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देसूरी ( प्रमोद पाल सिंह )

चर्चित पुस्तक ‘कितनी कठपुतलियां’ के लेखक एवं बहुजन चिंतक भंवर मेघवंशी ने देसूरी पहुंचने पर कहा कि किताबों के काले शब्द क्रांति,व्यवस्था एवं परिवर्तन के वो हथियार हैं जो कभी असफल नही होते। किताबों ने हमें अपने हकों के लिए लड़ना सीखाया और विपरीत परिस्थितियों में लड़ने की हिम्मत दी।


मेघवंशी मंगलवार को ‘होटल वृंदावन’ में ठहराव के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। भीलवाड़ा से सिरोही जाते वक्त मेघवंशी कुछ देर के लिए रुके थे। इस दौरान ऑल इंडिया रिपोर्टर एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव दिनेश आदिवाल,जिला परिषद के पूर्व सदस्य प्रमोदपाल सिंह,पत्रकार दिलदार भाटी,नगर कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष शरीफ शेख ने उनका माला व साफा पहनाकर स्वागत किया।


स्वागत के दौरान मेघवंशी ने अपनी नई पुस्तक ‘ ‘कितनी कठपुतलियां’ के बारे में कहा कि कई वर्षों पूर्व भीलवाड़ा में आयोजित दलित मजदूर किसान शक्ति संगठन के नरेगा सामाजिक अंकेक्षण से जुड़े कार्यक्रम में शरीक होने आए जनसत्ता के पूर्व सम्पादक प्रभाष जोशी ने आम आदमी के हकों के लिए लड़ने वाले जमीनी कार्यकर्ता शंकरसिंह रावत के जीवन पर ‘कितनी कठपुतलियां’ लिखनी की इच्छा जाहिर की थी।

लेकिन उनका निधन होने से यह स्वप्न अधूरा ही रह गया। उन्होंने बताया कि इस किताब को उन्होंने काफी समय पहले लिखना चाहा। इसके लिए उन्होंने शंकरसिंह का लंबा साक्षात्कार भी किया। लेकिन इससे आगे बढ़ नही पाया। परन्तु लॉक डाउन में सारी व्यस्तता खत्म हो गई तो अपने खेत में बैठकर यह किताब लिख डाली और प्रभाष जोशी के स्वप्न को पूरा करने की कोशिश की। जो उनके प्रति उनकी एक श्रद्धांजलि हैं। उन्होंने कहा कि उनकी उम्मीद से ज्यादा किताब की मांग हो रही हैं। जो किसी भी लेखक के लिए खुशी की बात हैं।


बाद में मेघवंशी ने सिरोही के लिए प्रस्थान कर लिया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों को ‘कितनी कठपुतलियां’ पुस्तक की एक हस्ताक्षरित प्रति भी भेंट की। 

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