कोरोना से बचने के लिए एक अपील !

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(भंवर मेघवंशी )

साथियों, अपने अपने घर ही ठहरो,मत आओ मिलने,मत बुलाओ कुछ दिन किसी को,मुझसे भी मत मिलिये।

हम लोग 6 मार्च से अपना जयपुर ऑफिस बन्द करके गांव लौट आये हैं,अब सारा काम घर से ही कर रहे हैं।

कहीं भी आना जाना, मिलना जुलना एकदम बन्द कर चुके हैं,आप भी कर दीजिए।

मैं गांव में लोगों को देख रहा हूँ कि वे अब भी अपने निजी वाहनों से इस गांव से उस गांव जा रहे हैं,बिना काम सड़कों पर मोटरसाइकिल दौड़ा रहे हैं।

कोरोनो कोई तमाशा नहीं है,इसे आमंत्रित करने मत निकलिए, आपकी गलती की सजा आपका परिवार और पूरा गांव ,प्रदेश व देश तथा समस्त मानव प्रजाति भुगतेगी।

क्या हो जाएगा ,अगर कुछ दिन घर में रह गए तो,क्या आसमान नीचे आ जायेगा या धरती फट जाएगी ? कुछ भी नहीं होगा,जिंदगी से महत्वपूर्ण कुछ भी काम नहीं है,कृपया इधर उधर भटक कर सबके स्वास्थ्य को खतरे में न डालें।

न केवल घर पर रुकिये, बल्कि मजमा लगा कर चबूतरों पर बैठकर पंचायती करने के काम को भी कुछ दिन रोक दीजिये,वरना लाशों को ठिकाने लगाने वाले भी न मिलेंगे,हालात की गंभीरता को समझिए,वरना पश्चात्ताप करने जितनी भी सांसे नहीं बचेगी।

मैं यह भी देख रहा हूँ कि अज्ञान ने विज्ञान का मजाक बना रखा है,कईं लोग कोरोनो पर चुटकले गढ़ रहे हैं,कुछ को अभी भी यह अफवाह लग रहा है,कईं बुद्धिजीवी इसे साज़िश साबित करने में ऊर्जा लगा रहे हैं,कईं आयुर्वेद,होम्योपैथ,यूनानी ,जंतु विज्ञान और मंत्र व ध्वनि,झाड़ फूंक तथा गण्डे ताबीज ,गौमूत्र,गोबर में इसका शर्तिया इलाज़ बता रहे हैं,अगर हमने अब भी इन मूर्खताओं पर यकीन किया तो कोई नहीं बचाएगा।

इस वक्त कोरोनो के निरन्तर फैलते चक्र को तोड़ना है,भीड़ से बचना है,भीड़ नहीं बनना है,ज्यादा से ज्यादा अकेले रहना है,किताबें पढ़नी है,संगीत सुनना है,ध्यान किया जा सकता है,कुछ लिखा जा सकता है।

बहुत कुछ है करने को,किसी असहाय ,गरीब ,जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाई जा सकती है,कोरोनो से युद्ध स्तर पर लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस,सफाई कर्मचारियों व प्रशासन के लोगों का सहयोग करें,खुद बचें और अन्यों को भी बचाएं।

– भंवर मेघवंशी
(सम्पादक -शून्यकाल डॉटकॉम )

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