बीसलपुर की बधाई के साथ चिन्ता भी

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 (ओम माथुर )
आपको बीसलपुर की बधाई। अजमेर के लोगों के लिए बीसलपुर में पानी आना होली-दीवाली जैसे त्यौहार की तरह ही तो हैं । जैसे हम होली -दिवाली पर एक दूसरे को बधाई देकर खुशियां मनाते हैं,वैसे ही अब बीसलपुर में पानी आने से अजमेर की लोगों की खुशियां इसलिए बढ़ गई है कि उनके दिमाग से दो-तीन साल के लिए पानी का टेंशन दूर हो गया है। 


बीसलपुर का जलस्तर इस बार 315.50 मीटर की उच्चतम क्षमता को छू लेगा।  लेकिन सवाल ये है कि क्या इसके बाद भी कभी सिर्फ अजमेर के लिए बनी इस पेयजल परियोजना से हमें पूरा हक मिलेगा? 


यह सवाल इसलिए कि जयपुर में बीसलपुर बांध के सूखने के कगार  तक पहुंचने पर भी कई इलाकों में रोजाना, तो बाकी लाखों में एक दिन छोड़कर एक दिन पानी की सप्लाई की जा रही थी । लेकिन अजमेर की बदनसीबी देखिए,यहां 3 से 4 दिन के अंतराल में शहरी क्षेत्रों में और एक सप्ताह के अंतराल से ग्रामीण इलाकों को पानी दिया जा रहा था । 


यह तो इंद्र भगवान की  कृपा रही, वरना जलदाय विभाग में तो 31 अगस्त तक पानी होने की कहते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए थे । अगर इस बार भी मानसून की मेहरबानी नहीं होती, तो अजमेर के लोग प्यासे मरने की हालत में होते। पूरा शहर पिछले कई दिनों से यह प्रार्थना कर रहा था कि भले ही अजमेर में बरसात नहीं हो,लेकिन चित्तौड़, भीलवाड़ा और बीसलपुर के केचमेंट मे खूब बरसात हो। और शायद भगवान ने भी प्यासे अजमेरवासियों की गुहार को सुन लिया।लेकिन क्या अजमेर के जनप्रतिनिधि बीसलपुर पर जयपुर की सीनाजोरी को रोककर अजमेर को भी रोजाना पानी वितरण की व्यवस्था करा पाएंगे?  यह देखना होगा।


कहते हैं कि  केकड़ी के  विधायक और चिकित्सा चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा कि राज्य मंत्रिमंडल में खूब चलती है।  ऐसे में क्या वह अजमेर की लड़ाई लड़कर यह साबित करेंगे कि वह जिले के दबंग जनप्रतिनिधि हैं? या वह भी  अपनी कुर्सी बचाने के लिए जयपुर के नेताओं के सामने ठीक वैसे ही नतमस्तक हो जाएंगे जैसे भारतीय जनता पार्टी के शासन में यहां से दो दो  मंत्री रहे वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल तथा उसके सभी विधायक हो गए थे।

 
इन सभी ने खामोशी से अजमेर के साथ बीसलपुर के पानी को लेकर हुए अन्याय को अपने  सत्ता सुख के कारण हंसते हंसते बर्दाश्त किया। राजनीतिक  इच्छशक्ति की  यह शून्यता इसलिए और सता रही है,क्योंकि अजमेर में अब 8 में से  छह विधायक विपक्षी दल यानी भाजपा के हैं । जो भाजपाई अपनी सत्ता रहते हुए भी अजमेर के  हितों की रक्षा नहीं कर सके । वह विपक्ष में रहते हुए सिवाय बयानबाजी या धरने प्रदर्शन के और क्या कर पाएंगे ?


और देवनानी तो बहुत पहले से ये तमाशा शुरू कर चुके हैं । ना सिर्फ बीसलपुर पर बलि्क  अजमेर से जुड़े उन कई मुद्दों  व समस्याओं पर उन्होंने विधानसभा में सवाल उठाए जिन मुद्दों को मंत्री रहते हुए वे खुद हल  कराने में  नाकाम रहे थे ।


सत्ता का यही चरित्र होता है । जब तक वह व्यकि्त के खुद के पास होती है ,उसकी आवाज गले में  घुटी रहती है। लेकिन जब सत्ता  दूसरे के पास चली जाती है तो वही व्यक्ति चीखने- चिल्लाने लग जाता है । शायद इसीलिए थोथा चना बाजे घना की कहावत बनी है । 


अजमेर को रोजाना पानी की सप्लाई के सुनहरे ख्वाब सरकार और प्रशासन लंबे समय से दिखा रहा है,लेकिन रोजाना छोड़िए। आज के हालात तो ये हैं कि  3 दिन बाद भी पानी आने पर भी घरों में जश्न का माहौल होता है । लेकिन  अपनी दुर्दशा के लिए शहर के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।अगर 3 दिन बाद भी पानी नहीं आता है तो लोग नाराजगी या प्रतिक्रिया जताने के बजाय जलदाय विभाग के दफ्तरों में फोन करके पूछते हैं कि कल चौथे दिन तो पानी दे दोगे ना? अजमेर की जनता की इसी सहनशीलता की  पीठ पर दूसरे लोग सवारी का आनंद ले रहे हैं और हम छाती कूट रहे हैं ।


बीसलपुर में पानी की अच्छी आवक होने के साथ ही जयपुर जिले के आसपास के कई इलाकों को इससे जोड़ने की कवायद शुरू कर दी गई है। लेकिन अजमेर में जलदाय विभाग ने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है कि यहां जल वितरण की अवधि कब कम की जाएगी?

 
तो क्या इस बार भी बीसलपुर के पूरा भरने की खुशियां हमसे ज्यादा जयपुर के नेता और लोग मनाएंगे । और हम ऐसे ही अपनी खुशियों को दूसरों के हाथों लूटते हुए देखते रहेंगे? नाकारा जनप्रतिनिधियों, मतलबपरस्त अधिकारियों और संवेदनशील और हर किस्म के अन्याय को सहने की असीम शक्ति रखने वाली अजमेर की जनता के रुख को देखते हुए तो यही लगता है कि हम भले ही एक- दूसरे को बीसलपुर की बधाई देते रहें,लेकिन पानी तो हमें जैसे अभी मिलता है वैसे ही मिलेगा।

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