दलित महिलाओं पर अत्याचार के मामलों में न्याय दिलाने में हरियाणा सरकार विफ़ल !

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हरियाणा के करनाल जिले में, 12 अक्टूबर 2019 को ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच द्वारा दलित अत्याचारो पर राज्य स्तरीय जन सुनवाई आयोजित की गई । इस जनसुनवाई में हरियाणा के करीब 13 गम्भीर दलित व महिलाओं के उत्पीड़न के मामले सुनवाई के लिए रखे गए। 
सभी गम्भीर प्रकरण रहे हैं, जिसमे मासूम बालिकाओ व महिलाओ के साथ सामुहिक दुष्कर्म व मासुम बच्चियो को देह व्यापार हेतु बेचने जैसे प्रकरण जिसमे पिडिता न्याय हेतु दर – दर भटक रही है और उल्टा पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने के लिए पीड़ितों को झूठे मुकदमो मे फ़साया जा रहा है जबकि एक तरफ राज्य व केन्द्र सरकार ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ’ का नारा देकर देश विदेशो मे झूठी वाहवाही लूट रही है, 
हरियाणा सरकार ने दलित हित मे बने SC / ST Act को राज्य मे लागू ना करके ख़त्म जैसा कर दिया और दलितो को सुरक्षा व न्याय देने मे पूर्ण रूप से विफ़ल है, जो राज्य सरकार के लिए बहुत शर्म की बात है व सरकार पर कानून लागू नही करने के सम्बन्ध में गम्भीर सवाल है  । सभी प्रकरणो को  देखने और पढ़ने से स्पष्ट हुआ कि हरियाणा सरकार दलित मुद्दो पर पूरी तरह असफल रही है जिसकी वजह से दलितो का जीना दुभर हो रहा है, 
दलित उत्पीड़न के किसी भी मामले में हरियाणा पुलिस अनुसूचित जाति/जनजाति कानून की पालना नही कर रही है, ना तो सही धाराओ में मुकदमे दर्ज किए जाते और ना ही पीड़ितों के पुनर्वास, सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।
सभी प्रकरणो को सुनकर व पढकर ऐसा लग रहा हैं कि यहाँ शासन को दलित हित मे बने कानूनो का प्रशिक्षण व जानकारी नहीं है जिसका खामयाजा दलितो को भुगतना पढ रहा है, जो हरियाणा सहित अन्य राज्यो मे भी दलित समुदाय दयनीय स्थिति मे जीवन यापन कर रहे है ।
इस जनसुनवाई ज्यूरी सदस्य के रूप सुमन देवठीया , भंवर मेघवंशी , वी ए रमेशनाथन, एडवोकेट सुनील रांगा, एडवोकेट आरती -हाईकोर्ट चंडीगढ़, आशा जी भी मौजूद थे। सुनवाई के अंत मे ज्यूरी के सभी सदस्यों ने हरियाणा सरकार की भर्त्सना की। इस जनसुनवाई मे सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता व पीड़ित लोगों ने भाग लिया ।

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