कमंडल के पहियों तले बर्बाद ओबीसी वर्ग

1,177

( प्रेमाराम सियाग )
1931की जनगणना के हिसाब से ओबीसी की जनसंख्या 52%,एससी की 16% व एसटी की 7.5%थी।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 16(4)यह कहता है कि सरकार बैकवर्ड क्लास के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर सकती है।उस समय आरक्षण की व्यवस्था सिर्फ एससी व एसटी के लिए की गई थी।


1978में बने बी पी मंडल आयोग ने 12दिसंबर1980 में अपनी रिपोर्ट में जनसंख्या के हिसाब से ओबीसी को 52 %आरक्षण देने की सिफारिश की थी लेकिन मोरारजी देसाई की सरकार सरकार गिरा दी गई थी।उसके बाद हुए चुनावों में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी।उनकी हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने लेकिन बोफोर्स घोटाले के कारण जनता में भरोसा ख़ो दिया और एकजुट विपक्ष ने पटखनी दे दी।वी पी सिंह संयुक्त मोर्चे के प्रधानमंत्री बने।

एक तरफ लालू यादव,शरद यादव,मुलायम सिंह यादव सरीखे नेताओं ने वीपी सिंह पर मंडल कमीशन लागू करने पर दबाया बनाया तो दूसरी तरफ चौधरी देवीलाल 9अगस्त 1990 को दिल्ली के वोट क्लब में रैली के माध्यम से अपना शक्ति प्रदर्शन करने का एलान कर चुके थे।वीपी सिंह को लगा कि यादव नेता अगर मंडल कमीशन लागू नहीं किया तो सरकार गिरा देंगे!चौधरी देवीलाल की रैली व यादव नेताओं के दबाव के बीच वीपी सिंह ने 7अगस्त1990 को मंडल कमीशन की रिपोर्ट की धूल झाड़ी और 13अगस्त 1990 को इसे लागू कर दिया।


जब मंडल कमीशन का गठन हुआ तो उस समय जनसंघ मोरारजी देसाई के साथ था लेकिन उनकी सरकार गिरते ही 1980में भारतीय जनता पार्टी का गठन करके वाजपेयी-आडवाणी ने अलग रास्ते तय कर दिए थे और मंडल कमीशन लागू करते ही 12सितंबर1990 में दिल्ली में बीजेपी की मीटिंग हुई और मंडल के खिलाफ कमंडल अर्थात सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा की घोषणा 25सितंबर से शुरू करने का एलान कर दिया।

बिहार के समस्तीपुर में जैसे ही आडवाणी को गिरफ्तार किया गया वैसे ही वीपी सिंह सरकार गिरा दी गई और केंद्र में कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री व चौधरी देवीलाल उप-प्रधानमंत्री बन गए।चौधरी देवीलाल की मंडल कमीशन लागू करने में अप्रत्यक्ष भूमिका रही थी।उनको नकारने के लिए ही वीपी सिंह ने मंडल कमीशन लागू किया था लेकिन चौधरी देवीलाल ने चंद्रशेखर को प्रधानमंत्री बनवाकर खुद को साबित किया।


एक तरफ मंडल कमीशन के खिलाफ देशभर में सवर्णों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया तो दूसरी तरफ आडवाणी की रथ यात्रा चल रही थी।यह ऐसा दौर था कि उस समय उत्तर भारत की जाट,पटेल,मराठा जैसी बड़ी किसान जातियां सवर्णों के साथ विरोध प्रदर्शन में भाग ले रही थी तो दूसरी तरफ आओ अयोध्या चले वाले कमंडल के नारों के साथ जयकारे लगा रही थी।मंडल कमीशन की रिपोर्ट में 3743जातियों का जिक्र किया गया था उसमे ये शामिल थी।ऐसे में मंडल कमीशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और सुप्रीम कोर्ट ने 16नवंबर 1992को अपने फैसले में 50%से ज्यादा आरक्षण न करने की बात कहकर 52%ओबीसी को 27%आरक्षण तक सीमित कर दिया व 1लाख रुपये से ज्यादा आय वालों को क्रीमीलेयर की श्रेणी में डाल दिया।


एक तरफ लालू यादव व मुलायमसिंह यादव कमंडल का विरोध करते हुए मुसलमानों के नेता बन गए तो दुसरीं तरफ यादवों को आरक्षण दिलवाकर विश्वास जीत लिया।जाट,पटेल,मराठों के नेताओं ने उस समय भारी भूल की थी जिसका नतीजा हरियाणा का जाट आंदोलन, गुजरात मे पटेलों का आंदोलन व महाराष्ट्र में मराठों के आंदोलन के रूप में हमारे सामने है।ओबीसी एक क्लास है जिसके अंदर विभिन्न जातियां है लेकिन इन जातियों को कमंडल के माध्यम से जो अलग किया गया उसका खामियाजा आजतक ओबीसी क्लास भुगत रही है।

आज भी देखा जाए तो ये बड़ी जातियाँ एक तरफ कमंडल का नशा छोड़ नहीं पा रही है व दूसरी तरफ इनको आरक्षण भी चाहिए।यह कैसे मुमकिन हो पायेगा!कमंडल ने उस समय हक लेने से वंचित कर दिया लेकिन अब तो अक्ल ठिकाने आई है तभी तो आरक्षण की मांग कर रहे हो!कमंडल की छाया में बैठकर न कभी किसी को न्याय मिला है और न भविष्य में कभी मिल पायेगा।


अगर हकीकत में चाहते हो तो सबसे पहले 2011की जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी करवाकर आबादी के हिसाब से लामबंद होकर आरक्षण लेने के लिए मैदान में उतरो।एच डी देवगौड़ा की सरकार वाजपेयी ने इसीलिए गिराई थी क्योंकि उन्होंने 2001की जनगणना जातिगत करवाने का प्रस्ताव पास किया था।बाद में वाजपेयी की सरकार बनी तो इस प्रस्ताव को उलट दिया गया था।ये लोग जब तक सत्ता पर रहेंगे तब तक आबादी के मुताबिक आरक्षण तो क्या जाति आधारित जनगणना तक नहीं होने देंगे और हो भी गई तो आंकड़े जारी नहीं करेंगे।


इसलिए बेहतर उपाय यही है कि ओबीसी वर्ग जातियों में बंटने के बजाय एक क्लास के रूप में एकजुट हो और एससी/एसटी/माइनॉरिटी का समर्थन जुटाकर सत्ता पर कब्जा करे।थोड़ी बहुत हलचल ओबीसी नेताओं में होने लगी है क्योंकि निजीकरण व न्यायालयों के माध्यम से आरक्षण खत्म किया जा रहा है!जैसे ही एकजुटता की तरफ बढोगे वैसे ही ये कमंडल की तरह “मंदिर वहीं बनाएंगे”वाला भ्रमित करने वाला षड्यंत्र फिर से तैयार जरूर करेंगे इसलिए सावधान व सतर्क रहने की जरूरत है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.