राजस्थान के चिकित्सा मंत्री से दलित विधायक ख़फ़ा !

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( एस पी मित्तल )


सीएम गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा से मुलाकात के बाद भी विधायक बैरवा की नाराज़गी बरकरार। रघु शर्मा से नहीं संभल रहा चिकित्सा विभाग। दो हजार चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया दूसरी बार निरस्त।


अलवर जिले के कठुमर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक बाबूलाल बैरवा ने एक बार फिर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के खिलाफ अपनी नाराज़गी जताई है। 14 अक्टूबर को न्यूज इंडिया टीवी चैनल पर दोपहर को एक बहस में भाग लेते हुए बैरवा ने कहा कि – “रघु शर्मा ने चिकित्सा मंत्री बनने के बाद उनके क्षेत्र का एक भी कार्य नहीं किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अब रघु शर्मा का विभाग बदल देना चाहिए। रघु शर्मा दूसरी बार विधायक बन कर मंत्री बन गए हैं, जबकि मैं चौथी बार विधायक बना हूँ। चूंकि दलित हूँ, इसलिए मंत्री नहीं बन पा रहा हूँ। राहुल गांधी कहते हैं कि कांग्रेस में दलितों और पिछड़ों का सम्मान होता है, लेकिन राहुल गांधी के सामने मेरा उदाहरण है। चार बार के दलित विधायक की सुनवाई एक मंत्री ही नहीं कर रहा है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस सरकार में दलितों का कितना सम्मान है। राहुल गांधी को राजस्थान की स्थिति का पता लगाना चाहिए। जब कोई सामने नहीं आ रहा है तो मुझे ही बलिदान देना पड़ेगा।”


बैरवा ने कहा कि 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की थी। मैंने अपनी भावनाओं से दोनों को अवगत करा दिया है। सीएम गहलोत ने भरोसा दिलाया है कि कठुमर विधानसभा क्षेत्र की सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। गहलोत ने कहा कि अब वे स्वयं निगरानी करेंगे, ताकि विधायको को कोई शिकायत नहीं रहे। बैरवा ने दावा किया कि जब डोटासरा ने उनके क्षेत्र की एक पीडि़त लड़की की दर्दभरी कहानी सुनी तो उनकी आंखों में आसूं आ गए।


बैरवा ने कहा कि वे मंत्रियों के पास अपना व्यक्तिगत काम लेकर नहीं जाते हैं। जिस जनता ने वोट देकर विधायक बनाया है। उस जनता के काम करना जरूरी है। जब मेरे वोट से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है तब सरकार को समस्याओं का समाधान करना चाहिए। यह सरकार के प्रति नाराजगी का सवाल नहीं है यह लोगों की समस्याओं के समाधान का मुद्दा है। जुलाई अगस्त में राजनीतिक संकट के समय मैं पूरी तरह मुख्यमंत्री के साथ था। तब सभी विधायकों को गहलोत ने भरोसा दिलाया था कि जनहित के सभी कार्य किए जाएंगे, लेकिन अब रघु शर्मा जैसे मंत्री बात करने से भी परहेज करते हैं। 


नहीं संभल रहा चिकित्सा विभाग ।
रघु शर्मा के जहां कांग्रेस के विधायक ही नाराज है, वहीं चिकित्सा विभाग के हालात भी बिगड़े हुए हैं। 13 अक्टूबर को दूसरा अवसर रहा, जब दो हजार डॉक्टरों की भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया गया। आमतौर पर डॉक्टरों की भर्ती राजस्थान लोक सेवा आयोग के माध्यम से करवाई जाती है। लेकिन रघु शर्मा के चिकित्सा मंत्री रहते हुए भर्ती की जिम्मेदारी आरयूएसएल को दी गई है। सवाल उठता है कि  बार बार परीक्षा करवाने में विफल रहने के बाद भी इसी संस्था को भर्ती का काम क्यों दिया जा रहा है? कोरोना काल में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की पहले ही कमी है। ऐसे में पिछले एक वर्ष से 2000 डॉक्टरों की भर्ती नहीं होने से हालात और बिगड़े हुए हैं।

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