तकलीफों से गुजर कर राजस्थान पहुंच रहे हैं प्रवासी, सरकार करें प्रवासियों को राजस्थान लाने के प्रयास

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(लखन सालवी)
प्रवासी राजस्थानी गुजरात के विभिन्न शहरों से विभिन्न माध्यमों से लौट रहे हैं इसके लिए भारी रकम की अदायगी करनी पड़ रही है और राजस्थान में उनकी कोरोना वायरस संक्रमण की स्क्रीनिंग की जा रही है, उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं कि वे अपने घरों में आइसोलेशन में रहे और इस बीच वह घरों से बाहर ना निकले, यह अच्छा प्रयास है।
राजस्थान के भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, जालौर, जोधपुर, बाडमेर, बीकानेर, सिरोही व पाली सहित सरहदी जिलों से भारी संख्या में लोग गुजरात में रोजगार के लिए प्रवास पर रहते हैं। 
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पहले राजस्थान सरकार की ओर से लॉक डाउन की घोषणा और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉक डाउन की घोषणा करने के बाद से भारी संख्या में प्रवासी राजस्थानी गुजरात से लौट रहे है। हालांकि 15 मार्च से ही गुजरात से आने वाली  ट्रावेल्स बसों में भारी भीड़ दिखने  लगी थी। 21 मार्च से  इन ट्रावेल्स बसों में लोग भेड़-बकरियों की तरह लादे जाने लगे। हालात ऐसे हो गए कि लोग ट्रावेल्स बसों की डिग्गियों में ठूंस कर राजस्थान आते दिखे। गुजरात से लौटते प्रवासियों की संख्या को देखते हुए सरकार ने राजस्थान-गुजरात बॉर्डर को सीज कर दिया। 22 तारीख को ट्रावेल बसें बंद कर दी गई। साथ ही रोड़वेज बसें भी बंद कर दी गई। 
बसें बंद करने से प्रवासियों का लौटना बंद नहीं हुआ। लोग ट्रकों में, टैम्पो में, ट्रेलर में और यहां तक कि टेंकर में बैठकर लौट रहे है। जिन लोगों के पास निजी वाहन हैं वे निजी वाहनों से आ रहे हैं, जिन लोगों के पास निजी वाहन नहीं है वे वाहन किराए पर ला रहे हैं, जो लोग मजदूरी करते है और यात्रा व्यय कर पाने में सक्षम नहीं है वे पैदल ही वहां से लौट रहे है। गुजरात के सूरत शहर से भारी संख्या में प्रवासी लोग कड़ोदरा तक पहुंच रहे है और कड़ोदरा से हाइवे पर मिलने वाले ट्रकों, टंकेरों व ट्रेलर्स में बैठ कर आ रहे हैं। राजस्थान सरकार ने रतनपुर बॉर्डर पर चेक पोस्ट बनाया है, वहां पर गुजरात से आ रहे प्रवासियों की कोरोना वायरस संक्रमण के चलते स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके साथ ही यहां से प्रवासी जिस जिले में पहुंच रहे हैं वहां के उपखंड मुख्यालय के आस-पास चेक पोस्ट बनाकर दुबारा स्क्रीनिंग की जा रही है। साथ ही ऐसे प्रवासियों को एक नोटिस दिया जा रहा है जिसमें उन्हें घर पर आइसोलेशन में रहने और घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी जा रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब लोग गुजरात के विभिन्न शहरों से विभिन्न संसाधनों के द्वारा राजस्थान में आ ही रहे हैं और यह सब सरकार व प्रशासन की नजर में हो रहा हैं तो फिर रोड़वेज और ट्रावेल्स बसों को क्यों बंद किया गया ?
हालांकि राजस्थान सरकार ने रतनपुर बॉर्डर पर रोड़वेज बसें वापस लगाई है, जो गुजरात से आ रहे लोगों के गांवों तक पहुंच पाने में मददगार साबित हो रही है लेकिन गुजरात के शहरों से रतनपुर तक आने के लिए प्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रवासी भारी रकम खर्च करके रतनपुर बॉर्डर तक पहुंच रहे है।कई प्रवासी संगठनों ने अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों से यह मांग की है कि गुजरात के शहरों से रोड़वेज व ट्रावेल्स बसें पुनः चालू की जाए। 
सरकार को यह मांग मान लेना चाहिए क्योंकि सूरत, अहमदाबाद भावनगर, बड़ौदा सहित गुजरात के कई शहरों में प्रवासी राजस्थानी  है। वहां काम बंद हो चुका है,  एक-एक कमरे में 4-5 मजदूर रहते है। मकान मालिक मकान में नहीं रहने दे रहे है। जहां पर वे काम करते है, उन कारखाना मालिकों ने उन्हें छुट्टी दे दी है। उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं है। खाने-पीने की चीजें उन्हें नहीं मिल पा रही है। ऐसे में वे सब लोग अपने गांव अपने घरों पर जाना चाह रहे है और वे अपने माध्यमों से जा ही रहे है तो ऐसे में बसों की व्यवस्था कर प्रवासियों  की स्क्रीनिंग करवाकर उन्हें घर भिजवाना सरकार की जिम्मेदारी है।

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