भूमि अधिकारों के लिए एकजुट होने के संकल्प के साथ ‘एशिया लैंड फोरम’ की समाप्ति !

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(3 अक्टूबर 2019)

3 अक्टूबर 2019 को एशिया लैंड फोरम समाप्त हुआ और 12 देशों के अंतर्राष्ट्रीय भूमि गठजोड़ (International Land Coalition) के सदस्य 4 दिनों के सक्रिय कार्यक्रमों से उत्साहित और ऊर्जा से भरपूर हो कर अपने अपने देश लौट रहे हैं। 

एशिया लैंड फोरम के पहले दिन 1200 महिला और पुरुषों, जो अलग अलग कार्यक्षेत्रों, और क्षेत्रों, सामाजिक संगठनों, मीडिया, शोध, और सरकारी विभागों से थे, ने भाग लिया।

एशियायी किसान संघ, फिलीपींस के राउल सोक्रेट्स ने कहा कि ‘4 दिन ऊर्जा और भारतीय समुदायों, आदिवासी, महिला, पुरुषों और युवाओं और अन्य एशियाई सदस्यों से सीख से भरपूर थे। हमने सीखा कि जेंडर समानता के साथ जन केंद्रित भूमि प्रशासन की लड़ाई लंबी है और बीच में हम शिथिल नहीं हो सकते।‘  

एशिया लैंड फोरम के दुसरे दिन भारत और अन्य एशियाई देशों के 200 लोगों ने भूमि अधिकार कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों से चारागाह भूमि, महिलाओं और युवाओं के भूमि अधिकार, भूमि सुधार, भूमि के आकंड़ों की उपलब्धता और पारदर्शिता पर चर्चा की। चर्चा में यह बात आई कि जन केंद्रित भूमि प्रशासन के लिए समुदायों, खासकर महिलाओं को केंद्र में लाना होगा।  स्वतंत्र, पूर्व एवं जानकारी होते हुए दी गयी सहमति (free prior and informed consent) के सिद्धांत को सभी कानूनों और नीतियों में शामिल करने पर ज़ोर दिया गया। 

तीसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय भूमि गठजोड़ (International Land Coalition) के सदस्यों ने उदयपुर घोषणा पत्र को अपनाया, जिसमें उन्होंने भूमि अधिकारों को पाने में हो रहे अन्याय और अहिंसा के विरुद्ध खड़े होने का संकल्प लिया।  उन्हों ने भूमि प्रशासन के विभिन्न आयामों पर चर्चा कर उन्हें समझा और विश्लेषित किया और भूमि अधिकारों के लिए एकजुट होने का सकल्प दोहराया। यह घोषणा पत्र अंतर्राष्ट्रीय भूमि गठजोड़ (International Land Coalition) के सदस्यों का ऐसे जन, महिला, युवा केंद्रित भूमि प्रशासन को समर्थन देने की प्रतिबद्धता को दिखता है, जिसमें किसानों, स्थानीय समुदायों, मूल निवासियों को भूमि और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच, नियंत्रण, मिलकियत और प्रबंधन में भागीदारी हो।  

एशिया लैंड फोरम के चौथे दिन अंतर्राष्ट्रीय भूमि गठजोड़ (International Land Coalition) के सदस्य उदयपुर ज़िले (राजस्थान) के चार गांवोंसगतडी, थामला बेरी, खाखरा खुणा, करेज और वालीगए, जहाँ वो ग्रामीण आदिवासी समुदायों से मिले और उनके संघर्ष और सफलताओं की कहानी सुनी। 

मंगोलिया से आयीं खिजाबा यखना ने कहा कि सगतडी गांव के लोगों का संघर्ष मंगोलिया के लोगों के सघर्ष से अलग नहीं है और हम एक गठजोड़ के नाते साथ साथ हैं। गांव वालों ने आज हमें चरागाह भूमि को बचाये रखने का तरीक़ा  सिखाया जो वो 30 सालों से करते रहे हैं। 

अंतर्राष्ट्रीय भूमि गठजोड़ (International Land Coalition) के सदस्य पुरे उत्साह और ऊर्जा के साथ 4 अक्टूबर को वैश्विक जय जगत यात्रा में शामिल होने दिल्ली जा रहे हैं, जहाँ वो न्याय, गरिमा और शांति के लिए भूमि सुधारों को अपना समर्थन देंगे।

एशिया लैंड फोरम हर वर्ष अलग अलग सदस्यों द्वारा आयोजित किया जाता है।  इस वर्ष इसे मारग, अहमदाबाद और लैंड फोरम इंडिया और राष्ट्रीय आयोजक समिति ने आयोजित किया था

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