राजस्थान में अनुसूचित जाति व जनजाति उपयोजनाओं पर कानून बनाने की आवश्यकता पर चर्चा आयोजित होगी !

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(3 फरवरी 2019,Jaipur)केन्द्र एवं अन्य राज्य सरकारों की तरह राजस्थान सरकार द्वारा भी वित्त वर्ष 2017&18 से बजट के योजना व गैर योजना वर्गीकरण को समाप्त कर दिया गया है। इसके परिवणामस्वरुप राज्य में भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति उपयोजनाओं का आधार समाप्त होने से ये उपयोजनाएं भी कमज़ोर हो गयी हैं। हालांकि राज्य सरकार ने योजना व गैर-योजना खर्च को समाप्त किये जाने के बावजूद 28 दिसम्बर 2016 को इस संबंध में एक परिपत्र जारी कर दोनों उपयोजनाओं में बजट आवंटन पूर्व की भांति यथावत् रखे जाने की बात कही थी।

बजट में इस बदलाव के बाद देशके कईं राज्यों- तेलंगाना, उत्तराखंड आदि द्वारा उपयोजनाओं के क्रियांवयन हेतु कानून बनाकर प्रभावी रुप से लागू किये जा रहे हैं। इस स्थिति में यह आवश्यक  है कि राजस्थान सरकार द्वारा भी बजट में हुये बदलावों को ध्यान में रखते हुये तेलंगाना सरकार की तर्ज पर कानून बनाकर लागू किया जाये।

अतः राज्य में उपयोजनाओं से संबंधित उपरोक्त मुद्दों पर बजट अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र (BARC)सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान (SR Abhiyan)दलित अधिकार केन्द्र (CDR)अखिल भारतीय दलित महिला मंच (aAIDMM)राजस्थान आदिवासी अधिकार मंच (RAAM) एवं अम्बेडकर सोल इक्विटी एंड एम्पॉवरमेंट मिषन (ASEEM) द्वारा एक दिवसिय बैठक का आयोजनदिनांक-4 फरवरी2020 को विकास अध्ययन संस्थानजयपुर में किया जा रहा है।

इस बैठक में राज्य में अनुसूचित जाति एवं जनजाति उपयोजनाओं के क्रियांवयन की स्थितिदेशके अन्य राज्यों में इनका क्रियांवयन एवं राज्य में उपयोजनाओं के बेहतर क्रियांवयन हेतु कानून संबंधी मांग पर चर्चा की जायेगी। इस कार्यशाला में उपयोजनाओं पर चर्चा कर एक मांग पत्र तैयार कर राज्य सरकार को प्रेषित किया जायेगा।

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