भारत में जाति स्वयं में एक राष्ट्र है !

742

उदयपुर. सोशल डेवलपमेंट फॉउंडेशन,नई दिल्ली द्वारा आज उदयपुर में चौथा आर.एम.पाल मेमोरियल लेक्चर आयोजित किया गया ।कार्यक्रम के शुरुआत में फॉउंडेशन के संस्थापक विद्याभूषण रावत ने कहा कि भारतीय समाज में जाति बहुत गहराई तक विद्यमान है । भारतीय जहां भी जाते हैं ,जाति साथ ले जाते हैं । भारत में धर्म से ज्यादा लोग जाति से गौरवान्वित होते हैं और ये जाति भारत के हर हिस्से में है चाहे वो पेरियार की धरती ही क्यों ना हो । जहां सालों तक कम्युनिस्ट सरकार होने के बाद भी जातीय हिंसा होती है । भारत में जाति केन्सर की तरह है और आप चाहे चाँद पर चले जाओ,चाहे मंगल पर लेकिन अगर जातीय हिंसा समाज में है तब तक देश सभ्य कहलाने लायक नही है । वसुधैव कुटुम्बकम तभी है जब चमार,वाल्मीकि,ब्राह्मण,राजपूत सब एक ही हो ,एक साथ हो वरना श्रेष्ठता का दम्भ भरने का कोई अर्थ नही हैं। तेलंगाना से आयी लेखक सुजाता ने कहा कि डॉ आंबेडकर ने भी कहा था कि भारत में जाति को छोड़कर सब काम किये जा सकते है क्यों कि यहां जातियता से श्रेष्ठता को नापा जाता है । मध्यप्रदेश में जहां दो दलित बच्चों को मार दिया जाता है उसी वक़्त मोदी जी विदेश में कहते है कि भारत श्रेष्ठ है । आज दलित अधिकारों,मानवाधिकारों पर बात करने वालो को जेल में डाल दिया जा रहा है ,अपनी बात करना ही crime/अपराध हो गया है ।मुख्य वक्ता दलित चिंतक भंवर मेघवंशी ने कहा कि आज इस व्याख्यान के माध्यम से आर.एम.पाल जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ता को जीवंत कर दिया है । उन्होंने जाति की समस्या को लेकर कहा कि हमारे देश में जाति इतने गहरे तक है कि अगर आप व्यक्ति के शरीर से समस्त खून निकाल दो तब भी जाति उससे बाहर नही निकलेगी । आप अगर लोगों को अपना परिचय बिना जाति के बता दो तो आपसे जाति जरूर पूछेंगे ताकि जाति के आधार पर वो निर्णय करेंगे कि आपसे कैसा व्यवहार किया जाए । लोग जानने के अधिकार का इस्तेमाल जाति जानने में ज्यादा करते हैं ।हमारा अतीत से ज्यादा प्रेम है,लोग कहते हैं कि उस जमाने में दलित वाल्मीकि ने रामायण लिख दी थी,जब इन समुदायों को आज तक कलम पकड़ने और पढ़ने का अधिकार नही मिल पाया तो कैसे उस जमाने में उन्होंने पूरा ग्रंथ लिख दिया होगा ? मूढ़ताओं पर गर्व करना हमारा काम है,हमें जाति पर अभिमान करना सिखाया गया है ।लेकिन अगर इस सवाल पर हमें बात करनी है कि ‘जाति क्यों नही जाती’ तो हमें इसके उद्गम को देखना पड़ेगा । जब भी इंसान जन्मा होगा तब संसाधनों के बंटवारे के लिए ही प्राचीन काल में वर्ण व्यवस्था बनाई होगी । वर्ण ही जाति को जन्म देने वाला है और इसका वर्णन वेद,उपनिषदों ब्राह्मण ग्रंथों में हैं ।जहां कहा गया कि ब्रह्मा ने वर्ण बनाये और जब कोई चीज देवता बनाता है तो फिर कोई उसका विरोध नही करता ।हिन्दू कोई धर्म नही बल्कि यहां ‘जाति’ धर्म है,जब कोई अछूत किसी को छू ले तो यही कहा जाता है कि धर्म भ्रष्ट हो गया है मतलब धर्म ही जाति है और जाति को निकाल दो तो इस धर्म का पिलर ढह जायेगा ।जो वर्ण व्यवस्था बनाई गई उन्होनें सिस्टमेटिक तरीके से मेहनतकशों को निम्न बना दिया । जाति ने सबसे ज्यादा नुकसान औरतों का किया,औरतों के यौन नियंत्रण के लिए ही जाति बनाई गई । देश के हजारों सालों तक गुलाम होने का कारण,गरीबी-अशिक्षा का कारण जाति ही है ।डॉ आंबेडकर ने कहा था ‘ जाति केवल श्रम ही नही श्रमिकों का भी विभाजन करती है और भारत में साम्यवाद के असफल होने का कारण भी यही है,वर्ण ने वर्ग बनने ही नही दिया ।जाति स्वयम में एक राष्ट्र है,तमाम जातियों की अपनी सेनाएं है जो अपनी जाति के लिए राष्ट्र को दरकिनार कर देते है ।जाति को अगर खत्म करना है तो इसको एक बीमारी मानना पड़ेगा वरना इसका इलाज संभव नही है ।लेखक और एक्टिविस्ट मोहन श्रोत्रिय ने कहा कि हम जब तक जाति से जुड़े तमाम मिथकों का विरोध नहीं करेंगे तब तक जाति को खत्म नही किया जा सकता । हमें पेरियार को ज्यादा पढ़ना चाहिए,उन्होंने वर्ण व्यवस्था के तमाम पोषकों का घनघोर विरोध किया ।उन्होंने 2015 के बॉम्बे हाइकोर्ट के आदेश का उदाहरण देते हुए कहा जिसमे हाइकोर्ट ने कहा कि ‘अब सरकारी दस्तावेजों में जाति का उल्लेख करना जरूरी नही है’ इस आदेश से मुझे खुशी हुई और मैने लिखा कि अब मैं एक बोझ से मुक्त हो गया हूँ,अब कहीं जाति का उल्लेख करने की जरूरत नही पड़ेगी और मेरी इसी बात का कईं लोगों ने विरोध किया कि क्या आपको अपनी जाति से शर्म आती है क्या? इससे संमझ आता है कि समाज में जाति की सबसे बड़ी बीमारी है ।हमारे प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि ‘सीवर में काम करना आध्यात्मिक काम है’ ,मैं यह कहता हूं कि एक बार आप ये करके देखो लेकिन कहना अलग है और करना अलग है।जब तक वर्ण व्यवस्था के शिखर पर बैठे व्यक्तियों का धंधा चौपट नही होगा,तब तक वर्ण और जाति खत्म नही हो सकती ।कार्यक्रम में राजस्थान,उत्तरप्रदेश ,बिहार,तेलंगाना,गुजरात सहित कईं राज्यों के लोग इस व्याख्यान में शामिल हुए ।

Leave A Reply

Your email address will not be published.