बुद्ध कोई सजावट की वस्तु नहीं !

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(डॉ.एम.एल.परिहार)
बौद्ध देशों में तथागत बुद्ध का दैनिक जीवन में वास्तव में बहुत सम्मान किया जाता है.बुद्ध की प्रतिमाओं व चित्रों का उपयोग बहुत सोच समझकर करते हैं. जबकि भारत में तो बीड़ी गुटखा व मिलावटी जहरीली विनाशकारी वस्तुएं भी देवी देवताओं के चित्र छाप कर बिना संकोच शर्म के धड़ल्ले से बेची जाती है .
पिछले कुछ सालों से दुनिया के गैरबुद्धिस्ट देशों में बुद्ध की प्रतिमाओं व चित्रों के टैटू , गारमेंट्स, अंधविश्वास, फेंगशुई आदि में काफी दुरुपयोग हो रहा हैं. मोटी तोंद वाले चीन के बुडा (buda) साधु की प्रतिमा को लॉफिंग बुद्धा के नाम शुभ होने का प्रतीक मानकर भारत में खूब बेचा जा रहा है . टैटू व डेली लाइफ के उपयोग की चीजों में भी बुद्ध के प्रतीकों का भारी दुरुपयोग किया जाता है.
बेशर्मी की हद तो तब पार हो जाती हैं जब भारत में बॉडी मसाज व स्पा सेंटर वाले भी सेंटर के अंदर व बाहर बुद्ध का बड़ा चित्र धड़ल्ले से लगाते हैं. भला बुद्ध का मसाज व स्पा से क्या संबंध ? यूं दैनिक जीवन में ये लोग धार्मिक अंधविश्वासों से जकड़े रहते हैं और बुद्ध की शिक्षाओं को हरगिज नहीं मानते हैं लेकिन धन कमाने के लिए किसी भी स्तर पर जाने में संकोच नहीं करते हैं इसलिए देवी देवताओं के चित्रों की तरह बुद्ध का भी दुरुपयोग कर अपमान करने से बाज नहीं आते हैं.
इसके लिए कुछ बुद्धिस्ट देशों ने इंटरनेशनल लेवल पर दुनिया को यह आगाह किया कि बुद्ध कोई सजावट का सामान नहीं हैं और न कोई चमत्कार कर दुख दूर करने वाले देवता. बल्कि बुद्ध व उनका धम्म तो ढोंग दिखावे से दूर जीवन में अपनाने का मार्ग है.थाईलैंड में भी लोग दूसरों द्वारा ऐसा करना बुद्ध का अपमान मानते हैं.यहां जगह जगह ऐसे बोर्ड लगे होते हैं जिसमें ऐसा नहीं करने का आग्रह किया जाता है.
अब भला दोष किसे देंवे, भारत में बुद्ध व बाबासाहेब के अनुयायी ही खुद ऐसा कर इनका अपमान कर रहे हैं. बहुजन समाज बिना सोचे समझे धड़ल्ले से डैली यूज की कई वस्तुओं में बुद्ध व अंबेडकर के चित्रों का प्रयोग करते हैं. सस्ते व हल्की क्वालिटी के टी शर्ट पर आगे पीछे ऐसे चित्र छपे लाखों टी शर्ट बेचे जाते हैं . ऐसी टी शर्ट पहनाने वाली अधिकतर संस्थाओं व व्यक्तियों को बुद्ध व बाबासाहेब की विचारधारा को फैलाने में रूचि नहीं होती हैं. आगे पीछे बुद्ध की फोटो छपी टी शर्ट पहनकर वह बेरोजगार युवा सिर्फ जय भीम बोलकर घर से बाहर निकलता हैं तो विरोधियों के साथ कई तरह के विवाद व झगड़े होते हैं .फिर बिना नहाए , पसीने से लथपथ व गंदा टी शर्ट पहनकर बाहर दिखावा करने से विचारधारा का प्रचार कैसे होता है .इस तरह खुद हम ही बुद्ध व बाबासाहेब को घृणा का पात्र बना रहे हैं, अपमान कर रहे हैं. इस पर गंभीर विचार करना जरूरी है.
…………..भवतु सब्ब मंगलं……..

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