बालरडा में बाबा रामदेव मंदिर का विवाद गहराया !

776
-हरलाल बैरवा 

कपासन विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है.इसी वर्ग का भाजपा से विधायक है, पर यहाँ के दलित समाज के लोग आज भी बराबरी के मोहताज है .दलितों का गाँवों में मंदिर प्रवेश वर्जित है ,घोड़ी पर बिन्दोली आज भी पुलिस की मदद के बिना निकलना नामुमकिन है .यहाँ आज भी दलित अपने आराध्य देव का मंदिर या चबूतरा बनाते है तो तथाकथित ऊंची जाति के लोगो से अनुमति लेना जरुरी है ।

दलितों पर बढ़ते अपराधो पर नजर डाले तो आज मनुवादी वर्ण व्यवस्था का शूद्र वर्ग (ओबीसी) दलितो का नया शोषक वर्ग बन कर उभरा है । गाँवों मे निवास करने वाली जातियों मे प्रमुख जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग से है ।अनुसूचित जाति व जन जाति के लोग आज भी इनके अहसानों तले दबे है। जब भी दलित आदिवासी वर्ग समानता/बराबरी/गरिमा/अधिकारों की बात करेगा तो सबसे पहले पिछड़े वर्ग से ही सामना होता है। बात चाहे मंदिर प्रवेश कि हो, घोड़े पर बिन्दोली निकासी कि या दलितो के अन्य मांगलिक कार्य जो दलित समाज को गरिमा देता हो ,उन्हे आजादी महसूस हो । शोषण की घटनाएं हर एक गाँव मे मिल ही जाती है।

राजस्थान के चित्तौड़गढ जिले मे आये दिन ऐसी घटनाएं होती रही है ,हमने देखी है, संघर्ष किया है। गाँव बालारडा मे रामदेव मंदिर को तारबंदी करने व बाबा के पगलिया चोरी का प्रकरण 2012 का है ।कोर्ट मे केस विचाराधीन है ,पर तनाव यथावत लगता है। 1 अक्टूबर 2019 को पगलिया चोरी प्रकरण की पेशी थी, जिसमे बालारडा गाँव के पीडित समुदाय को कोर्ट ने चोरी हुए बाबा के पगलियो को पुलिस थाना कपासन से लेने का आदेश हुआ, खुशी के मारे दलित लोगो ने एक दरख़्वास्त कपासन तहसीलदार को दी कि हम बाबा के पगलिया डीजे साउण्ड के साथ बालारडा ले जाना चाहते है ।आप हमे स्वीकृति प्रदान करे ।

तहसीलदार ने थाना अधिकारी कपासन को लिखा, दलित समाज के लोग थाना पहुंचे, जहां उनकी बात थाना अधिकारी से हुयी थानेदार ने जो कि इसी समुदाय से है- वो बोले तुमारे मे इगो है ,तुमको इसकी इजाजत नही दूंगा ,ले जाना है तो ऐसे ही ले जाओ ,उलटा दलित समाज को ही धमकाया जैसे अपराधी यही लोग हो।बाबा के पगलिये नही मिले ।
दलित समुदाय ने पूर्व के पगलिया स्थल पर काम चलाया तो 3 अक्टूबर की शाम को तहसीलदार एक फोन कोल पर काम रोकने चले गये, 4 अक्टूबर को प्रातः राजस्व विभाग के अन्य कार्मिक पहुचे ,जमीन नापी ।

पूर्व में तात्कालीन तहसीलदार व उपखंड अधिकारी ने मुख्यमंत्री के आदेश पर विवादित भूमि को नाप कर दोनो समुदाय का एक सहमति पत्र लिख हस्ताक्षर लेकर विवाद समाप्त कर दिया था, पर अब समुदाय विशेष को ये सब नागवार गुजरा ,नतीजा -पगलिया चोरी हुए ,जिन्हे पुलिस ने एक कुए से बरामद किए। 4 अक्टूबर को सभी पीड़ित दलित समाज के लोग कपासन तहसीलदार से मिलने गये ,अपना परिचय दिया व बालारडा केस मे बात करने को कहा ।तहसीलदार तुरंत बोले कोर्ट मे जाओ मेरे पास क्या है ? गाँव के ही किशनलाल बैरवा ने एक प्रार्थना पत्र दिया कि- ‘गाँव में और भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे है, नोहरे बन रहे है उन्हें रोको अतिक्रमण हटाओ .तहसीलदार बोले- सरकारी जमीन का मैं मालिक हूँ,तुम कौन होते तो कब्जा हटवाने की बात करने वाले ? ऐसा लगा जैसे तहसीलदार ने उन लोगो को अवैध कब्जा करने का प्रोत्साहन दिया हो ,तहसीलदार तरह दलित समाज के खिलाफ एकतरफा बात करने लगे .

पीड़ित पक्ष ने तहसीलदार को कहा कि आप एक साइड मत देखो दोनो पहलु देख बात करो।पूरी कहानी सुनाई फिर कहा -आप से हम ये चाहते है कि विवाद समाप्त हो ,प्रशासन के सहयोग से विवाद मिटाया जा सकता है,इस पर तहसीलदार ने कहा मैं एसडीएम साहब से बात कर आप लोगों को बताता हूँ, दोनों पक्षों को बिठा कर निराकरण करते है । इस गाँव में आज भी दलितों का मंदिर प्रवेश वर्जित है ।पीड़ित पक्ष प्रशासन ने मांग की है कि हमे हमारा हक़ मिले ,हमारे उपासना का धार्मिक अधिकार सुरक्षित रहे । विडंबना की बात यह है कि आज भी दलितो को ये लोग हिन्दू स्वीकार नही करते ,पर दलित समाज धर्म की पूंछ को ताकत से पकडे है ,फिर चाहे सिर फुटो या टांग टूटो ,इनकी पकड बहुत मजबूत है .
( लेखक सामाजिक कार्यकर्ता है )

Leave A Reply

Your email address will not be published.