राजस्थान में सिलिकोसिस नीति जारी !

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( जयपुर 3 अक्टूबर, 2019)
विभिन्न सामाजिक संगठनों और आंदोलनों ने लंबे समय से सिलिकोसिस नीति बनाये जाने के लिए संघर्ष किया है ।  सर्वप्रथम इस बीमारी के बारे में जानकारी मिली तो कुछ इससे पीड़ित और पीड़ितों के साथ काम करने वाले लोग राजस्थान में राज्य मानवाधिकार आयोग व कई अन्य राज्यों के लोग राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में गए। राष्ट्रीय मानवाधिकार ने विभिन्न राज्य सरकारों को व राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग ने राज्य सरकार को इनके पुनर्वास के आदेश पारित किए।

दिल्ली के रहने वाले एस आज़ाद ने बताया कि कुछ पीड़ित व हम लोग माननीय उच्चतम न्यायालय में गये और उन्होंने आदेश पारित किए जिनसे खनन और अन्य पत्थर तराशी के काम में लगे लोगों को राहत मिली लेकिन अभी भी बहुत कुछ किये जाने की आवश्यकता है। आज मुख्यमंत्री द्वारा जारी की गई नीति में मुख्य रूप से सिलिकोसिस के रोगियों का चिन्हीकरण, पुनर्वास, और रोकथाम व बचाव के प्रावधान किये गये हैं। आज घोषित नीति में मुख्य  निम्न प्रावधान हैं: 

1. सिलिकोसिस का दायरा: खनन कार्य, पत्थर तराशी का कार्य करने वाले तथा उनके परिवार जन, जहां पर खनन कार्य हो रहा है या पत्थर तराशी का कार्य चल रहा है या क्रेशर से 2 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग भी इसके दायरे में आएंगे। पहले केवल खनन या पत्थर तराशी के काम में लगे श्रमिक ही इसके दायरे में आते थे।

2. यह नीति राजस्थान में निवास करने वाले व काम करने लोगों व राजस्थान के बाहर के लोग जो राजस्थान में आकर काम करते हैं उन पर लागू होगी। 

3. क्रियान्वयन का ढांचा : राज्य सरकार इसके चिन्हीकरण, पुनर्वास और रोकथाम व बचाव के लिए विस्तृत कार्यक्रम बनाएगी। चिन्हीकरण और प्रमाणन के लिए पूरी जांच की व्यवस्था बनाई जाएगी जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पंजीकरण के बाद उनके जांच की जाएगी और बोर्ड में भेजकर उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जांच की इस व्यवस्था हेतु कई प्रावधान भी किये गए हैं। पुनर्वास: राज्य सरकार प्रमाणित होते ही 3 लाख की सहायता प्रदान की जाएगी तथा मृत्यू उपरांत 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। विशेष योग्य जन के बराबर सिलिकोसिस पीड़ितों को उनके जीवित रहने तक पेंशन प्रदान की जाएगी। प्रमाणित श्रमिकों के बच्चों को पालनहार का लाभ दिया जाएगा। इनको खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल किया जाएगा तथा बीपीएल के सभी लाभ दिए जाएंगे। इनको आयुष्मान भारत भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निःशुल्क इलाज़ दिया जाएगा। इस मौके पर सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित सिरोही के पिंडवाड़ा से आये प्रकाश मेघवाल ने कहा आप पत्थरों की मीनारों के लिए तो आप लोग तालियां बजाते हैं लेकिन इनको बनाने में हमारी जान चली जाती है वह आप नहीं देखते हैं। एक तरह से ये मीनाकारी हमारे खून से बनी होती है। अजमेर जिले के मसूदा  से आई सिलिकोसिस से पीड़ित की विधवा गीता देवी ने भी मार्मिक शब्दों में अपनी बात रखी। 

इस नीति के जारी किए जाने के मौके पर देश के कई राज्यों के लोग शामिल हुए जो विभिन्न राज्यों में सिलिकोसिस पीड़ितों के साथ काम करते हैं। जिनमें उच्चतम न्यायालय के कोर्ट कमिश्नर श्रीधर राममूर्ती,  सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे, विकास भारद्वाज, राना सेनगुप्ता आदि ने भी अपने विचार रखे। अभियान का मानना है कि इनके पुनर्वास के तहत जैसे ही व्यक्ति को सिलिकोसिस पीड़ित पाया जाए हरियाणा की तर्ज पर 5000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाए और इनको विशेष विकलांगता की श्रेणी में लिया जाए जिससे इस श्रेणी में मिलने वाली सभी सुविधाएं इनको मिल सके। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिया जाए तथा इनके परिवार को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाए। 

आंदोलन की मांग थी कि जहां सिलिकोसिस होने की संभावना रहती है ऐसे सभी स्थानों का सर्वे किया जाए और सुरक्षित खनन किया जाए और ऐसे सभी यंत्र काम में लिए जाएं जो सिलिकोसिस को रोकते हैं। ऐसी सभी इकाइयों की जिम्मेदारी तय हो जहां पर काम करने से सिलिकोसिस होता है तथा सरकार इनको लीगल एड दे जिससे ये वर्कमैन्स कंपनसेशन एक्ट के तहत ये कोर्ट में दावा करके मुआवजा ले सकें सिलिकोसिस कम से कम 4 मुख्य विभिगों के संयुक्त कार्य प्रणाली से ही इनका समन्वयन किया जा सकता है जिसमें खान, स्वास्थ्य, श्रम एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग आंदोलन ने मांग की थी कि एक विभाग को समन्वयन की जिम्मेदारी दी जाए  इसमें सामाजिक संगठनों, यूनियनों को शामिल किया जाए। राज्य सरकार ने यह नीति तो बना दी है लेकिन इसका धरातल पर क्रियान्वयन ठीक ढंग से नहीं होगा तो सबसे हाशिये के सिलिकोसिस से पीड़ित लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पायेगा। 

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