सादगी के भीतर प्रतिरोध एवं विकल्प के कथाकार थे स्वयं प्रकाश – डॉ शम्भु गुप्त

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अलवर।  स्वयं प्रकाश समाज की उदासीनता के बीच जीवन के सार्थक स्पंदन तथा लोक के सत्य के चितेरे कथाकार थे। सादगी और साधारणता का उनका गुण था। सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ शम्भु गुप्त ने अलवर में जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित गोष्ठी में कहा कि स्वयं प्रकाश प्रतिबद्ध  तथा संभावनाओं के बड़े कथाकार माने जाएंगे। रेल का बिम्ब उनकी गतिशीलता का पर्याय रहा। डॉ गुप्त ने विविध कथा प्रसंगों के आलोचनात्मक विवेचन के साथ उनकी पुस्तक ‘हमसफरनामा’ को एक खूबसूरत और गुणवत्तायुक्त पुस्तक कहा। उन्होंने कहा कि स्वयं प्रकाश का अलवर और राजस्थान से गहरा संबंध रहा।  


जनवादी लेखक संघ द्वारा पुराना बर्फखाना स्थित राज गुप्ता सभागार में रविवार को विख्यात कथाकार स्वयं प्रकाश के असामयिक निधन पर “स्मरण एवं विमर्श” शीर्षक से हुए आयोजन में साहित्य एवं समाज को स्वयं प्रकाश के लेखकीय व वैचारिक योगदान के लिए याद किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जलेस के राजस्थान अध्यक्ष डॉ जीवनसिंह मानवी ने कथाकार स्वयं प्रकाश के साथ अपने आत्मीय संबंधों को याद करते हुए कहा कि स्वयं प्रकाश अपने मध्यमवर्गीय जीवन को डी-क्लास कर सादा जीवन जीते हुए अपने लेखन के जरिये समाज में व्याप्त पाखंड, दोगलेपन एवं अंतर्विरोधों को उजागर करते रहे। ‘सम्मान’ कहानी का विश्लेषण करते हुए डॉ मानवी ने स्वयं प्रकाश को प्रेमचंद की परंपरा का रचनाकार बताया। कार्यक्रम में जलेस उपाध्यक्ष रेवतीरमण शर्मा ने बीज वक्तव्य में कहा कि हिंदी तथा राजस्थान के कहानी इतिहास में स्वयं प्रकाश का नाम सदैव बना रहेगा। संचालन जलेस कार्यकारिणी सदस्य डॉ देशराज वर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश बैरवा ने किया।

इस अवसर पर उनके कहानी संग्रह मात्रा और भार, आयेंगे अच्छे दिन भी, सूरज कब निकलेगा, आसमां कैसे कैसे, आदमीजात का आदमी एवं उपन्यास बीच में विनय, ज्योतिरथ के सारथी, ईंधन के बारे में विशद चर्चा हुई।


कार्यक्रम में श्रीमती राज गुप्ता, किशनलाल खैरालिया, भर्तृहरि टाइम्स की संपादक कादंबरी, एडवोकेट हरिशंकर गोयल,डॉ सुंदर बसवाल, दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक बी एल वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता सर्वेश जैन, मोहित पांचाल, एस एफ आई प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज सांवरिया, एस एफ आई ज़िला सचिव मोहित कुमार, जन विचार मंच से जुड़े प्राचार्य जीतसिंह सहित उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने जनवादी कथाकार स्वयं प्रकाश के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न आयामों का जिक्र किया।

 
कार्यक्रम के अंत में स्वयं प्रकाश जी की स्मृति में दो मिनिट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।   

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