सामूहिक बलात्कार पीड़िता को मिला अररिया सी.जी.एम कोर्ट में बेल

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( पीड़िता के मित्र और सहयोगी जो लगातार उसकी देखभाल कर रहे थे उनको नहीं दी गई बेल)

अररिया रेप केस के जिस मामले में पीड़िता और उसके दो मददगार लोगों को 10 जुलाई को जेल भेज दिया गया था, आज आज उस मामले में पटना उच्च न्यायलय में सुनवाई होनी थी वह नहीं हो सकी है. माननीय न्यायाधीश का कोर्ट आज नहीं बैठ सका, लेकिन आज ही अररिया कोर्ट में बेल पेटीशन पर एक विशेष सुनवाई की गयी .कोर्ट ने हमें वकील के माध्यम से सुनवाई का मौका दिया.

 
हमें ख़ुशी हुई कि कोर्ट ने इस मामले को अपवाद मानकर विशेष सुनवाई की . ज्ञात हो कि अररिया कोर्ट में हाई कोर्ट के आदेशानुसार कोरोना के चलते किसी मामले की सुनवाई नहीं हो रही .  इस मामले में कोर्ट ने  पीड़िता को बेल दे दी पर  उसके दो सहयोगियों (कल्याणी और तन्मय) का बेल अस्वीकृत किया गया . यह स्पष्ट नहीं है कि कल्याणी और तन्मय को बेल क्यूँ नहीं दिया गया जबकि सभी उसी आरोप के तहत बंद हैं.


पीडिता को पी.आर बांड पर रिहा करना एक समस्या पैदा करता है क्यूंकि यह पीडिता और उसकी देखभाल कर रहे लोगों को अलग कर देता है. इसके चलते पीडिता को एक और मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ेगा ,क्योंकि उसे यह ग्लानी भाव से भर सकता है कि उसके चलते ही इन दोनों को, जिनपर उसका पूरा भरोसा है और जिन्होंने उसका मुश्किल वक्त में साथ दिया, जेल में रहना पड़ेगा .


हम कल्याणी और तन्मय के बेल के लिए तुरंत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में आवेदन दाखिल करना चाहते थे पर यह संभव नहीं हो सका क्यूंकि न्यायालय में किसी मामले की सुनवाई नहीं हो रही है . ऐसी परिस्थिति में हम अपने वकील वृंदा ग्रोवर और अनुज प्रकाश की सलाह पर आगे की न्यायिक संभावनाओं को तलाशेंगे .

 
हम फिर से कहना चाहते हैं कि हमें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और अपील करते हैं कि पीड़िता को मदद कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाय .इनकी रिहाई के आगे हम इस बात की कोशिश जारी रखेंगे कि कैसे किसी भी यौन हिंसा की पीड़िता और उसकी मदद कर रहे सहयोगियों को संवेदनशीलता के साथ न्याय मिले.

 
( अभिमन्यु ,आशीष रंजन, कामायनी स्वामी, रंजित पासवान और सोहिनी – जन जागरण शक्ति संगठन की ओर से )

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