बहुजन चिन्तक शांतिस्वरूप बौद्ध नहीं रहे !

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सम्यक प्रकाशन के संस्थापक और जाने माने बहुजन विचारक ,चिन्तक व लेखक शांतिस्वरूप बौद्ध का आज दिल्ली में निधन हो गया ,यह जानकारी उनके सुपुत्र कपिल स्वरूप बौद्ध ने सोशल मिडिया पोस्ट के ज़रिये दी .प्राप्त जानकारी के मुताबिक शांतिस्वरूप बौद्ध की पार्थिव देह का अंतिम संस्कार निगम घाट पर शाम 5 बजे किया गया .

बौद्ध का असामयिक निधन से पूरे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे हुए अम्बेडकरवादी लोगों में शोक की लहर दौड़ गई ,अव्वल तो कोई भरोसा करने को ही राजी नहीं था कि शांतिस्वरूप जी अब हमारे बीच नहीं रहे ,लेकिन जब खबर की पुष्टि हुई तो लोग स्तब्ध रह गए ,सोशल मिडिया पर दुनिया भर से लोग उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजली प्रदान कर रहे हैं .

डायवर्सिटी मेन एच एल दुसाध ने अपनी टाईमलाईन पर लिखा है कि -“आज आंबेडकरी आंदोलन का एक स्तम्भ ढह गया है ,आंबेडकरी साहित्य प्रकाशन की सबसे बड़ी शख्सियत शांति स्वरूप बौद्ध सर हमारे बीच नहीं रहे।आँखों से आँसू निकल रहे हैं, मैं इससे ज्यादा कुछ लिखने की स्थिति में नहीं हूँ “


फॉरवर्ड प्रेस के संपादक नवल किशोर ने लिखा है कि -“शांति स्वरूप बौद्ध के परिनिर्वाण की सूचना मिल रही है। यह अत्यंत ही दुखद है। बहुजन और बौद्ध साहित्य को देश भर में लोकप्रिय बनाने की दिशा में आपके योगदान को कृतज्ञ बहुजन समाज हमेशा याद रखेगा।”

सुप्रसिद्ध लेखक सतनाम सिंह ने लिखते है -“बड़े गौर से सुन रहा था ज़माना /तुम्ही सो गए दास्तान कहते-कहते…दिल्ली में जिनकी उंगली पकड़ कर मैंने चलना सीखा. जो मुझे अपना बेटा मानते थे. वो शख्शियत शान्ति स्वरूप बौद्ध नहीं रहे. अश्रुपूर्ण नमन .”


लेखक रामायण राम ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है -” एक अत्यंत दुःखद घटनाक्रम के तहत बहुजन विचारक और अम्बेडकरवादी साहित्य के प्रकाशक, सम्यक प्रकाशन के मालिक शान्ति स्वरूप बौद्ध का निधन हो गया है।यह भी पता चला है कि वे कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। उनका निधन अम्बेडकरवादी व बहुजन साहित्य के लिए एक गम्भीर क्षति है.


बहुजन चिंतक डॉ एम एल परिहार ने कहा है कि -“बहुत दुखद समाचार.तथागत बुद्ध की मानवतावादी शिक्षाओं को साहित्य के माध्यम से घर घर पहुंचाने में महान योगदान देने वाले व सम्यक प्रकाशन दिल्ली के संस्थापक  आदरणीय शांतिस्वरूप जी बौद्ध का आज परिनिर्वाण हो गया. उनके अमूल्य योगदान , व्यक्तित्व व कृतित्व को शत शत नमन…भावपूर्ण श्रद्धांजलि.”


दलित दस्तक के संपादक अशोक दास ने लिखा है – “आदरणीय शांति सर। पिछले 3 दिन से गोरखपुर में हूँ, और वहां आप चल दिये। आपको आखिरी विदाई कैसे दूं। मुझे मेरे अब तक के सफर में बहुत लोग मिले। आप उन सबसे जवान थे। सबसे अलग थे। एक इंसान में जितनी खूबियां हो सकती है, आपमे उससे ज्यादा थी। आप हमेशा मेरे दिल में रहेंगे। नमन। “


प्रोफेसर कालीचरण स्नेही ने बौद्ध को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा है -“भारत में बौद्ध धम्म का प्रसार करने वाले ‘सम्यक प्रकाशन’ के मालिक बौद्धाचार्य शान्तिस्वरूप जी बौद्ध अब हमारे बीच नहीं रहे। उन जैसा प्रखर और मुखर वक्ता इस समय कोई दूसरा नहीं था।मुझे उनके साथ कई बार मंच शेयर करने का अवसर मिला, वे जब बोलते थे, तब दूसरे अन्य वक़्ताओं की बोलती बंद हो जाती थी।सम्यक् प्रकाशन के माध्यम से उन्होंने बौद्ध साहित्य को प्रकाशित करने में बड़ी भूमिका का निर्वाह किया है। वे अपना सर्वोत्तम देकर इस दुनिया से विदा हो लिए। मैं उन्हें अपनी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।


सोशल मीडिया पर शांतिस्वरूप बौद्ध को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है,इससे उनका लोगों से जुड़ाव और लोकप्रियता का पता चलता है।शून्यकाल परिवार श्रद्धेय शांतिस्वरूप बौद्ध को विन्रम श्रद्धांजली अर्पित करता है .

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