विकलांगजनों से छलावा हैं ये सरकारी वादे

92
– बाबूलाल नागा

पहले भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार और अब कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार। वादा दोनों सरकारों ने ही किया। कहा हम विकलांग आंदोलन संघर्ष समिति-2016 पर लगे मुकदमे वापस ले लेंगे। समिति से जुड़े पदाधिकारियों की कई बार सरकार के आला
अधिकारियों के साथ बैठकें भी हुईं। पत्र व्यवहार भी हुआ। कई ज्ञापन भी दिए गए। समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर भी हुए पर सरकार की ओर से कुछ मिले तो सिर्फ वादे। आज यह सरकारी वादे विकलांगजनों के लिए महज छलावा साबित हो रहे है। न तो कोई सुनवाई हो रही है और न ही केस वापस लिए जा रहे हैं। सरकार की इस बेरुखी के कारण अब विकलांगजनों को अपने हक के लिए संघर्ष को मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार है कि अपने ही वादे से मुकर रही है।

विकलांग आंदोलन संघर्ष समिति-2016 (राजस्थान) ने 22 मई 2016 को 27 दिन तक
अपने 21 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन किया था। आंदोलन के दौरान शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया था। ना कहीं तोड़फोड़ हुई ना कहीं आगजनी या हिंसा की कोई घटना।

आंदोलन के दौरान संघर्ष समिति से जुड़े दो दर्जन विकलांगों पर जयपुर के अशोक नगर एवं ज्योति नगर थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज हुए थे। इन्हीं दोनों मामलों को
वापस लेने के लिए संघर्ष समिति की ओर से तत्कालीन राजे सरकार से मांग की गई थी।

वर्ष 2016 में राज्य सरकार द्वारा हाई लेवल कमेटी 2016 में गठित की गई थी। संघर्ष
समिति के पदाधिकारियों के साथ दो बैठकें हुईं थीं। तत्कालीन सामाजिक न्याय एवं
अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने दोनों थानों में दर्ज मुकदमे वापस लेने की बात भी कही थी। कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ के साथ कई बार मंत्रीमंडल की बैठकों में भी मुकदमे वापसी की बात हुई। कई बार अन्य बैठकों में भी यह वादा दोहराया गया पर केस वापस नहीं लिए गए।

22 सितंबर 2017 को आयुक्त विशेष योग्यजन धन्नाराम पुरोहित ने तत्कालीन मुख्य सचिव अशोक जैन व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी को पत्र लिखा। पत्र में समझौते अनुसार तत्काल मुकदमे वापस लेने का अनुरोध किया। नवंबर 2017 में चार दिन के आमरण अनशन के बाद जेसी मोहंती की अध्यक्षता में हुई वार्ता में भी मुकदमे वापसी की सहमति हुई थी।

9 मई 2018 को आयुक्त विशेष योग्यजन राजस्थान ने मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को विशेष योग्यजनों पर लगे मुकदमों को वापस लेने के क्रम में पत्र लिखा। मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में 8 जून 2018 को शासन सचिवालय में बैठक हुई। उस बैठक की कार्यवाही रिपोर्ट आंदोलन के पदाधिकारियों के पास है। इसमें विकलांग आंदोलन-2016 के दौरान दर्ज हुए 2 प्रकरणों पर निर्णयानुसार कार्यवाही करने की बात कही गई थी। जून 2018 में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने कलेक्टरों से वीडियो

कांफ्रेंस कर विकलांगजनों के खिलाफ कोर्ट में विचाराधीन प्रकरणों को विड्रो करने के
प्रस्ताव सरकार को भिजवाने के निर्देश दिए थे। जुलाई 2018 में 84 दिन के धरने के बाद भी ये ही वादा सरकार द्वारा दोहराया गया था। इसी दौरान समाचार पत्रों में भी खबर
छपी थी कि विकलांगजनों के खिलाफ दर्ज 2 मामले सरकार कोर्ट से विड्रो करना चाहती है।

विकलांग आंदोलन संघर्ष समिति-2016 (राजस्थान) के कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार चौधरी ने बताया कि अभी अशोक नगर थाने के मुकदमें वापस लिए गए हैं। अभी भी राजस्थान के कई विकलांगजनों को थाने में तो कभी कोर्ट में बुलाया जा रहा है जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, समाज कल्याण मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल, प्रिंसिपल सेक्रेट्री अखिल अरोड़ा को भी अवगत करवाया। इस सरकार ने अभी तक भी इन मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि यदि यह सरकार भी हमारी मांगों को लेकर कुछ नहीं करती है तो हम धरने-प्रदर्शन के लिए या सड़कों पर आने के लिए फिर तैयार हैं।

(लेखक विविधा फीचर्स के संपादक हैं)                                                                                                                                                                                                   

Leave A Reply

Your email address will not be published.