आखिर क्या है यह जेएनयू ?

137

(आलोक वाजपेयी )
जो लोग जेएनयू को वास्तव में नही जानते और केवल उड़ी उड़ाई खबरों टीवी आदि पर निर्भर रह पाते हैं वो ये समझते हैं कि जेएनयू मतलब कम्युनिस्टों का गढ़ जो न जाने कैसे लोग होते हैं, हर समय सबकी आलोचना करते रहते हैं, चरित्रहीन टाइप होते हैं आदि आदि। 
इस तरह की गलत सोच के कई कारण हैं जिनका विश्लेषण फिर कभी। बस इतना बता दूं फिलहाल कि मार्क्सवाद कोई एक घिसा पिटा ठस टाइप ढर्रा नही है। मार्क्सवाद क्या है इस बात पर उसी प्रकार से मत मतांतर हैं जो ज्ञान की किसी भी शाखा में होते हैं। आपस मे तीखी बहसें आदि मार्क्सवाद के भीतर भी होती हैं। 
मार्क्सवाद कोई शब्दाडम्बर या शेखी नुमा लफ्फाजी नही है बल्कि ज्ञान की सतत प्रक्रिया है जो आज भी दुनिया भर में हर तरह के विद्वान अपने को अधिक प्रामाणिक बना सकने के लिए  उपयोग में लाते हैं। मार्क्सवाद में देश दुनिया समाज की समस्याओं से बिना काल्पनिक भावुक हुए ठोस तरीके से समझने और उससे निजात पाने की कोशिश की जाती है। 
एक बार फिर जेएनयू में भाजपा – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की हार हुई है। इस सरकार के निशाने पर जेएनयू हमेशा से रहा है। वहां एक धुर आरएसएस वाले वीसी को बिठाया गया है जो हर तरीके से जेएनयू को उसकी सम्रद्ध विरासत से गिराने के लिए कृत संकल्प है ,फिर भी जेएनयू को नीचा नही दिखा पा रहा है।
इसका कारण यह है कि जैसे ही कोई बच्चा जेएनयू पहुंचता है या कोई भी व्यक्ति किसी जेनुआइट से मिलता है तो वो उसकी सोच चाहे जो हो महसूस कर लेता है कि जेएनयू एक शानदार जगह है। वहां दाखिला पाये  ज्यादातर बच्चों पर जेएनयू के माहौल का असर एक जादू की तरह का होता है। वो खुद को उस महान विरासत का हिस्सा महसूस करता है और अपने संस्थान के प्रति गरिमा व जिम्मेदारी से भर जाता है।
एक खुला उदार वातावरण जहां खुली सांस लेने की आजादी है। लड़कियां जितना फ्री व खुश जेएनयू में रह सकती हैं उतना देश मे कोई दूसरी जगह नहीं। वहां के पेड़, पगडंडिया, चट्टाने, जंगल, सैकड़ों साल पुराने वृक्ष जैसे जेएनयू को अध्ययन की तप स्थली बना देते हैं जहां क्षुद्रताओं और सामंती मानसिकता की गुंजाइश ही नही है।
यहां अमीर घर गरीब घर का भेद नही है। भले हमारे मां बाप और हमारा घर ऐसा हो कि दो जून की रोटी की दिक्कत रही हो लेकिन जेएनयू हमे बाहों में भर लेता है।देश के कोने कोने से आये साधारण घरों के बच्चे जैसे एक अलग संसार में आ जाते हैं जहां महंगे कपड़े,गाड़ी घोड़ा जैसी बात को लेकर कोई काम्प्लेक्स ही न आये।
जो लोग बिना जेएनयू को जाने जेएनयू के खिलाफ के प्रोपोगंडा को सच मान बैठे हों उनसे प्रार्थना है कि जेएनयू इस देश की महानतम बौद्धिक धरोहर है। जेएनयू के साथ खड़े रहिये क्योंकि अगर हर जगह डर के मारे लोग अन्याय को शांत रहकर बर्दाश्त कर लेंगे तब भी एक जेनुआइट बिना फायदा नुकसान सोचे आप देश वासियों के हक़ के लिए आगे जरूर आएगा। क्योंकि अगर कोई जेनुआइट सच को सच और झूठ को झूठ नही बोलेगा तो फिर कौन बोलेगा। हम आपके लिए ही हैं साथी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.