कमलेशजी… यूं कोई रुला कर जाता है कोई..??

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( काॅमरेड किशन मेघवाल )
आज केवल आप ही खामौश नहीं हुए, अनगिनत चेहरों पर डरावनी खामौशी की चादर ओढ़ा कर अनंत यात्रा पर निकल पड़े हो।
भरोसा करना बहुत मुश्किल हो रहा है, सवेरे सवेरे ही सोशल मीडिया पर आपके हंसोड़ शैली वाले फोटो फैले हुए हैं,तो लगता हैं कि हमारा टेंशन दूर करने के लिए कमलेश जी आ रहे हैं, रात को उनके छोटे भाई मुकेश से बात हुई थी, गंभीर स्थिति की जानकारी मिल गई थी परन्तु आशा की एक किरण तो बची थी,सोचा कि कैसे भी जीवन बच जाए, परंतु प्रकृति को मंजूर नहीं हुआ।
खबर फैली के बाद हम दोस्तों ने एक दूसरे को फोन किए, जो जोधपुर में हैं उनसे भी बात हुई, कोरोनावायरस की महामारी की वजह से ज्यादा लोगों का इकट्ठा होना भी उचित नहीं है क्योंकि जोधपुर रेड जोन में हैं।
कमलेश जी के बारे में लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं, आंखों में आंशू है और अंगुलियां भी कंपन्न कर रही हैं, हम सभी मित्रों को बहुत बड़ा सदमा लगा है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो पाऐगी, कैसे भी टेंशन भरे मास को चुटकियों में बदलने की अद्भुत क्षमता वाले कमलेश जी कोई भी नहीं भूल पाएगा।
केवल एक बात में वैचारिक मतभेद था कि वो किसी भी विचारधारा के संगठन के आमंत्रण पर मंच संचालन करने के लिए चले जाते थे, मैं उलाहना देता तो हंस कर बोलते कि मिठास की जरूरत सभी को हैं, नफ़रत फैलाने वाले के पाले में प्यार घोलने जाता हूं, कई बार मैं बोलता कि उल्टा न हो जाएं कि आप खुद नफ़रत न उगलने लगो तो आत्मविश्वास से बोल देते कि इस जीवन में तो नहीं….
उन्होंने अपना वायदा शत प्रतिशत निभाया उन्होंने जीते जी कभी किसी से नफ़रत नहीं की, किसी के भी बारे में नकारात्मक टिप्पणी नहीं की, ऐसे संजीदा इंसान के चले जाने से सच है अजीब सा सन्नाटा पसर गया है।
मुझे नहीं पता कि हम पहली पोस्ट कब मिले थे, मुझे लगता है कि वह दिन तो याद नहीं है परंतु उनकी शिक्षक ट्रैनिंग के दिन रहें होंगे, उस जमाने में विद्यार्थी राजनीति में हमारी दखल जोरदार होती थी,हम उसी दौरान संपर्क में आए तो ऐसे आए उन्होंने अपने अंतिम सांस तक हमारा हर कदम साथ निभाया।
उनके साथ अनेक यादें जुड़ी हुई है जिसका वर्णन इस छोटी सी पोस्ट में करना संभव नहीं है, मेरे गांव चाखू से लेकर जोधपुर तक एक दूसरे के घर आना जाना रहा, हम दोनों बतियाते, हम दोनों के बच्चे भी मिलकर बहुत खुश होते, प्रमोशन के बाद फलोदी छूट गया था, बच्चों सहित जोधपुर में शिफ्ट हो गए, एक दिन सवेरे सवेरे ही एयरफोर्स क्षैत्र स्थित घर आ धमके और बोले कि अब मैं जोधपुर में ही रहने लगा हूं अतः पूरे परिवार के साथ घर आइए, उसके बाद हम दो तीन बार उनके घर गये, उनके परिवार का हर सदस्य को हमने संजीदगी से लबरेज पाया, उनके माताजी-पिताजी के साथ उनकी पत्नी और भाई मुकेश का परिवार के साथ संयुक्त परिवार अभी आनंद में था, बड़ी बेटी प्रिया स्कूली शिक्षा पूरी कर चुकी थी, जो विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए कोचिंग ले रही थी, मुस्कान की स्कूली शिक्षा पूरी होने को है। 
उन्होंने कोख में पलती बेटी के ऊपर खूबसूरत कविता लिखी थी, जो पोस्टर कविता के रूप में खूब सराही गई, उसके भाव संवेदनशील इंसान को झकझोरने वाले हैं, कुदरत ने उन्हें बेटियां ही शायद यह जान कर दी कि सबसे सुरक्षित गोद में महफूज होगी, उनकी बहिन शारदा जी भी एडवा के साथ जुड़ कर महिलाओं के मुद्दों पर बहुत ही मुखरता से पेश आती हैं।
मंच संचालन के लिए सबसे पहले मैंने ही उन्हे प्रेरित किया था, उनके अंदर छिपी प्रतिभा पर नजर पड़ने के बाद उन्हें जनवादी लेखक संघ (जलेस) के साथ जोड़ा, उनके ही शिक्षक साथी सूर्य प्रकाश जी जीनगर के साथ उनकी बेहतरीन जोड़ी बनी और वर्षों तक हमने यादगार कार्यक्रम किए, जलेस के अखिल भारतीय काॅन्फ्रेंस में भी इस जोड़ी की सराहना की गई थी।
मैंने पोस्ट लिखने के दौरान फेसबुक खंगाली, उनकी अंतिम दो पोस्ट के स्क्रीन शाॅट शेयर कर रहा हूं, इसके अलावा उन्होंने इन दिनों फेसबुक को अपडेट नहीं किया है, मदर्स डे पर एक बेहतरीन कविता शेयर की थी, मां को नमन करती हुई उनकी अंतिम पोस्ट है इसके अलावा अप्रैल माह में कोरोनावायरस की रोकथाम हेतु चैक पोस्ट पर ड्युटी के दौरान फोटो के साथ एक पोस्ट शेयर की गई है।
ऐसे वक्त में भी इतना लिख पाया हूं, इसे बहुत ज्यादा ही समझना, हम सभी के लिए यह दुःख असहनीय हैं परन्तु कोई भी विकल्प नहीं है, जाना सभी को हैं परन्तु वक्त के साथ आना जाना दुखदाई नहीं होता हैं, कमलेश जी की मित्र-मंडली किसी वैचारिक सीमाओं में नहीं थी, उनकी बगिया में हर रंग के फूल थे, आज उनकी पुरानी कर्मभूमि उदास होगी,मेहरा जी,माणकजी, सूरजनजी ,भैरजी, पारसजी, अशोक जी, गोरधन जी, सूर्यप्रकाश जी, हरजीरामजी, आसूजी, सहित अनगिनत दोस्त जो आज अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे होंगे कि कमलेश जी हमेशा मजाक करते थे और जाते जाते जीवन के साथ भी मजाक करके चले गए।
कमलेश जी, आपने ठीक नहीं किया…शायद आपके हाथ की बात नहीं रही होगी? आपने हमें हंसाने की ठानी थी परन्तु प्रकृति ने आपको अनुमति नहीं दी कि लम्बे समय तक मुस्कान बिखैर सको।आज का दिन एक बरस की तरह बीतेगा, रात को आसमान में झिलमिलाते तारों के बीच आपकों खोजेंगे, शायद कहीं आपकी झलक मिल जाए….
खैर….अब मुझे कुछ नहीं कहना,दोस्त तुम्हें कभी नहीं भूल पाएंगे।फिर किसी दिन फिर से लिखूंगा, आपके सपने फिर से कागज तक उकेरूंगा, फिर से आपके अधुरे काम को पूरा करने का संकल्प लूंगा…
—काॅमरेड किशन मेघवाल

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