TISS प्रेसिडेंट बनने के बाद भट्टाराम का पहला इंटरव्यू !

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भट्टाराम का यह चुनाव जीतना न सिर्फ टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साईंस { TISS } के लिए गौरव की बात है बल्कि साथ ही ये जीत प्रतीक है अपने ऊपर भरोसे की, संघर्षो से न हार मानने की. सुदूर रेगिस्तान के दलित-किसान-मजदूर परिवार में पैदा हुये भट्टाराम एक ऐसे इलाके से आते है, जो राजस्थान के बाड़मेर ज़िले के पचपदरा ब्लॉक में टापरा गाँव के रूप में स्थित है,जहां पर जातिगत भेदभाव व छुआछूत भयंकर रूप में विद्यमान है। यह इलाका आज भी सामंतवाद की चपेट में है। आज भी यहां दलितों को छूने तक से परहेज किया जाता है। बच्चों के साथ स्कूलों में भेदभाव आम बात है।

भट्टाराम ने अपने इलाके के कालूडी गांव में 70 दलित परिवारों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर करने वाले आतंकी जातिवादी तत्वों के खिलाफ जबरदस्त संघर्ष किया और कालूडी के मुद्दे को यूएनओ तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की। हमेशा सामाजिक मुद्दो पर हर स्तर पर मुखर रहने वाले भट्टाराम ने टाटा सामाजिक संस्थान, मुंबई में हुए छात्रसंघ के चुनावों में अध्यक्ष पद के लिए अम्बेडकराईट स्टूडेंट एसोसिएशन (ASA) की तरफ से दावेदारी पेश की थी और भारी मतों से जीत दर्ज करवाई. चुनाव के नतीजो के बाद भट्टाराम से शून्यकाल के विशेष संवाददाता नीरज बुनकर ने बातचीत की ,जिसके सम्पादित अंश यहाँ प्रस्तुत है –

नीरज – भट्टाराम सबसे पहले तो आपको जीत की बहुत-बहुत बधाई. तमाम विपरीत सामाजिक-आर्थिक-भौगोलिक परिस्थितियों को नकार कर जो आपने ये मुकाम हासिल किया है जो काबिल-ए-तारीफ़ है,आपको TISS के प्रेसिडेंट के रूप में कैसा लग रहा है ?

भट्टाराम- सबसे पहले तो मैं नमन करना चाहूंगा उन महापुरुषों के विचारों को जिनकी बदौलत मैं यहां पर पहुँच पाया हूँ जैसे- बाबा साहब अम्बेडकर, पेरियार, ज्योतिबा फुले, सावित्री फुले, फ़ातिमा शेख ओर कांशीराम जी को.मेरे को अभी भी एक छात्र की तरह महसूस हो रहा है औऱ ऐसा लग रहा है कि मुझे जो जिम्मेदारी सौपी गयी है, पूरी निष्ठा से निभाउंगा.

नीरज – आप हमें TISS में आने के पहले के संघर्ष के बारे में थोड़ा विस्तार से बताइये ?

भट्टाराम-  मेरे गांव टापरा के ही  राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से 2014 में हिंदी माध्यम से 12वीं तक शिक्षा ग्रहण की। फिर 2017 में एमबीआर राजकीय कॉलेज बालोतरा से बीए कम्पलीट किया. इसी दौरान परिवार को आर्थिकरूप से सहायता देने के लिए पढाई के साथ-साथ अप्रेल 2015 से लेकर अगस्त 2017 तक आईडिया डिस्ट्रीब्यूटर के यहां सेल्स एक्सिक्यूटिव की नौकरी की और भवन निर्माण में अकुशल श्रमिक के तौर पर मजदूरी भी की.अक्टूबर 2016 को प्राइवेट जॉब के लिए इंटरव्यू देने के लिए दिल्ली गया था. जेएनयू दिल्ली में मेरे अंकल जी के लड़के हरचंद राम पीएचडी कर रहे है. उनके साथ 2 दिन रुका लेकिन मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया.मेरे भाई साहब ने मुझे बहुत से लोगो से मिलाया ओर पढ़ने के लिए मोटिवेट किया, लेकिन उस समय मेरा एक ही लक्ष्य था, वो था- जॉब.1 जुलाई 2017 को मेरे भाई साहब ने फिर मुझे दिल्ली बुलाया था और पढ़ने के लिए प्रेरित किया.उन्होंने बहुत सारे शोधार्थी व प्रोफेसर से मुझे मिलवाया ताकि मैं उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित हो सकूँ . अगस्त 2017 में भाई साहब ने नालंदा अकादमी वर्धा के बारे में बताया ओर मुझे वहां पढ़ने के लिए जाने को बोला. सभी प्रकार की विपरीत परस्थितियों को नकारते हुए निकल पड़ा, वहां पढने के लिए, 8 महीने तक अनूप सर के सानिध्य में रहकर उच्च शिक्षा के लिए तैयारी की और 2018 में जल नीति और शासन के परास्नातक पाठ्यक्रम हेतू टाटा इंस्टीट्यूट मुम्बई में एंट्रेंस पास करके प्रवेश लिया.

नीरज- आपने कभी सोचा था कि आप एक छोटे से गाँव से निकलकर TISS में पहुँच जायेंगे ओर फिर चुनाव लड़कर प्रेसिडेंट भी बन जायेंगे ?

भट्टाराम- नही। मैंने  कभी नहीं सोचा था कि में TISS जैसे इंस्टिट्यूट में पढ़ने भी जाऊँगा। यहाँ तक की मुझे जुलाई 2017 तक तो TISS का भी पता नहीं था. TISS में प्रवेश लेने के बाद भी कभी नही सोचा था कि मैं यहाँ चुनाव लडूंगा।

नीरज  – ये ख्याल आपके मन में कब आया और आपने चुनाव लड़ने की क्यों ठानी ?

भट्टाराम- मै, पिछले वर्ष के स्टूडेंट यूनियन मे डाइनिंग हॉल रिप्रेजेंटेटिव था। वहा डाइनिंग हॉल एडमिनिस्ट्रेशन और यूनियन के साथ काम करके पता चला कि हम भी छात्र कम्यूनिटी के लिए काम कर सकते है। हर कोई SC, ST, OBC और गरीब उच्च जाति के लोगो के मुद्दे उठा कर चुनाव लड़ते है, हमारा नेता बनना चाहते हैं लेकिन हमें उस पोजिशन पर भेजना नहीं चाहते है और ना ही वे हमारी समस्या का समाधान करना चाहते है। बाबा साहेब ने कहा था जाओ दीवारों पर लिख दो ‘हम इस देश के शासक है’ । बाबा साहब ने कहा था कि हमारी समस्या की आवाज हमे ही उठानी चाहिए।  आज तक जो भी लीडर बने है, सब का उद्देश्य छात्र कम्यूनिटी के लिए काम करना होता है तो क्यो नही हम जैसे पिछड़े वर्ग के लोगो को अपनी आवाज उठाने दी जाए ताकि हम लोग सपोर्ट करके एक साथ छात्र कम्युनिटी के लिए काम कर सके।

नीरज – आप इस जीत के लिए किन लोगों को श्रेय देना चाहते है ?

भट्टाराम- उन महापुरुषों को जिनके विचारों की बदौलत में यहां पहुँच पाया जैसे कि बाबा साहब, पेरियार, फुले दम्पत्ति, फ़ातिमा शेख और कांशीराम जी को

नीरज- किन मुद्दो को लेकर आपकी प्राथमिकता रहेगी ?

भट्टाराम- सबको साथ मे लेकर काम करने की प्राथमिकता रहेगी. छात्रों की जो भी समस्या है, सॉल्व करने का प्रयास करूँगा.

नीरज- देश के मौजूदा हालातों में आप अपने पद को किस रूप में देखते है ?

भट्टाराम- जो भी देश में घृणा का माहौल बनाया जा रहा है. दलित, आदिवासी, महिलाओं व पिछडो पर जो जुल्म व अत्याचार किया जा रहा है, उसके खिलाफ़ बहुजन मीडिया के सहारे अपनी आवाज उनके हितों में बुलंद करूँगा .

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