बहुजन मिशन की समर्पित हस्ती है डीएन केराला

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(मनोहर मेघवाल)

आज एक बहुत महानतम् शख्सियत से कॉल पर वार्तालाप हुई, अनुभवों के खजाने से बात करके बहुत अच्छा लगा। उनका नाम डीएन केराला साहब है, जो पिछले वर्ष कांडला पोर्ट में इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन से वरिष्ठ फोरमैन के प्रतिष्ठित पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। 

सेवानिवृत्ति के बाद सपरिवार विश्व भ्रमण भी करके आए हैं, बहुत सौम्य व्यवहार के व्यक्ति हैं, सोशल मीडिया हो या फिल्ड वर्क हमेशा वंचितों के हितों को लेकर संघर्षरत रहें हैं, आप सेवा में रहते हुए भी और सेवानिवृत्ति के बाद भी “पे बैक टू सोसायटी” को फॉलो करते आ रहें हैं, ऐसी शख्सियत विरले ही मिलती हैं। 
आप मारवाड़ के पाली जिले के मूलवासी है,शिक्षा-दीक्षा गुजरात के गांधीधाम में ही हुई, नौकरी भी यही की और सेवानिवृत्त भी यहीं से हुए, अभी यहीं स्थाई निवासी हो गए। 
बहुजन मुवमेंट के प्रखर लेखकों की किताबों के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान काबिले तारीफ रहा है, अभी भी उसी जोश-जुनून के साथ महापुरुषों की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 
जिसने जातिय भेदभाव का दंश झेला है सिर्फ वो ही समझ सकता हैं कि असमानता, भेदभाव, जातिवाद क्या होता है। जिसने जातिगत अपमान को झेला है व खुद में स्वाभिमानी नज़र दौड़ाई है, उसमें जातिवाद के विरोध की ज्वाला भभकती रहती हैं। 
इस घृणित व्यवस्था के मूल कारणभूत जानते ही पाखंड विरोध, दोस्त-दुश्मन की पहचान हो जाती हैं। केराला साहब कुछ इस तरह से संघर्षों के राही बने हैं, परिस्थितियाँ विद्रोही बना देती हैं। 
80 के दशक में केराला साहब ने  मेघवंशी सुधार सभा का गठन किया था, उस सभा की पहली ही बैठक में मृत्यु भोज, न्यात, औसर-मौसर पर सुधारवादी प्रस्ताव पारित किया था, उस समय मौजिज पंचों का उचित सहयोग नहीं मिल पाने के कारण आंशिक परिवर्तन ही हो पाया था, लेकिन केराला साहब अपनी टीम के साथ सामाजिक सुधार में लगे रहे, आज भी उसी जोश में लगे ही है। 
केराला साहब ने सामाजिक मिशन में बामसेफ के फाउंडर डीके खापर्डे , बी डी बोरकर , वामन मेश्राम, एस एफ गंगवाणे , एस एस पुनवटकर जैसे व्यक्तित्वों के साथ काम किया है, वामन मेश्राम साहब इनके साथी रहे हैं, बहुतों जगह उनके साथ कार्यक्रमों का सफल आयोजन करवाया, समय परिस्थिति रही कि जब महाराष्ट्र में बामसेफ की चारों विंग एकसाथ आने को लेकर मंथन चल रहा था उसमें मेश्राम साहब की विंग साथ में नहीं आने के कारण उनसे खुद को अलग कर दिया। 

80 के दशक से लेकर आजतक क्रांतिकारी लेखन, ऐतिहासिक लेखन करने वाले बुद्धिजीवी लेखकों के लिए भी हरसंभव सहयोगी बने हैं। 
केराला साहब ने वंचित समाज की ट्रेड यूनियन का भी नेतृत्व क्षेत्रिय, राज्य से लेकर नेशनल स्तर तक किया है। 
आज इनसे वार्ता हुई तो मैं भी कम समय में बहुत कुछ जानना चाहता था, सर ने भी समय दिया, काफी लम्बी बात चली। नेहरू से लेकर वर्तमान तक समय के खुद प्रत्यक्षदर्शी है, बाबू जगजीवन राम जी के अनेकों कार्यक्रमों में भी गए,छः दशकों के दृश्यों को संजोए हुए हैं। बहुत तर्कशील व्यक्ति हैं, पाखंड से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है, शिक्षा व वैचारिक मजबूती के पक्षधर है। 
मैंने जब इनसे वामन मेश्राम साहब के बारे में जानना चाहा तो सर ने बाबूजी जगजीवन राम से वर्तमान तक की सारी राजनीतिक, सामाजिक उठापटक को बता दिया.
दरअसल हमारी बातचीत क्रांतिकारी लेखक भंवर मेघवंशी की पुस्तक “मैं एक कारसेवक था” को लेकर हुई थी, केराला साहब ने वाट्सऐप पर मैसेज किया था कि उक्त किताब मेरे पास आ गई है, लेना चाहो तो संपर्क करना। 
मैं भी विशेष कर महान इतिहासकार ताराराम जी गौतम साहब, भंवर मेघवंशी,दुसाध सर जैसे क्रांतिकारी लेखकों का लेखन पढ़ने में दिलचस्पी रखता हूँ, तो पुस्तक लेना स्वाभाविक ही है, रिप्लाई दिया, फिर कॉल करके  बातचीत किया, बहुत जल्द मुलाकात करके उक्त किताब को प्राप्त करूंगा। 
केराला साहब महापुरूषों के लेखन को लाइब्रेरी की तरह रखे हुए हैं। भंवर मेघवंशी साहब की पुस्तक “मैं एक कारसेवक था” किसी को भी चाहिए तो मेरे पर्सनल नम्बर +919714344720 पर मैसेज करके बता देना, बहुत ही क्रांतिकारी  किताब है। 

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