किताबों से सामाजिक क्रांति होती है !

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(डॉ.एम.एल परिहार) झारखंड के मुख्यमंत्री मान्य. हेमंत सोरेन ने जनता से अपील की है कि वे उनसे मुलाकात के दौरान फूलों के बुके भेंट नहीं करें बल्कि बुक्स यानी अपनी पसंद की  वैचारिक जाग्रति की किताबें ही भेंट करें . जॉर्ज बर्नार्ड शा ने कहा था,” वैचारिक युद्ध में किताबें ही आपके हथियार” हैं.मुख्यमंत्री मा. हेमंत सोरेन ने बहुत ही सामाजिक क्रांतिकारी संदेश दिया है और राजनीतिक क्षेत्र में ऐसे उदाहरण कम देखने को मिलते है.दरअसल दैनिक जीवन में लोग पूजा पाठ, कर्मकांड, जन्मदिन, विवाह, सम्मान समारोह आदि में बहुमूल्य फूलों को बर्बाद कर देते हैं जबकि इन फूलों से कई मानव उपयोगी वस्तुएं बनाई जा सकती हैं. फिर भेंट करने के बाद पूजा स्थलों के बाहर, कचरा पात्रों व सड़कों पर इन बेशकीमती फूलों की जो दुर्दशा होती हैं वह चिंताजनक है . दरअसल भारतीय समाज को पानी, दूध, घी, फल, फूल आदि जैसे बहुमूल्य खाद्य पदार्थों को धार्मिक व सामाजिक परंपराओं के नाम पर बर्बाद करने की आदत सी पड़ गई है. किताबों से समाज में खुशहाली आती है.सामाजिक क्रांति आती है. अज्ञान व अंधविश्वास का अंधेरा मिटता है. ज्ञान विज्ञान का प्रचार होता है. मानव समाज को एक नई दिशा मिलती हैं. इसलिए हम सभी को दैनिक जीवन में हर अवसर पर बुके, माला, साफा व महंगे निरर्थक मोमेंटों भेंट करने की बजाय सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, वैचारिक जागृति की किताबें ही भेंट करना चाहिए.

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